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विवादित बयान पर इविवि के पीआरओ को नोटिस

Sun, 05 Jan 2020 12:51 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jan 2020 12:51 AM IST
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Notice to PRO of IDIV on disputed statement
Notice to PRO of IDIV on disputed statement
विवादित बयान पर इविवि के पीआरओ को नोटिस
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0 अधिकारियों के इस्तीफे, कलमबंद हड़ताल की गलत सूचना देने का आरोप
0 प्रो. हांगलू के इस्तीफे के बाद जनसंपर्क अधिकारी ने जारी किया था बयान
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। प्रो. रतन लाल हांगलू के कुलपति पद से इस्तीफे के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के पीआरओ डॉ. चितरंजन कुमार सिंह की ओर से चैनलों को जारी किए गए विवादित एवं गलत बयान के मामले में इविवि अध्यापक संघ की ओर से पीआरओ को चेतावनी एवं नोटिस दिया गया।
ऑटा अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय केंद्रीय विश्वविद्यालय शिक्षक महासंघ के उपाध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे और ऑटा महामंत्री प्रो. शिवमोहन प्रसाद की ओर से दिए गए नोटिस में कहा गया कि पीआरओ ने कुलसचिव, वित्त अधिकारी, छात्रावास के अधीक्षकों, संरक्षकों, सभी अधिकारियों के त्यागपत्र और सभी अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष आदि के कलमबंद रहने का मिथ्या प्रचार किया, जबकि शिक्षकों की आमसभा की ओर से शिक्षण कार्य अथवा समस्त कार्य बंद करने का कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया। इविवि के वरिष्ठ शिक्षकों एवं अधिकारियों और समस्त शिक्षकों की भावना एवं निश्चय को बिना जाने समझे तथाकथित पक्ष, विपक्ष में बयान देना उनकी भावनाओं एवं विचारधाराओं के अतिक्रमण के रूप में देखा जा रहा है।
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नोटिस में यह आरोप भी लगाया गया कि पीआरओ ने विगत वर्ष भी इसी तरह सीनेट हॉल में ऑटा और ऑक्टा की आमसभा में अराजक एवं उपद्रवी तत्वों को बुलाकर शिक्षकों को अपमानित एवं प्रताणित होने के लिए विवश कर दिया था। उस समय अपमानित शिक्षकों की भावना को ध्यान में रखते हुए पदाधिकारियों की ओर से विज्ञप्ति दी गई थी कि इस प्रकार की सूचनाओं को प्रेस में केवल ऑटा के महामंत्री जारी करेंगे, लेकिन इसका भी उल्लंघन किया गया।
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सूचना मिली है कि कलमबंद हड़ताल के बयान के कारण कुछ अधिकारियों को घूम-घूम कर स्पष्टीकरण देना पड़ रहा है। पीआरओ को नोटिस में कहा गया कि भविष्य के लिए आपसे यह चेतावनीपूर्ण अपेक्षा की जाती है कि यदि आप अंतर्यामी नहीं हैं तो विश्वविद्यालय के शिक्षकों, वरिष्ठ शिक्षकों और अधिकारियों की मन की बात को सार्वजनिक करने के पहले ही उसकी राय जान लेंगे। यह अपेक्षा भी है कि भविष्य में शिक्षकों के मान-सम्मान और शिक्षक संघ की सर्वोच्चता का ध्यान रहेगा। उधर, इस मामले में पीआरओ डॉ. चितरंजन कुमार सिंह ने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। वहीं ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे का कहना है कि पीआरओ ने जवाब भेजा है कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा।
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