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सीबीआई जांच में नोटिफिकेशन का पेच
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 06 Mar 2018 01:15 AM IST
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सीबीआई ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच तो शुरू कर दी लेकिन कुछ प्रमुख भर्ती परीक्षाओं में धांधली के सुराग मिलने के बावजूद सीबीआई को जांच आगे बढ़ाने में बाधा का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, सीबीआई जांच के लिए जारी नोटिफिकेशन ने ही इसमें पेच फंसा दिया है। मामले में प्रतियोगियों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर नोटिफिकेशन में आंशिक संशोधन की मांग की है।
सीबीआई को सबसे अधिक शिकायतें एपीएस परीक्षा-2010 को लेकर मिली हैं। इसकी प्रारंभिक परीक्षा 22 सितंबर 2013 हो हुई थी जबकि 24 से 30 मार्च 2014 को टाइप टेस्ट एवं शॉट हैंड परीक्षा और 17 जून 2015 को कंप्यूटर ज्ञान की परीक्षा कराई गई थी। परिणाम तीन अक्तूबर 2017 को जारी किया गया। अभ्यर्थियों की शिकायत पर सीबीआई ने प्रारंभिक जांच में ही पाया था कि इस परीक्षा में आयोग के ज्यादातर कर्मचारियों और अफसरों के करीबी रिश्तेदारों का चयन हुआ है लेकिन इस मामले में जांच आगे बढ़ाने में अब नोटिफिकेशन ही बाधा बन गया है। दरअसल, सीबीआई जांच के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि सीबीआई की टीम आयोग की उन भर्ती परीक्षाओं की जांच करेगी, जिनके परिणाम एक अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2017 के बीच जारी किए गए।
ऐसे में एपीएस-2010 की जांच को आगे बढ़ाने में पेच फंस गया है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई की टीम इस परीक्षा की जांच में सीधे हाथ डालने से पीछे हट रही है, जबकि प्रारंभिक जांच में उसे गड़बड़ी के कई सुबूत मिल चुके हैं। सोमवार को लखनऊ में तमाम प्रतियोगियों ने जब सीबीआई के एसपी राजीव रंजन से मिलकर एपीएस-2010 को लेकर शिकायत दर्ज कराई तो नोटिफिकेशन में पेच का मामला सामने आया, जिसके बाद प्रतियोगियों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर नोटिफिकेशन में आंशिक संशोधन की मांग की है ताकि जांच को सही दिशा में आगे बढ़ाया जा सके। साथ ही एपीएस-2010 के तहत जारी नियुक्ति प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग भी की गई।
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नोटिफिकेशन में पेच के कारण एपीएस-2010 के साथ कुछ अन्य बड़ी परीक्षाओं की जांच में भी सीबीआई को बांधा का सामना करना पड़ रहा है। इनमें लोअर-2015, पीसीएस-जे 2016, एपीओ-2015 परीक्षा शामिल हैं। इनके परिणाम 31 मार्च 2017 के बाद ही जारी किए गए। इसके अलावा लोअर-2015 का इंटरव्यू पिछले माह फरवरी में ही पूरा हुआ है और इसका परिणाम आना बाकी है। वहीं, आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा-2016 का परिणाम भी अभी जारी नहीं हुआ है जबकि पेपर आउट होने के कारण यह परीक्षा भी विवादों में है और सीबीसीआईडी पहले से इसकी जांच कर रही है।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं में घोटाले की जांच कर रही सीबीआई टीम को आयोग के सभी कंप्यूटरों को स्कैन करने में 15 दिन से कम समय लगा, लेकिन आयोग से कागजी दस्तावेज लेने में सीबीआई टीम को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। आयोग दस्तावेज हाथों-हाथ न देकर डाक के माध्यम से भेज रहा है। इससे जांच में देरी हो रही है। सोमवार को सीबीआई के एसपी राजीव रंजन ने लखनऊ में सचिव गृह और सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक से मुलाकात के दौरान यह मुद्दा उठाया।
