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गंगा से पांच सौ मीटर तक निर्माण पर रोक का आदेश बाध्यकारी
Fri, 04 Jan 2019 01:28 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 04 Jan 2019 01:28 AM IST
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Allahabad High Court
- फोटो : PTI
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हाईकोर्ट ने कहा है कि गंगा किनारे पांच सौ मीटर तक निर्माण पर रोक का आदेश प्राधिकारियों पर बाध्यकारी है। कोर्ट ने इस मामले में कुंभ मेला प्राधिकरण, इलाहाबाद विकास प्राधिकरण और पंचायती निर्वाणी अनी अखाड़ा हनुमानगढ़ी, अयोध्या के महंत धर्मदास को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है।
दारागंज के भालचंद्र जोशी और दो अन्य की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल और न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ सुनवाई कर रही है। याची के अधिवक्ता अंतरिक्ष वर्मा और विजय चंद्र श्रीवास्तव का कहना था कि दारागंज स्थित गंगा भवन को महंत धर्मदास ने खरीद लिया है। अब उसे गिराकर बिना नक्शा पास करवाए नया निर्माण किया जा रहा है। जबकि हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल 2011 को गंगा किनारे अधिकतम बाढ़ बिंदु से पांच सौ मीटर तक किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगा रखी है।
इस आदेश की अनदेखी कर अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 24 अप्रैल 2018 को शासनादेश जारी कर सभी विभागों और प्राधिकरणों को उच्चम बाढ़ बिंदु के मद्देनजर आदेशों और नियमों का पालन करने के लिए कहा गया है। कोर्ट का कहना था कि यदि उच्चम बाढ़ बिंदु से पांच सौ मीटर तक की रोक का आदेश यदि प्रभावी है तो प्राधिकारी इसका पालन करने के लिए बाध्य हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।
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दारागंज के भालचंद्र जोशी और दो अन्य की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल और न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ सुनवाई कर रही है। याची के अधिवक्ता अंतरिक्ष वर्मा और विजय चंद्र श्रीवास्तव का कहना था कि दारागंज स्थित गंगा भवन को महंत धर्मदास ने खरीद लिया है। अब उसे गिराकर बिना नक्शा पास करवाए नया निर्माण किया जा रहा है। जबकि हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल 2011 को गंगा किनारे अधिकतम बाढ़ बिंदु से पांच सौ मीटर तक किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगा रखी है।
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इस आदेश की अनदेखी कर अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 24 अप्रैल 2018 को शासनादेश जारी कर सभी विभागों और प्राधिकरणों को उच्चम बाढ़ बिंदु के मद्देनजर आदेशों और नियमों का पालन करने के लिए कहा गया है। कोर्ट का कहना था कि यदि उच्चम बाढ़ बिंदु से पांच सौ मीटर तक की रोक का आदेश यदि प्रभावी है तो प्राधिकारी इसका पालन करने के लिए बाध्य हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।
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