Research : अब कोशिका झिल्ली से पुतली के अल्सर का कारगर इलाज, 30 मरीजों में किया गया सफल परीक्षण
आंखों में किसी प्रकार का घाव या फिर पुतली में अल्सर का अब एमुनिती मेमरेन (कोशिका झिल्ली) से इलाज किया जाएगा। इसमें मरीज की आखों में एंटी माइक्रोबियल थेरेपी के साथ कोशिका झिल्ली प्रत्यारोपित की जाएगी।
विस्तार
आंखों में किसी प्रकार का घाव या फिर पुतली में अल्सर का अब एमुनिती मेमरेन (कोशिका झिल्ली) से इलाज किया जाएगा। इसमें मरीज की आखों में एंटी माइक्रोबियल थेरेपी के साथ कोशिका झिल्ली प्रत्यारोपित की जाएगी। इसके बाद लोगों को कम दिखाई देना या फिर अल्सर से होने वाले अंधेपन से राहत मिल सकेगी।
मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ.एसपी सिंह की देखरेख में नेत्र विभाग की टीम ने पुतली के अल्सर से पीड़ित 30 मरीजों पर तकरीबन डेढ़ वर्ष तक शोध किया। इसमें मिली सफलता के बाद अब इस पद्वति को अल्सर के इलाज में प्रयोग किया जाएगा।
मनोहरदास नेत्र चिकित्सालय में पुतली के अल्सर पर हुए शोध के तहत काॅर्नियल अल्सर से पीड़ित 30 मरीजों पर प्रयोग किया गया। नेत्र विभाग की डॉ.सुप्रिया गुप्ता का यह शोध 2022-23 में पूर्ण हुआ। इसमें 15 मरीजों पर एंटी माइक्रोबियल थेरेपी का इस्तेमाल किया गया और 15 मरीजों की आखों में सर्जरी से कोशिका झिल्ली डाली गई।
शोध में पाया गया कि जिन मरीजों की आखों में कोशिका झिल्ली डाली गई थी, उनमें एंटी माइक्रोबियल थेरेपी की अपेक्षा ज्यादा सकारात्मक परिणाम सामने आए। अगर माइक्रोबियल थेरेपी के साथ आखों की पुतली में कोशिका झिल्ली डाली जाए तो यह पुतली अल्सर के इलाज में ज्यादा कारगर है।
इनसेटप्रारंभिक स्तर पर कारगर
कॉर्नियल अल्सर की शुरुआत में ही यह शोध कारगर है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस प्रकार कैंसर के स्तर होते हैं, ठीक उसी प्रकार पुतली का अल्सर भी है। इसका इलाज समय रहते हो जाए तो मरीज को इसका लाभ मिलता है। अधिक देरी होने पर कोशिका झिल्ली भी पुतली के अल्सर में कारगर नहीं है।
क्या है कॉर्नियल अल्सर
कॉर्नियल अल्सर आमतौर पर दर्द के साथ आंख लाल होने के रूप में होता है। इसमें आंख से हल्के से गंभीर स्तर पर स्राव निकलता है और रोशनी घट जाती है। यह स्थिति कॉर्निया के किसी संक्रमण से उत्पन्न होती है, जो फोड़े जैसा होता है।
पुतली में अल्सर पर यह शोध किया गया जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। जल्द ही कॉर्नियल अल्सर से पीड़ित मरीजों का इस पद्वति से इलाज किया जाएगा। - डॉ.एसपी सिंह, प्राचार्य, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज।