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डेंगू का खौफ दिखा खजाना भर रहे निजी अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 08 Sep 2016 02:05 AM IST
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इलाहाबाद। शहर में डेंगू के नाम पर निजी अस्पतालों की चांदी हो गई है। मरीजों से जांच के नाम पर हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं। निजी अस्पताल वाले स्वास्थ्य विभाग की गाइड लाइन को दरकिनार कर उन मरीजों को भी प्लेटलेट्स चढ़ा रहे हैं, जिनको जरूरत ही नहीं है। इसके चलते ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की मांग बढ़ गई है। बेली, कॉल्विन, एसआरएन चिकित्सालय और एएमए ब्लड बैंक में तीमारदार भटक रहे हैं। बेली अस्पताल की पैथालॉजिस्ट डॉ. नीता साहू कहती हैं कि बुधवार को 50 यूनिट प्लेटलेट्स की मांग की गई। जबकि, एक दिन पहले 62 यूनिट प्लेटलेट्स दी गई है। इसी तरह की मांग एएमए ब्लड बैंक से भी रही।
डॉ. साहू कहती हैं जिन मरीजों को प्लेटलेट्स दी गई है, उनमें से अधिकतर का काउंट 50 हजार से ऊपर बताया गया। उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत ही नहीं है। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की पैथालॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. वत्सला मिश्र कहती हैं कि प्लेटलेट्स डेंगू में ही नहीं मलेरिया समेत कई तरह के होने वाले बुखार में भी कम होता है। उससे मरीजों को घबराना नहीं चाहिए। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के मुताबिक डेंगू के मरीजों में प्लेटलेट्स 10 हजार होने पर, या जिन मरीजों का इम्यून सिस्टम कमजोर हो, हैमरेजिक बुखार हो गया हो उन्हें चढ़ाना चाहिए। कुछ बड़े निजी अस्पताल इस गाइड लाइन को नहीं मान रहे हैं। जिसके चलते प्लेटलेट्स की मांग बढ़ गई है।
जानकारों का कहना है कि डेंगू के नाम से शहर के कुछ निजी चिकित्सालय फायदा उठा रहे हैं। एक यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए एक हजार रुपये ले रहे हैं। इसमें उनका कोई खर्च भी नहीं है। डेंगू के मरीजों को जिनकी हालत गंभीर है उनको आठ से 10 यूनिट प्लेटलेट्स भी चढ़ता है। एएमए के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. युगांतर पांडेय भी यही मान रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि कुछ मरीज खुद ही प्लेटलेट्स चढ़ाने की मांग करते हैं।
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डेंगू का एक और मामला आया सामने
इलाहाबाद। शहर में डेंगू का एक और मामला सामने आया है। हालांकि मरीज प्रतापगढ़ का रहने वाला है। वह बुधवार को स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय की ओपीडी में आया था। लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सक ने भर्ती कर लिया। बाद में जांच के लिए नमूना मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायॉलॉजी विभाग में भेजा गया था। जांच में डेंगू की पुष्टि हो गई। प्रतापगढ़ के रहने वाले महेश कुमार मिश्र (27) की तबीयत कई दिन पहले खराब हुई थी। लगातार बुखार बने रहने से घर वालों ने एसआरएन में दिखाया तो मेडिसिन आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया गया।
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डॉ. साहू कहती हैं जिन मरीजों को प्लेटलेट्स दी गई है, उनमें से अधिकतर का काउंट 50 हजार से ऊपर बताया गया। उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत ही नहीं है। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की पैथालॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. वत्सला मिश्र कहती हैं कि प्लेटलेट्स डेंगू में ही नहीं मलेरिया समेत कई तरह के होने वाले बुखार में भी कम होता है। उससे मरीजों को घबराना नहीं चाहिए। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के मुताबिक डेंगू के मरीजों में प्लेटलेट्स 10 हजार होने पर, या जिन मरीजों का इम्यून सिस्टम कमजोर हो, हैमरेजिक बुखार हो गया हो उन्हें चढ़ाना चाहिए। कुछ बड़े निजी अस्पताल इस गाइड लाइन को नहीं मान रहे हैं। जिसके चलते प्लेटलेट्स की मांग बढ़ गई है।
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जानकारों का कहना है कि डेंगू के नाम से शहर के कुछ निजी चिकित्सालय फायदा उठा रहे हैं। एक यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए एक हजार रुपये ले रहे हैं। इसमें उनका कोई खर्च भी नहीं है। डेंगू के मरीजों को जिनकी हालत गंभीर है उनको आठ से 10 यूनिट प्लेटलेट्स भी चढ़ता है। एएमए के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. युगांतर पांडेय भी यही मान रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि कुछ मरीज खुद ही प्लेटलेट्स चढ़ाने की मांग करते हैं।
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डेंगू का एक और मामला आया सामने
इलाहाबाद। शहर में डेंगू का एक और मामला सामने आया है। हालांकि मरीज प्रतापगढ़ का रहने वाला है। वह बुधवार को स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय की ओपीडी में आया था। लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सक ने भर्ती कर लिया। बाद में जांच के लिए नमूना मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायॉलॉजी विभाग में भेजा गया था। जांच में डेंगू की पुष्टि हो गई। प्रतापगढ़ के रहने वाले महेश कुमार मिश्र (27) की तबीयत कई दिन पहले खराब हुई थी। लगातार बुखार बने रहने से घर वालों ने एसआरएन में दिखाया तो मेडिसिन आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया गया।