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संगम तीरे सनातन धर्म को मिली थी ‘संजीवनी’ 

Wed, 11 May 2016 02:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 11 May 2016 02:40 AM IST
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 On the birth anniversary of Adi Shankaracharya
आदि शंकराचार्य - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
भारत वर्ष समेत विश्व के कोने-कोने में सनातन धर्म की जो अलख जगी हुई है, इसका वर्तमान स्वरूप हजारों वर्ष पहले संगम किनारे ही तय हुआ था। आदि शंकराचार्य और कुमारिल भट्ट के संवाद के बाद सनातन धर्म को संजीवनी मिली और आदि शंकराचार्य ने संप्रदायों में विखंडित हो चुके सनातन धर्म को संगठित कर मजबूती प्रदान की। 
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शंकराचार्य से संबंधित ग्रंथों में वर्णित प्रसंगों के मुताबिक अद्वैत वाद का प्रचार कर रहे आदि शंकराचार्य जब संगम नगरी पहुंचे तब उनकी भेंट तुषाग्नि (भूसे की आग) पर बैठे कुमारिल भट्ट से हुई। जैन और बौद्ध धर्म के बीच सनातन धर्म को ऊंचाइयां देने के लिए प्रयत्नशील रहे 80 वर्षीय कुमारिल भट्ट का आधा शरीर उस वक्त जल चुका था। 16 वर्षीय आदि शंकराचार्य ने उनसे इस तरह खुद को जलाने का कारण पूछा और पहले जैसा बना देने की बात कही। कुमारिल भट्ट ने उत्तर दिया कि ‘मैंने दो पातक (पाप) किए हैं, जिसके के लिए प्रायश्चित कर रहा हूं। पहला बौद्ध गुरु का तिरस्कार और दूसरा जगत के कर्ता और कर्मफल के दाता ईश्वर में पूरी आस्था होने के बावजूद मैंने उनका खंडन किया। मैं जानता हूं कि मेरी अंतरात्मा शुद्ध और दोष हीन है। इसके बावजूद लोक शिक्षण के लिए प्रायश्चित का अनुष्ठान कर रहा हूं। अंगीकृत व्रत को छोड़ नहीं सकता हूं।’ उन्होंने शंकराचार्य से देश के चारों कोनों में मठों की स्थापना और भव्य मंदिर निर्माण कराने की भी बात कही। साथ ही इस कार्य में उनके शिष्य मंडन मिश्र जो द्वैत वाद, कर्मकांड में माहिर थे से मिलने की सलाह दी। 
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प्रख्यात ज्योतिषाचार्य और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. गिरिजाशंकर शास्त्री बताते हैं कि सनातन धर्म का वर्तमान स्वरूप देने वाले आदि शंकराचार्य ने वैदिक धर्म का मंडन और अवैदिक का खंडन किया है, जिसकी रूपरेखा संगम तट पर ही बनी थी। मंडन मिश्र को शिष्य बनाने का निर्देश कुमारिल भट्ट ने दिया था। कुमारिल भट्ट की सलाह पर ही विभिन्न संप्रदायों में विखंडित सनातन धर्म को मजबूती देने के लिए चार पीठ द्वारकाशारदा, पुरी, ज्योतिष और शृंगेरी पीठ की आदि शंकराचार्य ने स्थापना की। ईश्वर की सत्ता को स्थापित करने के लिए भव्य मंदिरों बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री आदि का निर्माण कराया। सनातन धर्म में अनुशासन कायम रहे इसके लिए दशनामी अखाड़ों की भी स्थापना की। आदि शंकर विमान मंडपम के व्यवस्थापक रमणी शास्त्री के अनुसार आदि शंकर विमान मंडपम मंदिर कुमारिल भट्ट और आदि शंकराचार्य के मिलन को समर्पित है। मंदिर में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा की स्थापना की गई है, जहां पर रोजाना आदि शंकराचार्य की षोडसोपचार पूजा अर्चना की जाती है। 
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