भर्ती परीक्षाओं की जांच के लिए सीबीआई ने गोविंदपुर में कैंप कार्यालय खोल दिया है। वहां तकरीबन 16 लोगों का स्टाफ तैनात किया गया है। जांच नियमित रूप से चल रही है ताकि देरी न हो लेकिन सीबीआई की टीम ने जब प्रारंभिक जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर आयोग से कागजी दस्तावेज मांगे तो नया विवाद उत्पन्न हो गया। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई के अफसर स्वयं आयोग जाकर कागजी दस्तावेज रिसीव करने को तैयार हैं लेकिन आयोग के अफसर दस्तावेजों को डाक के माध्यम से सीबीआई कैंप कार्यालय भेज रहे हैं।
यही नहीं सीबीआई मूल दस्तावेज मांग रही है जबकि आयोग सर्टिफाइड कॉपी उपलब्ध करा रहा है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई की टीम होली की छुट्टी पर भी कैंप कार्यालय में थी लेकिन आयोग की ओर से छुट्टी का हवाला देकर दस्तावेज नहीं भेजे गए। इसकी वजह से जांच में देरी हो रही है। जांच में आ रही इन दिक्कतों को सीबीआई ने लखनऊ में सचिव गृह और नियुक्ति एवं कार्मिक सचिव के सामने रखी हैं। अफसरों ने जांच में सहयोग का आश्वासन दिया है।
प्रशासन से भी नहीं मिल रहा सहयोग
जांच के दौरान प्रशासन की ओर से मिल रही सुविधाओं पर भी सीबीआई ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वाहन खस्ताहाल दिए गए हैं जिससे दूर दराज के क्षेत्रों में जांच के सिलसिले में जाने में देरी होती है। जांच के लिए आ रही टीम को कई बार सर्किट हाउस नहीं मिल पा रहा जिससे होटलों में ठहराना पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि मामले में गृह सचिव ने जिला प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई है और सीबीआई को सहयोग के लिए आश्वस्त किया है। इस बाबत सचिव गृह की ओर से इलाहाबाद जिला प्रशासन और सचिव कार्मिक एवं नियुक्ति की ओर से आयोग को जल्द ही पत्र भी जारी किया जा सकता है।
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सीबीआई को सबसे अधिक शिकायतें एपीएस परीक्षा-2010 को लेकर मिली हैं। इसकी प्रारंभिक परीक्षा 22 सितंबर 2013 हो हुई थी जबकि 24 से 30 मार्च 2014 को टाइप टेस्ट एवं शॉट हैंड परीक्षा और 17 जून 2015 को कंप्यूटर ज्ञान की परीक्षा कराई गई थी। परिणाम तीन अक्तूबर 2017 को जारी किया गया। अभ्यर्थियों की शिकायत पर सीबीआई ने प्रारंभिक जांच में ही पाया था कि इस परीक्षा में आयोग के ज्यादातर कर्मचारियों और अफसरों के करीबी रिश्तेदारों का चयन हुआ है लेकिन इस मामले में जांच आगे बढ़ाने में अब नोटिफिकेशन ही बाधा बन गया है। दरअसल, सीबीआई जांच के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि सीबीआई की टीम आयोग की उन भर्ती परीक्षाओं की जांच करेगी, जिनके परिणाम एक अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2017 के बीच जारी किए गए।
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ऐसे में एपीएस-2010 की जांच को आगे बढ़ाने में पेच फंस गया है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई की टीम इस परीक्षा की जांच में सीधे हाथ डालने से पीछे हट रही है, जबकि प्रारंभिक जांच में उसे गड़बड़ी के कई सुबूत मिल चुके हैं। सोमवार को लखनऊ में तमाम प्रतियोगियों ने जब सीबीआई के एसपी राजीव रंजन से मिलकर एपीएस-2010 को लेकर शिकायत दर्ज कराई तो नोटिफिकेशन में पेच का मामला सामने आया, जिसके बाद प्रतियोगियों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर नोटिफिकेशन में आंशिक संशोधन की मांग की है ताकि जांच को सही दिशा में आगे बढ़ाया जा सके। साथ ही एपीएस-2010 के तहत जारी नियुक्ति प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग भी की गई।
