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जिला अदालतों के बर्खास्त कर्मचारियों को प्रत्यावेदन देने का मौका
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जिला अदालतों के बर्खास्त कर्मचारियों को प्रत्यावेदन देने का मौका
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालतों में कार्यरत कर्मचारियों को सेवा से हटाने के खिलाफ महानिबंधक के समक्ष प्रत्यावेदन दाखिल करने का अवसर दिया है। इन कर्मचारियों को निर्धारित अर्हता ट्रिपल सी प्रमाणपत्र न पेश करने के आधार पर दो साल की सेवा के बाद हटा दिया गया है। याचीगण का कहना है कि उनके पास सक्षम प्रमाणपत्र है, जिसे मान्य नहीं किया गया जो नियमों के विपरीत है।
कोर्ट ने अपील दाखिल करने में 913 दिन की देरी माफ कर दी है और कहा है कि अपीलार्थी, दीपक शर्मा केस के फैसले के अनुसार सेवा समाप्ति के खिलाफ प्रत्यावेदन दे सकते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रमनाथ तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने आजमगढ़ के रणजीत कुमार एवं कई अन्य जिलों के कर्मचारियों की विशेष अपील निस्तारित करते हुए दिया है। अपील पर अधिवक्ता वीसी श्रीवास्तव, शरदचंद्र मिश्र ने बहस की। सिविल कोर्ट स्टाफ भर्ती में ऐसे लोगों को बर्खास्त कर दिया गया था जो ट्रिपल सी प्रमाणपत्र धारक नहीं थे। कोर्ट ने समकक्ष प्रमाणपत्रों को भी ट्रिपल सी के बराबर माना है। इसी के आधार पर कोर्ट ने प्रत्यावेदन देने का मौका दिया है।
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालतों में कार्यरत कर्मचारियों को सेवा से हटाने के खिलाफ महानिबंधक के समक्ष प्रत्यावेदन दाखिल करने का अवसर दिया है। इन कर्मचारियों को निर्धारित अर्हता ट्रिपल सी प्रमाणपत्र न पेश करने के आधार पर दो साल की सेवा के बाद हटा दिया गया है। याचीगण का कहना है कि उनके पास सक्षम प्रमाणपत्र है, जिसे मान्य नहीं किया गया जो नियमों के विपरीत है।
कोर्ट ने अपील दाखिल करने में 913 दिन की देरी माफ कर दी है और कहा है कि अपीलार्थी, दीपक शर्मा केस के फैसले के अनुसार सेवा समाप्ति के खिलाफ प्रत्यावेदन दे सकते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रमनाथ तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने आजमगढ़ के रणजीत कुमार एवं कई अन्य जिलों के कर्मचारियों की विशेष अपील निस्तारित करते हुए दिया है। अपील पर अधिवक्ता वीसी श्रीवास्तव, शरदचंद्र मिश्र ने बहस की। सिविल कोर्ट स्टाफ भर्ती में ऐसे लोगों को बर्खास्त कर दिया गया था जो ट्रिपल सी प्रमाणपत्र धारक नहीं थे। कोर्ट ने समकक्ष प्रमाणपत्रों को भी ट्रिपल सी के बराबर माना है। इसी के आधार पर कोर्ट ने प्रत्यावेदन देने का मौका दिया है।
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