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पांडुलिपियों में नजर आता है पूरा भारत
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Pandulipi exhibition at Arya Kanya Degree college in Allahabad University
- फोटो : CITY DESK
आर्यकन्या में लगी पांडुलिपि प्रदर्शनी में बोले प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा
वक्ताओं ने कहा, सर्वत्र फैली हैं पांडुलिपियां, समुचित संरक्षण की जरूरत
प्रयागराज। पांडुलिपियों में पूरा भारत नजर आता है। पांडुलिपि एक ऐसी विधा है जिसमें हमारी भारतीय संस्कृति समाहित है। मेधा की भूमि भारत वर्ष है और ऋग्वेद ने इसको साबित किया है। यह बात उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने शुक्रवार को आर्यकन्या डिग्री कॉलेज में आयोजित पांडुलिपि प्रदर्शनी एवं व्याख्यान में बतौर मुख्य अतिथि कही।
राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय, संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित प्रदर्शनी में मुख्य वक्ता उदय शंकर दुबे ने बताया कि अपने देश में पांडुलिपियां सर्वत्र फैली हैं। उन्होंने इनके समुचित संरक्षण एवं प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से बुंदेलखंड में बिखड़ी पड़ीं पांडुलिपियों के बारे में बताया। इविवि में संस्क्ृत के विभागाध्यक्ष विशिष्ट अतिथि प्रो. उमाकांत यादव ने पांडुलिपियों के सरंक्षण के लिए सरकारों के जागरूक होने एवं इसके लिए समुचित प्रबंध करने पर जोर दिया। इविवि में अरबी-फारसी की विभागाध्यक्ष डॉ. सालेहा रशीद ने कहा कि पांडुलिपियों में रोजगार निहित है।
इनका प्रकाशन विभिन्न विभागों को भी कराना चाहिए। डॉ. राम नरेश त्रिपाठी ने कहा कि पिंडी एक ऐसा स्थान है जो पांडुलिपि की जन्मस्थली है। शासी निकाय के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने पांडुलिपियों के संरक्षण का महत्व बताया। प्राचार्य डॉ. रमा सिंह ने अतिथियों का स्वागत, डॉ. ज्योति रानी जायसवाल ने संचालन एवं डॉ. नाजनीन फारुकी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौकेपर अरुणेश जायसवाल, हरिश्चंद्र दुबे, राकेश वर्मा, डॉ. ममता गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
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वक्ताओं ने कहा, सर्वत्र फैली हैं पांडुलिपियां, समुचित संरक्षण की जरूरत
प्रयागराज। पांडुलिपियों में पूरा भारत नजर आता है। पांडुलिपि एक ऐसी विधा है जिसमें हमारी भारतीय संस्कृति समाहित है। मेधा की भूमि भारत वर्ष है और ऋग्वेद ने इसको साबित किया है। यह बात उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने शुक्रवार को आर्यकन्या डिग्री कॉलेज में आयोजित पांडुलिपि प्रदर्शनी एवं व्याख्यान में बतौर मुख्य अतिथि कही।
राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय, संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित प्रदर्शनी में मुख्य वक्ता उदय शंकर दुबे ने बताया कि अपने देश में पांडुलिपियां सर्वत्र फैली हैं। उन्होंने इनके समुचित संरक्षण एवं प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से बुंदेलखंड में बिखड़ी पड़ीं पांडुलिपियों के बारे में बताया। इविवि में संस्क्ृत के विभागाध्यक्ष विशिष्ट अतिथि प्रो. उमाकांत यादव ने पांडुलिपियों के सरंक्षण के लिए सरकारों के जागरूक होने एवं इसके लिए समुचित प्रबंध करने पर जोर दिया। इविवि में अरबी-फारसी की विभागाध्यक्ष डॉ. सालेहा रशीद ने कहा कि पांडुलिपियों में रोजगार निहित है।
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इनका प्रकाशन विभिन्न विभागों को भी कराना चाहिए। डॉ. राम नरेश त्रिपाठी ने कहा कि पिंडी एक ऐसा स्थान है जो पांडुलिपि की जन्मस्थली है। शासी निकाय के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने पांडुलिपियों के संरक्षण का महत्व बताया। प्राचार्य डॉ. रमा सिंह ने अतिथियों का स्वागत, डॉ. ज्योति रानी जायसवाल ने संचालन एवं डॉ. नाजनीन फारुकी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौकेपर अरुणेश जायसवाल, हरिश्चंद्र दुबे, राकेश वर्मा, डॉ. ममता गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
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