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पंत तुम्हें हम भूले, करना माफ

Fri, 20 May 2016 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 20 May 2016 01:19 AM IST
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Pant we forget you , forgive
सु‌म‌ित्रानंदन पंत की जयंती - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
आज प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती है जिन्होंने इसी संगमनगरी में ऐसे रचनात्मक संसार को साकार किया, जिससे आज की पीढ़ी ही नहीं बल्कि सदियों तक लोग लाभान्वित होंगे। बावजूद इसके ऐसी महान शख्सियत के लिए न तो रचनाकार, न साहित्यिक संस्थाएं और न ही शासन-प्रशासन ही सजग और संवेदनशील है।
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कचहरी के करीब सुमित्रानंदन पंत कुंज के भीतर एक छोटे से पार्क में उनकी प्रतिमा है लेकिन पास-पड़ोस के लोगों से इतर शायद ही लोग इस बारे में जानते या उनकी स्मृतियां सहेजने वहां पहुंचते हैं। सुमित्रानंदन पंत कुंज के मुख्य द्वार पर नेमप्लेट के सिवा ऐसा कुछ नहीं लगा है, जिससे लोग पंत की प्रतिमा तक पहुंचे या उनके बारे में कुछ जान सकें। यहां और अच्छी प्रतिमा लगाई जा सकती है। इसी तरह जिस रास्ते पर उनका आवास था, उसका नामकरण भी सुमित्रानंदन पंत मार्ग किया जा सकता है।

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इतिहासकार प्रो.ललित जोशी कहते हैं, शहरियों, शासन, प्रशासन में सुमित्रानंदन पंत की यादों को सहेजने के लिए कोई लगाव, आकर्षण ही नहीं है। मुख्य द्वार को विकसित किया जा सकता है ताकि लोगों को पता तो चले यहां कभी प्रकृति के सुकुमार कवि पंत रहते थे। मुख्य द्वार और पार्क में उनकी खास रचनाएं भी अंकित की जा सकती हैं।

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वरिष्ठ कवि यश मालवीय कहते हैं, किसी रचनाकार की रचनाएं ही नहीं बल्कि उसका व्यक्तित्व भी महत्वपूर्ण होता है। उसकी विरासत को सहेजना बेहद जरूरी है ताकि पीढ़ी दर पीढ़ी रचनाकार और पाठक के बीच रिश्ता बना रहे। संगमनगरी तो रचनाकारों का गांव रहा है। ऐसे में उनकी स्मृतियों को सहेजने के प्रति उदासीता काफी खलती है। पंत प्रकृति के कवि थे,उस पार्क को फूलों की बगिया के रूप में विकसित किया जा सकता है।




इलाहाबाद। पं.देवीदत्त शुक्ल-पं.रमादत्त शुक्ल शोध संस्थान की ओर से कवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती और संपादकाचार्य पं.देवीदत्त शुक्ल की पुण्यतिथि पर शुक्रवार को कचहरी, बेली मार्ग स्थित पं.सुमित्रानंदन पंत प्रतिमा स्थल पर शाम छह बजे मार्ल्यापण और गोष्ठी होगी।

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