Holi 2022 : अबकी सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगी होली, जानें कब तक है शुभ मुहुर्त
फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि इस बार 17 मार्च को है। इसी पूर्णिमा तिथि पर असत्य और बुराई की प्रतीक होलिकाओं का दहन किया जाएगा। इसके अगले दिन 18 मार्च को चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि को रंगों की होली खेली जाएगी।
विस्तार
इस बार अरसा बाद होली पर पांच महायोग एक साथ मिल रहे हैं। सबसे खास अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि के साथ वृद्धि योग का मिलन होगा। इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग में होली मनाई जाएगी। ऐसे में रंग-गुलाल खुशहाली और समृद्धि बनकर बरसेंगे।
फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि इस बार 17 मार्च को है। इसी पूर्णिमा तिथि पर असत्य और बुराई की प्रतीक होलिकाओं का दहन किया जाएगा। इसके अगले दिन 18 मार्च को चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि को रंगों की होली खेली जाएगी। इस साल होली पर एक साथ पांच महायोग बन रहे हैं। वृद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ ध्रुव योग का इस होली पर मिलन होगा।
वृद्धि योग में किए गए कार्यों में सफलता और लाभ मिलने की मान्यता रही है। वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कार्य हर हाल में पूरे होते हैं। ध्रुव योग से चंद्रमा समेत अन्य सभी राशियों पर शुभ प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा इस बार होली पर बुध और गुरु की युति से आदित्य योग का भी बनेगा।
खुशहाली और समृद्धि का सुखद योग
ऐसे में पांच महायोगों के एक साथ मिलन से होली पर खुशहाली और समृद्धि की प्राप्ति का सुखद संयोग बन रहा है। इस बार पूर्णिमा बृहस्पतिवार को दोपहर भद्राकाल में 01:31 बजे लग जाएगी। दूसरे दिन शुक्रवार को दोपहर 12:48 बजे कर पूर्णिमा रहेगी। पूर्णिमा भद्राकाल में आरंभ हो रही है रात 1:10 बजे तक भद्राकाल रहेगा। ऐसे में भद्राकाल के बाद ही होलिका दहन करना फलदायी रहेगा।
होली: शुभ मुहूर्त
होलिका दहन 17 मार्च को बृहस्पतिवार के दिन होगा। इस दिन पूर्णिमा पर होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 01:10 बजे के बाद है। यह अवधि 01 घंटे 10 मिनट की है। अबीर-गुलाल की होली 18 मार्च को है। इस दिन भद्रा दिन में 1:31 बजे लग जाएगा।
पूर्णिमा तिथि: बृहस्पतिवार की दोपहर 01:31 बजे शुरू होगी, जो 18 मार्च की दोपहर 12: 48 बजे तक रहेगी।
वैश्विक उथल-पुथल के बीच इस बार की होली ग्रहों की शुभ स्थिति के कारण हर किसी के लिए लाभप्रद होगी। इस बार होली पर महायोगों का मिलन बेहद खास है। एक साथ पांच योग इस होली को शुभदायी बना रहे हैं। - पं. ब्रजेंद्र मिश्र, ज्योतिषाचार्य।