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Allahabad High Court : हाईकोर्ट ने एक केस के आधार पर गुंडा एक्ट के तहत जारी नोटिस की रद्द

Sat, 24 Jun 2023 12:43 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 24 Jun 2023 12:43 PM IST
सार

याची की ओर से तर्क दिया गया कि अपर पुलिस आयुक्त आगरा ने उस पर एत्मादपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के लिए 15 मई 2023 को नोटिस जारी की है। जबकि, उसके खिलाफ गलत तरीके से प्राथमिकी दर्ज कराई गई और झूठे आरोप लगाए गए हैं।

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On the basis of one case, the High Court canceled the notice issued under the Goonda Act
Allahabad High Court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा के एत्मादपुर थाने में दुष्कर्म और मारपीट के मामले में दर्ज केवल एक प्राथमिकी के आधार याची के खिलाफ उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत अपर पुलिस आयुक्त की ओर से जारी नोटिस को सही नहीं माना और उसे रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर याची के खिलाफ कोई नए तथ्य सामने आएं तो नए सिरे से कारण बताओ नोटिस जारी की जा सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति गजेंद्र कुमार की खंडपीठ श्री चंद उर्फ श्री निवास उर्फ राम निवास की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

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याची की ओर से तर्क दिया गया कि अपर पुलिस आयुक्त आगरा ने उस पर एत्मादपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के लिए 15 मई 2023 को नोटिस जारी की है। जबकि, उसके खिलाफ गलत तरीके से प्राथमिकी दर्ज कराई गई और झूठे आरोप लगाए गए हैं। ट्रायल कोर्ट ने मामले में उसे जमानत दे रखी है।

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याची न तो किसी गैंग का मुखिया है और न ही सदस्य है। याची ने अपर पुलिस आयुक्त की नोटिस को सुप्रीम कोर्ट द्वारा विजय नारायण सिंह बनाम बिहार राज्य व अन्य और इमरान उर्फ अब्दुल कुदुस खान बनाम यूपी राज्य मामले में दिए गए आदेश के खिलाफ बताया। यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने भी सुप्रीम कोर्ट के इन्हीं आदेशों के आधार पर महेंद्र / पप्पू बनाम यूपी राज्य व अन्य के मामले में जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया था।

इस पर कोर्ट ने कहा कि इन तथ्यों के आलोक में सरकारी अधिवक्ता द्वारा कोई बहस नहीं की जा सकती है। लिहाजा, तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याची के खिलाफ जारी नोटिस को रद्द किया जाता है। अगर, याची के खिलाफ कोई नए तथ्य सामने आते हैं तो नए सिरे से नोटिस जारी करने की प्रतिवादी को छूट रहेगी।

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