Allahabad High Court : धोखाधड़ी, षड्यंत्र, भ्रष्टाचार में नोएडा के अधिकारियों को राहत नहीं
तीनों पर षड्यंत्र, धोखाधड़ी तथा भ्रष्टाचार सहित कई गंभीर आरोप हैं। कोर्ट ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत पर छोड़े जाने का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के लेखाधिकारी पीके दीक्षित, प्रोजेक्ट इंजीनियर सुरेंद्र कुमार गुप्ता व सहायक प्रोजेक्ट इंजीनियर निजामुद्दीन की अग्रिम जमानत पर रिहाई का आदेश देने से इन्कार कर दिया है। इससे पहले नोएडा के चीफ इंजीनियर यादव सिंह तथा राकेश कुमार जैन की अर्जी भी खारिज हो चुकी है।
तीनों पर षड्यंत्र, धोखाधड़ी तथा भ्रष्टाचार सहित कई गंभीर आरोप हैं। कोर्ट ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत पर छोड़े जाने का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने पीके दीक्षित व दो अन्य की अग्रिम जमानत अर्जी पर दिया है। सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया ज्ञान प्रकाश व संजय यादव ने अर्जी पर प्रतिवाद किया।
याचीगण को सीबीआई के विवेचना अधिकारी ने पूछताछ के लिए बुलाया है और अभियोग चलाने की संस्तुति मांगी है। जबकि याचियों का कहना है कि यादव सिंह व अन्य के खिलाफ नोएडा के सेक्टर 39 में दर्ज मामले में पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दी थी जिसे सत्र अदालत गौतमबुद्धनगर ने 27 नवंबर 14 को स्वीकार कर लिया था।
किंतु लखनऊ पीठ में दाखिल नूतन ठाकुर की जनहित याचिका पर कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। याचीगण का कहना है कि सीबीआई ने आरोप पत्र व दो पूरक आरोपपत्र दाखिल किए हैं, जिनमें उन्हें आरोपित नहीं किया गया है। सीबीआई ने एसटीएफ , थाना नई दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज की है। नए मामले में याचियों को बुलाया गया है। उन्होंने गिरफ्तारी की आशंका को लेकर सीधे हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी, जिसपर कोर्ट ने राहत देने से इन्कार कर दिया है।