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अब संसद ही बदल सकती है इविवि का नाम

Thu, 14 May 2020 02:53 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो न्यूज नेटवर्क, प्रयागराज
न्यूज नेटवर्क, प्रयागराज Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो Updated Thu, 14 May 2020 02:53 PM IST
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only Parliament can change the name of Allahabad University
इलाहाबाद विश्वविद्यालय
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के नाम बदले जाने के प्रस्ताव को कार्य परिषद के सदस्य खारिज कर चुके हैं और अब केवल संसद ही विश्वविद्यालय का नाम बदल सकती है। फिलहाल कार्य परिषद सदस्यों की ओर से लिए गए निर्णय को कार्य परिषद की अगली बैठक में रिपोर्ट किया जाएगा ताकि विश्वविद्यालय के मौजूदा नाम को बरकरार रखे जाने के फैसले पर अंतिम मुहर लगाई जा सके।
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कुछ दिनों पहले केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से अचानक एक पत्र जारी किया गया, जिसमें कहा गया था कि इविवि का नाम बदलने का प्रस्ताव कार्य परिषद के सदस्यों की राय समेत दो दिनों के भीतर मंत्रालय को भेज दिया जाए। मंत्रालय के पत्र को लेकर चौतरफा विरोध शुरू हो गया। २४ घंटे में इसके खिलाफ देश भर में फैले इविवि के पुरा छात्रों ने ऑनलाइन अभियान शुरू कर दिया और इविवि की कार्य परिषद को भी इसके विरोध में खुलकर सामने आना पड़ा।
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इविवि प्रशासन ने इस मसले पर कार्य परिषद के १५ सदस्यों से राय मांगी थी और इनमें से १२ सदस्यों ने इविवि के वर्तमान नाम को ही बराकरार रखने पर सहमति जताई, जबकि अन्य तीन सदस्यों ने कोई राय व्यक्त नहीं की। ऐसे में मान लिया गया है कि पूरी कार्य परिषद मंत्रालय की मंशा से सहमत नहीं है।
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कार्य परिषद के सदस्यों की राय के आधार पर इविवि प्रशासन ने एक प्रस्ताव मंत्रालय को भेज दिया था। सदस्यों की राय आने के बाद यह तय हो गया है कि कार्य परिषद इविवि का नाम बदलने पर सहमत नहीं है। इविवि प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि कार्य परिषद की अगली बैठक में सदस्यों की ओर से लिए निर्णय को रिपोर्ट किया जाएगा, ताकि नाम न बदले जाने के निर्णय पर अंतिम मुहर लगा दी जाए और विवाद का अंत हो।

हालांकि जानकार मानते हैं कि विश्वविद्यालय का नाम बदले जाने का एक रास्ता बचा है। सरकार चाहे तो सीधे संसद में प्रस्ताव लाकर नाम बदलने पर निर्णय ले सकती है। इसके लिए सरकार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय अधिनियम-२००५ में संशोधन का प्रस्ताव लाना होगा।

इसके विपरीत अगर कार्य परिषद की ओर से नाम बदलने पर मुहर लगा दी जाती तो भी अधिनियम में संशोधन के लिए प्रस्ताव संसद में ही लाया जाता लेकिन तब नाम बदलने में ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी पड़ती। लेकिन,कार्य परिषद की ओर से प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद संसद में ऐसा कोई प्रस्ताव आता है तो राष्ट्रीय स्तर पर इसका विरोध हो सकता है। तमाम राजनेता एवं नौकरशाह इविवि के छात्र रह चुके हैं और उन्होंने भी नाम बदले जाने के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान छेड़ रख है।

नाम बदलने के विरोध में यह तर्क भी दिया जा रहा है कि जब देश के सबसे पुराने और प्रमुख विश्वविद्यालयों, जैसे मद्रास विश्वविद्यालय, कलकत्ता विश्वविद्यालय, बंबई विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदला तो इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम किस आधार पर बदला जा सकता है।

कुछ लोगों को इविवि के नाम से आती है गुलामी की बू

इविवि के नाम बदले जाने के मुद्दे पर सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रियाएं दी जा रही हैं। ज्यादातर लोग नाम बदले जाने का विरोध कर रहे हैं लेकिन कुछ लोगों को इविवि के नाम से गुलामी की बू आती है। ऐसे लोगों को इविवि के पूर्व शिक्षक प्रो. एके श्रीवास्तव ने फेसबुक पर जमकर खरी-खोटी सुनाई है।


प्रो. श्रीवास्तव का कहना है कि इविवि हमारी मातृ संस्था है और १८५७ से लेकर अब तक इसक नाम इलाहाबाद विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय के तमाम कार्यक्रमों में हम कुलगीत गाकर मातृ संस्था की पूर्जा अर्चना भी करते हैं। हमारी संस्कृति में मां का नाम बदलने का कोई उदाहरण नहीं है। जिन लोगों को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नाम से गुलामी की बू आती है वे मेहरबानी करके फेसबुक पर मेरी मित्रता सूची से निकलने की कृपा करें।
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