फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Nursery training certificate is not equal to BTC, court rejected the application

इलाहाबाद हाईकोर्ट: 'बीटीसी के बराबर नहीं है नर्सरी प्रशिक्षण प्रमाण पत्र', कोर्ट ने खारिज की अर्जी

Sat, 17 Feb 2024 12:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 17 Feb 2024 12:39 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नर्सरी प्रशिक्षण प्रमाण बीटीसी के बराबर मानने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि नर्सरी ट्रेनिंग सर्टिफिकेट प्री स्कूल और कक्षा दो तक पढ़ाने के लिए दिया जाता है, जबकि बीटीसी कक्षा पांच तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए डिप्लोमा कोर्स है।

विज्ञापन
Nursery training certificate is not equal to BTC, court rejected the application
अदालत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नर्सरी प्रशिक्षण प्रमाण पत्र को बीटीसी (बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट) के बराबर मानने से इनकार किया है। कोर्ट ने अर्जियां खारिज करते हुए कहा कि बीटीसी का पाठ्यक्रम कक्षा 5 तक पढ़ाने के लिए है, जबकि सर्टिफिकेट ट्रेनिंग (शिशु शिक्षा) की पाठ्य सामग्री प्री-स्कूल से कक्षा-2 तक पढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई है। दोनों कोर्स को बराबर नहीं माना जा सकता।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने बाराबंकी जिले की माला यादव, ममता, बिंदु यादव व अन्य की याचिकाओं को खारिज करते हुए यह आदेश दिया। याचीगणों ने उप्र बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित प्राथमिक विद्यालयों में 2013 में सहायक अध्यापक के लिए आवेदन किया था। आवेदकों ने नर्सरी प्रशिक्षण प्रमाण पत्र के आधार पर सहायक शिक्षक भर्ती की काउंसलिंग में भाग लिया, लेकिन आवश्यक योग्यता नहीं होने का हवाला देकर नियुक्त नहीं दी गई।

विज्ञापन

याचीगण ने दलील दी कि उन्होंने नर्सरी प्रशिक्षण प्रमाण पत्र को उसी तरह से हासिल किया है, जैसे दो वर्षीय बीटीसी या दो वर्षीय उर्दू बीटीसी पाठ्यक्रम है। दावा किया कि यह प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, प्रारंभिक शिक्षा में डिप्लोमा के बराबर है और बीटीसी के बराबर भी। लिहाजा, वह भी इसके लिए न्यूनतम पात्रता रखते हैं।

सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि याचीगण ने ऑनलाइन फॉर्म में बीटीसी उत्तीर्ण बताते हुए आवेदन किया था, जबकि उन्होंने बीटीसी कभी किया ही नहीं। यह धोखाधड़ी की गई। चूंकि न्यूनतम पात्रता बीटीसी उत्तीर्ण थी, जो याचीगण नहीं हैं। इसी के साथ कोर्ट ने याचीगण की अर्जियां खारिज कर दीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed