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मठों-मंदिरों और घरों में भगवान परशुराम की पूजा
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people worshiped the lord parasuram in temples and homes
- फोटो : CITY DESK
लॉकडाउन के बीच शनिवार को भगवान परशुराम की जयंती पर न कहीं समारोह हो सके न गोष्ठियां। घरों में लोगों ने भगवान परशुराम की सविधि पूजा आरती की। अखाड़ों और मठों में भी भगवान परशुराम की आराधना की गई। इस दौरान कुछ संस्थाओं की ओर से ऑनलाइन परिचर्चा भी की गई। किन्नर अखाड़ा की ओर से बैरहना में लॉकडाउन का पालन करते हुए भगवान परशुराम की जयंती मनाई गई। भगवान परशुराम की तस्वीर का मोबाइल पर विधि विधान से पूजन कर फूलमाला अर्पित किया गया। महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्या नंद गिरि महराज ने कहा कि भगवान परशुराम ने सनातन धर्म को एक नई दिशा दी थी।
पुराणों में उल्लेख है कि उन्होंने असुरों के सफाए के लिए भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था। इसी तरह पीतांबरा मठ के महंत बजरंगमुनि उदासीन ने भगवान परशुराम की जयंती पर मठ में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पूजा की। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महराज ने परशुराम के आदर्शों पर चलने की अपील की। कान्यकुब्ज ब्राह्मण सभा की ओर से आयोजित समारोह निरस्त होने की वजह से समाज के लोगों ने घर-घर में भगवान परशुराम की प्रतिमा रखकर पूजा की। सभा के अध्यक्ष पं गिरिजा शंकर मिश्र ने ब्राह्मण समाज के लोगों से एक हाथ में शास्त्र और दूसरे हाथ में शस्त्र धारण करने की अपील की।
प्रयागराज सेवा समिति के दारागंज स्थित कार्यालय पर शनिवार को परशुराम जयंती पर ऑनलाइन परिचर्चा हुई। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए वक्ताओं ने अपने अपने विचार व्यक्त किए। समिति के अध्यक्ष पं धर्मराज पांडेय ने कहा कि भगवान परशुराम अनुशासन और संरक्षण के प्रतीक हैं। उन्होंने धरती से कई बार निरंकुशता को समाप्त किया था। समिति के संयोजक तीर्थराज पांडेय बच्चा भैया ने कहा कि भगवान परशुराम शस्त्र और शास्त्र दोनों के ज्ञाता थे। इस दौरान विगत 10 वर्षों से संस्था की ओर से धकाधक चौराहे पर होने वाली चोटी सम्राट प्रतियोगिता कोरोना संक्रमण की वजह से नहीं हो सकी। ऑन लाइन गोष्ठी में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष अनुपमा पांडेय, योगराज शास्त्री, डीआर पांडेय, केसी पांडेय, विष्णु दयाल श्रीवास्तव, शक्ति राज, पुष्पराज पांडेय, प्रभु राज ने विचार व्यक्त किए।
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पुराणों में उल्लेख है कि उन्होंने असुरों के सफाए के लिए भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था। इसी तरह पीतांबरा मठ के महंत बजरंगमुनि उदासीन ने भगवान परशुराम की जयंती पर मठ में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पूजा की। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महराज ने परशुराम के आदर्शों पर चलने की अपील की। कान्यकुब्ज ब्राह्मण सभा की ओर से आयोजित समारोह निरस्त होने की वजह से समाज के लोगों ने घर-घर में भगवान परशुराम की प्रतिमा रखकर पूजा की। सभा के अध्यक्ष पं गिरिजा शंकर मिश्र ने ब्राह्मण समाज के लोगों से एक हाथ में शास्त्र और दूसरे हाथ में शस्त्र धारण करने की अपील की।
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प्रयागराज सेवा समिति के दारागंज स्थित कार्यालय पर शनिवार को परशुराम जयंती पर ऑनलाइन परिचर्चा हुई। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए वक्ताओं ने अपने अपने विचार व्यक्त किए। समिति के अध्यक्ष पं धर्मराज पांडेय ने कहा कि भगवान परशुराम अनुशासन और संरक्षण के प्रतीक हैं। उन्होंने धरती से कई बार निरंकुशता को समाप्त किया था। समिति के संयोजक तीर्थराज पांडेय बच्चा भैया ने कहा कि भगवान परशुराम शस्त्र और शास्त्र दोनों के ज्ञाता थे। इस दौरान विगत 10 वर्षों से संस्था की ओर से धकाधक चौराहे पर होने वाली चोटी सम्राट प्रतियोगिता कोरोना संक्रमण की वजह से नहीं हो सकी। ऑन लाइन गोष्ठी में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष अनुपमा पांडेय, योगराज शास्त्री, डीआर पांडेय, केसी पांडेय, विष्णु दयाल श्रीवास्तव, शक्ति राज, पुष्पराज पांडेय, प्रभु राज ने विचार व्यक्त किए।
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