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आर्यसमाज मंदिर चौक में रिसीवर की नियुक्ति का आदेश रद्द

Thu, 05 Mar 2020 09:06 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 05 Mar 2020 09:06 PM IST
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Order of appointment of receiver at Aryasamaj Mandir Chowk canceled
court - फोटो : prayagraj
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आर्य समाज मंदिर चौक की प्रॉपर्टी अटैच करने और वहां रिसीवर नियुक्त करने के सिटी मजिस्ट्रेट इलाहाबाद के आदेश को रद्द कर दिया है । कोर्ट ने कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट ने आदेश पारित करते समय अपने न्यायिक विवेक का इस्तेमाल नहीं किया। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को भविष्य में सतर्क रहने की भी नसीहत दी है। आर्य समाज ट्रस्ट के सचिव अनूप केसरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति रामकृष्ण गौतम ने दिया ।
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याची के अधिवक्ता विमलेंदु त्रिपाठी का कहना था सिटी मजिस्ट्रेट ने 28 नवंबर 2019 और 24 दिसंबर 2019 के आदेशों से चौक स्थित आर्य समाज मंदिर की प्रापर्टी अटैच कर उस पर रिसीवर नियुक्ति कर दिया। ऐसा आदेश पारित करते समय उन्होंने मामले के तथ्यों पर विचार किए बिना उसे नजरअंदाज कर दिया। याची का कहना था कि आर्य समाज ट्रस्ट द्वारा संचालित आर्य समाज मंदिर का प्रबंधन उसके द्वारा किया जाता है। याची 2017 में हुए चुनाव में मंत्री चुना गया था। मंदिर के प्रबंधन को लेकर पूर्व मंत्री प्रताप नारायण मिश्र ने  सिविल वाद भी दायर किया है, जो लंबित है।
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दोनों के बीच प्रशासनिक कार्यालय के प्रबंधन का विवाद है न कि मंदिर की संपत्ति पर कब्जे का। इसके बावजूद सिटी मजिस्ट्रेट ने प्रताप नारायण की शिकायत पर बिना इस बात पर ध्यान दिए कि यहां विवाद प्रॉपर्टी पर कब्जे का नहीं है, आर्य समाज मंदिर चौक की प्रॉपर्टी अटैच कर ली तथा वहां रिसीवर नियुक्त कर दिया। सोसाइटी प्रबंधन का विवाद तय करने का अधिकार उपनिबंधक सोसाइटीज को है।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों के तथ्यों को सुनने के बाद कहा कि मजिस्ट्रेट को प्रॉपर्टी के कब्जे से संबंधित विवाद में ही प्रॉपर्टी अटैच करने का अधिकार है। यहां सोसाइटी का विवाद था इसलिए क्षेत्राधिकार सोसायटी एक्ट के तहत सब रजिस्ट्रार को है। खासतौर से जब इस मामले में सिविल सूट लंबित है तो मजिस्ट्रेट को ऐसा आदेश पारित करने का अधिकार नहीं था। कोर्ट ने सिटी मजिस्ट्रेट के 28 नवंबर 2019 और 24 दिसंबर 2019 के आदेशों को रद्द करते हुए मामला उनके पास नए सिरे से निस्तारण के लिए वापस भेज दिया।
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