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अब आयोग और अफसरों को बचाने की कवायद

ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद Updated Tue, 31 Mar 2015 12:10 AM IST
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पेपर आउट होने के बाद पीसीएस-2015 प्री की पहली पाली की परीक्षा तो निरस्त कर दी गई लेकिन इतने बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के लिए 24 घंटे बाद भी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और संबंधित विभाग के अफसरों की कोई जवाबदेही तय नहीं की गई। महज एक  परीक्षा केंद्र के इर्दगिर्द घूम रही जांच इस बात के संकेत दे रही है कि कहीं न कहीं अफसरों को बचाने की कवायद शुरू हो गई है और आयोग को भी क्लीन चिट देने की पूरी तैयारी है।
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अगर पेपर आउट होने की घटना के सुबूत सामने न आते तो इस बात की उम्मीद बहुत कम थी कि आयोग पहली पाली की परीक्षा निरस्त करता। पहले दिन तो आयोग के अफसरों ने माना ही नहीं कि पेपर आउट हुआ है। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा और पेपर आउट होने के सुबूत सामने आए तो खुद को चौतरफा घिरा देख 24 घंटे बाद सोमवार को आयोग की ओर से तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई गई और इस पूरे मामले में लखनऊ स्थित एक परीक्षा केंद्र को दोषी माना गया।


 कार्रवाई के नाम पर अब सिर्फ परीक्षा केंद्र पर निशाना साधा जा रहा है जबकि जानकारों का कहना है अफसरों की मिलीभगत के बगैर इतनी बड़ी गड़बड़ी को अंजाम देना मुमकिन नहीं। सेंटर पर भी परीक्षा से आधा घंटा पहले पेपर का बंडल खुलना चाहिए जबकि प्रश्नपत्र डेढ़ घंटे पहले ही बाहर आ गया था। सवाल यह भी है कि इतनी जल्दी पेपर की बोली कैसे लग गई। इसके अलावा भी तमाम सवाल हैं, जो इस पूरे मामले में आयोग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

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