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प्रयागराज : अब मेडिकल कालेज के प्लेटलेट्स और ब्लड पैकेट पर होगा बार कोड, कई अन्य बदलाव की भी तैयारी
Sat, 22 Oct 2022 09:39 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 22 Oct 2022 09:39 PM IST
सार
झलवा के ग्लोबल हॉस्पिटल व ट्रामा सेंटर में डेंगू मरीज प्रदीप पांडे को जो फर्जी प्लेटलेट्स चढ़ाया गया था, उनके पैकेट पर एसआरएन का टैग लगा हुआ था। हालांकि कॉलेज प्रशासन ने पहले ही साफ कर दिया है कि यह प्लेटलेट्स उसके यहां से नहीं ली गई है।
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- फोटो : डेमो पिक
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विस्तार
फर्जी प्लेटलेट्स में स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल का टैग इस्तेमाल होने को कॉलेज प्रशासन गंभीरता से लिया है। अब मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज कुछ अहम बदलाव करने की तैयारी में है। ब्लड व प्लेटलेट्स के पैकेट पर जल्द ही बार कोड इस्तेमाल करने की तैयारी है। जिससे प्लेटलेट्स व ब्लड की पूरी जानकारी मरीज के परिजन व अस्पताल प्रशासन के पास मौजूद रहे।
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झलवा के ग्लोबल हॉस्पिटल व ट्रामा सेंटर में डेंगू मरीज प्रदीप पांडे को जो फर्जी प्लेटलेट्स चढ़ाया गया था, उनके पैकेट पर एसआरएन का टैग लगा हुआ था। हालांकि कॉलेज प्रशासन ने पहले ही साफ कर दिया है कि यह प्लेटलेट्स उसके यहां से नहीं ली गई है। मेडिकल कॉलेज के मुताबिक उसके यहां से जो प्लेटलेट्स मिलती है उसमें एसआरएन का टैग नहीं होता है। बल्कि उसकी जगह मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज का टैग होता है।
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बारकोड से क्या होता है फायदा
बारकोड की मदद से उत्पादों के बचे स्टॉक की आसानी से गणना तथा प्रोडक्ट की ट्रैकिंग सरलतापूर्वक हो जाती है। मोबाइल से बारकोड स्कैन किए जाने पर पता चल जाता है कि प्रोडक्ट की गुणवत्ता क्या है, इसकी पैकिंग कब हुई, प्रोडक्ट कहां तैयार हुआ सहित अन्य जानकारियां उपभोक्ता को तुरंत मिल जाती है। इससे फर्जीवाड़े की संभावना समाप्त हो जाती है।
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जो प्लेटलेट्स पाई गई है वह मेडिकल कॉलेज की नहीं है। अगर किसी को ब्लड या प्लेटलेट्स चाहिए वह सीधा अस्पताल से ले, किसी दलाल से लेने की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही ब्लड व प्लेटलेट्स के पैकेट पर बार कोड का इस्तेमाल किए जाने पर विचार किया जा रहा है। - डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, मोती लाल नेहरू मेडिकल कालेज