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पीसीएस-2019 के अभ्यर्थियों के लिए बढ़े अवसर

Sun, 13 Sep 2020 01:15 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2020 01:15 AM IST
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pcs 2019 exam
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-पीसीएस-2018 का रिजल्ट पहले आने से 2019 की मुख्य परीक्षा में कम होगी स्पर्धा
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-पीसीएस में उच्च पदों पर चयनित होने वाले ज्यादातर अभ्यर्थी छोड़ेंगे अगली परीक्षा
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा के आयोजन से पहले पीसीएस-2018 का अंतिम चयन परिणाम जारी कर अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। पीसीएस मेंस-2019 के अभ्यर्थियों के लिए आगे की राह आसान हो गई है और उनके लिए चयन के अवसर बढ़ गए हैं।
पीसीएस-2018 में चयनित हुए बहुत से अभ्यर्थियों ने पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा के लिए भी क्वालीफाई किया है। इनमें से जिन अभ्यर्थियों का चयन एसडीएम, डिप्टी एसपी जैसे उच्च पदों पर हुआ है, वे 2019 की मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं होंगे। ऐसे में पीसीएस-2019 के अन्य अभ्यर्थियों के बीच स्पर्धा कम हो जाएगी और उनके लिए चयन के अवसर बढ़ जाएंगे। पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा पहले 25 अगस्त से प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में आयोग इस परीक्षा को टाल दिया। मुख्य परीक्षा अब 22 से 26 सितंबर तक प्रयागराज, लखनऊ और गाजियाबाद के विभिन्न केंद्रों में आयोजित की जाएगी।
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दरअसल, आयोग ने पीसीएस-2018 के इंटरव्यू का सबसे पहले जो कार्यक्रम जारी किया था, उसके अनुसार साक्षात्कार 13 जुलाई से शुरू होकर सात अगस्त तक चलना था। इस बीच प्रदेश में हर शनिवार एवं रविवार को लॉकडाउन घोषित कर दिया गया, जिसके कारण आयोग को इंटरव्यू का कार्यक्रम संशोधित करना पड़ा। संशोधित कार्यक्रम के बाद पीसीएस इंटरव्यू की अंतिम तिथि 25 अगस्त निर्धारित की गई और 25 अगस्त से ही पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा भी प्रस्तावित थी।
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ऐसे में आयोग को पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा टालनी पड़ी, जो अब 22 सितंबर से शुरू होने जा रही है। पीसीएस-2019 के अभ्यर्थी भी लगातार मांग कर रहे थे कि मुख्य परीक्षा पीसीएस-2018 का अंतिम चयन परिणाम जारी होने के बाद आयोजित की जाए। पीसीएस-2018 में एसडीएम के 119 और डिप्टी एसपी के 94 पदों पर चयनित अभ्यर्थियों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्होंने पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा के लिए भी क्वालीफाई किया है। उनके मुख्य परीक्षा में शामिल होने की उम्मीद बहुत कम है। ऐसे में अन्य अभ्यर्थियों के लिए चयन के अवसर बढ़ गए हैं।
पीसीएस के रिजल्ट में इस बार नहीं दिखी ओवरलैपिंग
-एक बार आरक्षण का लाभ लेने वालों को उन्हीं की श्रेणी में चयनित किए जाने की चर्चा
प्रयागराज। पीसीएस-2018 के रिजल्ट में इस बार ओवरलैपिंग नहीं दिखी। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा (यूपीपीएससी) आयोग ने उस प्रस्ताव पर अमल किया है, जिसके तहत आरक्षित वर्ग के किसी अभ्यर्थी को परीक्षा के किसी एक चरण में एक ही बार आरक्षण का लाभ दिया जाएगा और इसके बाद अभ्यर्थी को अपने ही श्रेणी में चयनित किया जाएगा।
यूपीपीएससी की ओर से जारी पीसीएस-2018 के अंतिम चयन परिणाम से यह स्पष्ट नजर आ रहा है कि आयोग ने इस परीक्षा में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी को उन्हीं की श्रेणी में चयनित किया है। पूर्व में स्थिति बिल्कुल अलग थे। आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी को परीक्षा के पहले चरण में आरक्षण का लाभ दिया जाता था और जब वह अगले चरण के लिए क्वालीफाई कर लेता था और अनारक्षित श्रेणी के कटऑफ अंक के बराबर या उससे अधिक अंक प्राप्त करता था तो उसे अनारक्षित श्रेणी में चयनित कर लिया जाता था। ऐसे में अनारक्षित श्रेणी में मेरिट में नीचे रहने वाले अभ्यर्थियों को नुकसान होता था और वे चयन से वंचित रह जाते थे। यह मामला न्यायालय भी गया था और आयोग ने कोर्ट में हलफनामा देकर बताया था कि एक प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसके तहत परीक्षा के किसी एक चरण में आरक्षण लाभ लेने वाले अभ्यर्थी को अन्य चरणों में उसी की श्रेणी में सफल या चयनित किया जाएगा।
अनुभव प्रमाणपत्र देने के बाद ही पक्की होगी नौकरी
-पीसीएस के तहत प्रधानाचार्य के पद पर 33 अभ्यर्थियों का प्रोविजनल चयन
प्रयागराज। पीसीएस-2018 के तहत प्रधानाचार्य के पद पर 33 अभ्यर्थियों का प्रोविजनल चयन किया गया है। इनसे अनुभव प्रमाणपत्र मांगे गए थे, लेकिन ये अभ्यर्थी निर्धारित समय पर प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सके। अब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद ही उनकी नौकरी पक्की होगी।
पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा में प्रधानाचार्य पद के लिए सफल घोषित किए गए 175 अभ्यर्थियों ने अपने अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत तो किए थे, लेकिन प्रमाणपत्र संयुक्त निदेशक शिक्षा द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित नहीं थे। आयोग की ओर इन अभ्यर्थियों को निर्देश दिए गए थे कि निर्धारित प्रारूप पर अनुभव प्रमाणपत्र साक्षात्कार के समय जरूर उपलब्ध कराएं, अन्यथा प्रधानाचार्य पद के लिए उनका दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इनमें से 33 अभ्यर्थियों को प्रोविजनल रूप से चयनित किया गया है। आयोग के सचिव जगदीश का कहना है कि अभ्यर्थियों की ओर से अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद ही उनकी नियुक्ति की संस्तुति की जाएगी। उधर, भ्रष्ष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह का कहना है कि अगर कोई अभ्यर्थी प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं करेगा तो पद खाली रह जाएगा। ऐसे में आयोग को इंटरव्यू से पहले ही सुनिश्चित कर लेना चाहिए था कि अभ्यर्थी अनिवार्य रूप से अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर दें।
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