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नोटिफिकेशन में पेच के कारण एपीएस-2010 के साथ कुछ अन्य बड़ी परीक्षाओं की जांच में भी सीबीआई को बांधा का सामना करना पड़ रहा है। इनमें लोअर-2015, पीसीएस-जे 2016, एपीओ-2015 परीक्षा शामिल हैं। इनके परिणाम 31 मार्च 2017 के बाद ही जारी किए गए। इसके अलावा लोअर-2015 का इंटरव्यू पिछले माह फरवरी में ही पूरा हुआ है और इसका परिणाम आना बाकी है। वहीं, आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा-2016 का परिणाम भी अभी जारी नहीं हुआ है जबकि पेपर आउट होने के कारण यह परीक्षा भी विवादों में है और सीबीसीआईडी पहले से इसकी जांच कर रही है।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं में घोटाले की जांच कर रही सीबीआई टीम को आयोग के सभी कंप्यूटरों को स्कैन करने में 15 दिन से कम समय लगा, लेकिन आयोग से कागजी दस्तावेज लेने में सीबीआई टीम को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। आयोग दस्तावेज हाथों-हाथ न देकर डाक के माध्यम से भेज रहा है। इससे जांच में देरी हो रही है। सोमवार को सीबीआई के एसपी राजीव रंजन ने लखनऊ में सचिव गृह और सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक से मुलाकात के दौरान यह मुद्दा उठाया।
भर्ती परीक्षाओं की जांच के लिए सीबीआई ने गोविंदपुर में कैंप कार्यालय खोल दिया है। वहां तकरीबन 16 लोगों का स्टाफ तैनात किया गया है। जांच नियमित रूप से चल रही है ताकि देरी न हो लेकिन सीबीआई की टीम ने जब प्रारंभिक जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर आयोग से कागजी दस्तावेज मांगे तो नया विवाद उत्पन्न हो गया। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई के अफसर स्वयं आयोग जाकर कागजी दस्तावेज रिसीव करने को तैयार हैं लेकिन आयोग के अफसर दस्तावेजों को डाक के माध्यम से सीबीआई कैंप कार्यालय भेज रहे हैं।
यही नहीं सीबीआई मूल दस्तावेज मांग रही है जबकि आयोग सर्टिफाइड कॉपी उपलब्ध करा रहा है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई की टीम होली की छुट्टी पर भी कैंप कार्यालय में थी लेकिन आयोग की ओर से छुट्टी का हवाला देकर दस्तावेज नहीं भेजे गए। इसकी वजह से जांच में देरी हो रही है। जांच में आ रही इन दिक्कतों को सीबीआई ने लखनऊ में सचिव गृह और नियुक्ति एवं कार्मिक सचिव के सामने रखी हैं। अफसरों ने जांच में सहयोग का आश्वासन दिया है।
प्रशासन से भी नहीं मिल रहा सहयोग
जांच के दौरान प्रशासन की ओर से मिल रही सुविधाओं पर भी सीबीआई ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वाहन खस्ताहाल दिए गए हैं जिससे दूर दराज के क्षेत्रों में जांच के सिलसिले में जाने में देरी होती है। जांच के लिए आ रही टीम को कई बार सर्किट हाउस नहीं मिल पा रहा जिससे होटलों में ठहराना पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि मामले में गृह सचिव ने जिला प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई है और सीबीआई को सहयोग के लिए आश्वस्त किया है। इस बाबत सचिव गृह की ओर से इलाहाबाद जिला प्रशासन और सचिव कार्मिक एवं नियुक्ति की ओर से आयोग को जल्द ही पत्र भी जारी किया जा सकता है।