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1200 ट्रांसफार्मर ओवरलोड, कैसे संभले आपूर्ति का बोझ
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उद्योगों, कारोबारों के ठप होने के बाद भी शहर के 12सौ से अधिक ट्रांसफारमर ओवरलोड हो गए हैं। इससे लॉकडाउन के बीच बिजली आपूर्ति बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। कुछ ऐसे भी ट्रांसफारमर चिह्नित किएगए हैं, जिन पर निर्धारित क्षमता से दो गुना अधिक भार पाया गया है। ऐसे में ट्रांसफारमरों और फीडर लाइनों की क्षमता वृद्धि के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। कहा जा रहा है कि अगर क्षमता वृद्धि नहीं की गई तो इस सीजन में ट्रांसफारमरों और फीडरों पर आग लगने की घटनाओं में वृद्धि के साथ ही बड़े नुकसान से इंकार नहीं किया जा सकता।
गर्मी चढ़ने के साथ ही ताबड़तोड़ ट्रांसफारमर जलने और फीडरों पर ट्रिपिंग होने से मुसीबत बढ़ने लगी है। खासतौर से करेलाबाग, करेली और कल्याणी देवी समेत पुराने शहर के कई इलाकों में ट्रांसफारमरों पर दो गुना से अधिक लोड होने की वजह से आपूर्ति डावांडोल हो गई है। इन इलाकों में हर रोज ट्रांसफारर्मर जल रहे हैं। अटाला व करेली में समस्या बढ़ती जा रही है। ओवरलोडिंग से जूझने वाले इलाकों में चकिया, छोटा बघाड़ा, नंदगांव, बेली, चांदपुर गांव, शांतिपुरम, शिवकुटी, खुल्दाबाद, दरियाबाद, बैगनटोला, अटाला, करेली, करेलाबाग, जेके आशियाना, करामत की चौकी में लगे ट्रांसफारमरों पर दो गुना अधिक लोड है। एक अफसर ने नाम न छापने के आग्रह पर बताया कि शहर में 12सौ से अधिक ट्रांसफारमर ओवर लोड हैं और 2100 फीडर लाइनों पर भार अधिक होने की वजह से केबलों में आग लग रही है। जरूरत से अधिक लोड बढ़ने की वजह से पांच से छह घंटे में ही ट्रांसफारमर जल जा रहे हैं। समय रहते अगर इन ट्रांसफारमरों की क्षमता वृद्धि नहीं कराई गई तो इस बार मुसीबत बढ़ने से इंकार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष पूरे पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में प्रयागराज में सर्वाधिक ट्रांसफारमर ओवरलोडिंग की वजह से जले थे। बावजूद इसके अभी तक इस समस्या के समाधान की ओर अफसरों का ध्यान नहीं गया है।
कोट
ओवरलोड ट्रांसफारमरों की जांच करने के लिए एसडीओ, जेई को निर्देशित किया गया है। ताकि उन इलाकों को चिह्नित करने के साथ ही वजहों का भी पता चल सके। इसके अलावा ओवरलोडिंग से प्रभावित इलाकों में ट्रांसफारमरों और फीडरों की क्षमता वृद्धि के निर्देश भी दिए गए हैं। ओपी यादव, मुख्य अभियंता, प्रयागराज।
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प्वाइंटर
--------------------
-66 उपकेंद्रों से शहर में होती है बिजली की सप्लाई
-4000 ट्रांसफारमरों पर है संगमनगरी की आपूर्ति का बोझ
-2100 फीडल लाइनों से होती है आपूर्ति
-1200 से अधिक ट्रांसफारमर ओवरलोड होने से बढ़ी मुसीबत
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गर्मी चढ़ने के साथ ही ताबड़तोड़ ट्रांसफारमर जलने और फीडरों पर ट्रिपिंग होने से मुसीबत बढ़ने लगी है। खासतौर से करेलाबाग, करेली और कल्याणी देवी समेत पुराने शहर के कई इलाकों में ट्रांसफारमरों पर दो गुना से अधिक लोड होने की वजह से आपूर्ति डावांडोल हो गई है। इन इलाकों में हर रोज ट्रांसफारर्मर जल रहे हैं। अटाला व करेली में समस्या बढ़ती जा रही है। ओवरलोडिंग से जूझने वाले इलाकों में चकिया, छोटा बघाड़ा, नंदगांव, बेली, चांदपुर गांव, शांतिपुरम, शिवकुटी, खुल्दाबाद, दरियाबाद, बैगनटोला, अटाला, करेली, करेलाबाग, जेके आशियाना, करामत की चौकी में लगे ट्रांसफारमरों पर दो गुना अधिक लोड है। एक अफसर ने नाम न छापने के आग्रह पर बताया कि शहर में 12सौ से अधिक ट्रांसफारमर ओवर लोड हैं और 2100 फीडर लाइनों पर भार अधिक होने की वजह से केबलों में आग लग रही है। जरूरत से अधिक लोड बढ़ने की वजह से पांच से छह घंटे में ही ट्रांसफारमर जल जा रहे हैं। समय रहते अगर इन ट्रांसफारमरों की क्षमता वृद्धि नहीं कराई गई तो इस बार मुसीबत बढ़ने से इंकार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष पूरे पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में प्रयागराज में सर्वाधिक ट्रांसफारमर ओवरलोडिंग की वजह से जले थे। बावजूद इसके अभी तक इस समस्या के समाधान की ओर अफसरों का ध्यान नहीं गया है।
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ओवरलोड ट्रांसफारमरों की जांच करने के लिए एसडीओ, जेई को निर्देशित किया गया है। ताकि उन इलाकों को चिह्नित करने के साथ ही वजहों का भी पता चल सके। इसके अलावा ओवरलोडिंग से प्रभावित इलाकों में ट्रांसफारमरों और फीडरों की क्षमता वृद्धि के निर्देश भी दिए गए हैं। ओपी यादव, मुख्य अभियंता, प्रयागराज।
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-66 उपकेंद्रों से शहर में होती है बिजली की सप्लाई
-4000 ट्रांसफारमरों पर है संगमनगरी की आपूर्ति का बोझ
-2100 फीडल लाइनों से होती है आपूर्ति
-1200 से अधिक ट्रांसफारमर ओवरलोड होने से बढ़ी मुसीबत