फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Not just thoughts, Ethics is like Lohia

सिर्फ विचार नहीं, आचार भी लोहिया जैसा हो

Sat, 25 Mar 2017 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 25 Mar 2017 01:29 AM IST
विज्ञापन
Not just thoughts, Ethics is like Lohia
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक का मानना है कि विचार और आचार एक जैसे होने चाहिए। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में ‘डॉ. राम मनोहर लोहिया का दर्शन’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करने पहुंचे राज्यपाल राम नाईक इशारों में ही यूपी में हुए सत्ता परिवर्तन के बारे में बहुत कुछ बोल गए। कहा कि जिन्होंने लोहिया के विचारों को अपनाया, उन्हें आचार भी वैसा ही रखना चाहिए। वह सलाह दे गए कि इस बिंदु को यूपी में हुए सत्ता परिवर्तन से जोड़कर संगोष्ठी में मुद्दे पर मंथन किया जाना चाहिए, हो सकता है कि भविष्य में कुछ सुधार हो।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि राम मनोहर लोहिया का दर्शन सिर्फ  विचारों का मंथन नहीं, वर्तमान सामयिक समस्याओं का समाधान भी प्रस्तुत करता है। दार्शनिक लोहिया जी ने तत्कालीन आर्थिक विषयों पर जो गहन अध्ययन प्रस्तुत किया, उसने समाजवाद को नई दिशा दी। जिस काल खंड में सिर्फ  साम्यवादी एवं पूंजीवादी विचारधारा का वर्चस्व था, उस समय अपने विचारों एवं तर्कों के आधार पर लोहिया जी ने समाज को नई दिशा दी। उन्हें मातृभाषा से प्यार था। जैसा उनका विचार था, वैसा ही आचार और व्यवहार था। यहां तक कि वह अपने विचारों के विरोधी और भिन्न प्रकार के विचार रखने वालों के बीच सामंजस्य रखना जानते थे। उन्होंने विपक्ष में एकता के सिद्धांत को समाज के सामने लाते हुए वैचारिक रूप से समृद्ध भारत की नींव रखी। उन्होंने भारत में सभी भाषाओं का सम्मान करना सिखाया और स्थानीय भाषाओं को उचित स्थान दिलाने के साथ ही सत्ता के स्तर पर विकेंद्रीकरण की नीति के पक्षधर रहे।
विज्ञापन


भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में खास यह रहा कि बीच-बीच में विषय से इतर पंडित दीन दयाल उपाध्याय पर भी चर्चा होती रही। कुलपति प्रो. एमपी दुबे ने कहा कि भारतीय दर्शन अनेक विद्वानों के विचाराें से परिपूर्ण हैं। भारत के विकास के लिए आवश्यक है कि हम अपने भारतीय विचारकों जैसे पंडित दीन दयाल उपाध्याय और डॉ. राम मनोहर लोहिया के दर्शन को वर्तमान समस्याओं के परिप्रेक्ष्य में देखें एवं नए समाधान खोजें। इससे पहले लोकसभा के पूर्व महासचिव एवं संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष कश्यप ने अपने उद्बोधन में डॉ. राम मनोहर लोहिया के कुछ वर्तमान अनुयायियों पर तंज कसते हुए कहा है कि लोहिया जी कुछ अनुयायियों को पीछे छोड़ गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


अगर वर्तमान में ऐसे अनुयायियों के चलन को देखते हुए डॉ. लोहिया के बारे में आंकलन करेंगे तो यह लोहिया जी के साथ अन्याय होगा। उन्हाेंने कहा कि लोहिया जितना अपने छात्र जीवन में सजग और वैचारिक रूप से समृद्ध थे, उतनी ही प्रसिद्धि उन्होंने लोकसभा में कुशल वक्ता के रूप पाई। कुछ रोचक उदाहरणों के साथ डॉ. कश्यप ने कहा कि लोहिया में ये खूबी थी कि वे किसी भी गंभीर वातावरण को अपने सरल एवं सहज व्यवहार से खुशनुमा बना देते थे। आईसीपीआर के प्रो. गोपीनाथ पिल्लई ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की। सेमिनार संयोजक डॉ. जीके द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन डॉ. रामजी मिश्र एवं मारिषा किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. राजेश कुमार पाण्डेय ने किया। इस मौके पर इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 राजेंद्र प्रसाद, नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केबी पांडेय, प्रो. गिरिराज किशोर, प्रो. आनंद कुमार, प्रो. स्मिथ, डॉ. सुधीर सिंह, प्रो. महेश विक्रम सिंह, प्रो. कृष्ण गोपाल, प्रो. सुब्रत मुखर्जी, डॉ. प्रभाकर आदि उपस्थित रहे।

राज्यपाल राम नाईक ने शुक्रवार को राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में स्थित नवनिर्मित क्षेत्रीय केंद्र इलाहाबाद के भवन का उद्घाटन भी किया। गौरतलब है कि इस केंद्र का शिलान्यास भी उन्होंने ही किया था। क्षेत्रीय केंद्र में शिक्षार्थियों की हर तरह की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। साथ ही उन्हें नई जानकारियों से अवगत कराया जाएगा। इस मौके पर राज्यपाल ने वहां पौधरोपण भी किया। उद्घाटन समारोह में कुलपति प्रो. एमपी दुबे, कुलसचिव डॉ. राजेश कुमार पांडेय, क्षेत्रीय केंद्र की निदेशक डॉ. पूर्णिमा शर्मा आदि मौजूद रहे।


प्रदेश में तमाम चयन आयोगों में भर्तियों एवं इंटरव्यू पर रोक लगाए जाने और नई सरकार के अन्य कामकाज के बारे में राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि जब भी नई सरकार आती है तो पिछले तीन-चार माह में हुए कार्यों का निरीक्षण करती है। सरकार को अपना काम करने देना चाहिए। सरकार ने जो आश्वासन दिए थे, अब उन पर काम भी करके दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने काम शुरू भी कर दिया है और समय बीतने के साथ जनता इसका मूल्यांकन करेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed