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बैंक से लोन लेने वालोंको नहीं मिल रही राहत
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बैंकों पर सरकार और आरबीआई के निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप है। आरबीआई ने रेपो रेट में तो कटौती कर दी लेकिन बैंकों ने होम लोन या अन्य दूसरा कर्ज लेने वालों की मासिक किस्त में कोई कटौती नहीं की है। इतना ही नहीं रेपो रेट के अनुसार किस्त बनाने के लिए आवेदन करने वालों से सर्विस चार्ज भी मांगा जा रहा है। यह राशि ब्याज में कमी से होने वाले लाभ से कहीं अधिक है। यानी, ब्याज में कमी के बावजूद ग्राहक को अधिक राशि चुकानी होगी। इससे नाराज उद्यमियों ने उद्योग बंधु की बैठक में इस मुद्दे को उठाने का निर्णय लिया है।
कोरोना महामारी के बीच बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी चली गई है तो उद्योग को काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने एवं उधार कर्ता पर लोन के ईएमआई का बोझ कम करने के लिए आरबीआई ने दो महीने पहले रेपो रेट में 0.75 प्रतिश की कटौती का ऐलान किया था। अब 22 मई को फिर से आरबीआई ने रेपो रेट में 0.40 प्रतिशत कटौती की घोषणा की लेकिन इसका लाभ अभी बैंकों से लोन लेने वालों को नहीं मिल रहा। जबकि, रेपो रेट में कमी के बाद बैंकों से लिए गए कर्ज की मासिक किस्त स्वत: कम हो जानी चाहिए।
मुकेश कुमार जैसवाल एवं व्यापारी शशांक खरबंदा का कहना है कि उन्होंने आरबीआई के निर्देश के अनुसार होम लोन के ब्याज दर को कम करने के लिए आवेदन किया तो एक फार्म पकड़ाया गया। इसके अनुसार ब्याज दर में परिवर्तन के लिए 5900 रुपये सर्विस चार्ज देना होेगा। नैनी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के महामंत्री राकेश हजेला का कहना है कि बैंकों की ओर से ऐसे मामले में प्रॉफिट चार्ज भी मांगा जाता है। उन्होंने कहा कि उद्योग बंधु की अगली बैठक में इस मुद्दे को उठाया जाएगा। इसे बैठक के एजेंडे में ही शामिल कराने की कोशिश है। वहीं एसबीआई के डीजीएम अनरेश झा का कहना है कि ब्याज में कमी के बारे में वह कुछ नहीं कह सकते। इस पर निर्णय मुख्यालय को लेना है। जहां तक सर्विस चार्ज की बात है इसमें कुछ समझने में गड़बड़ी हुई है। उनका कहना है कि बेस रेट में परिवर्तन के लिए सर्विस चार्ज देना होता है। यह चार्ज एक बार देना होता है। रेपो रेट में परिवर्तन पर ब्याज दर में स्वत: कमी या बढ़ोतरी की जाती है। इसके लिए कोई चार्ज नहीं लगता।
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ब्याज में कटौती के लिए आवेदन पर 5000 रुपये सर्विस चार्ज लिया जा रहा है। इसके अलावा 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से। इस तरह से कुल 5900 रुपये चुकाने होंगे। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति ने पांच लाख रुपये हाउसिंग लोन लिया है तथा उस पर यदि एक प्रतिशत ब्याज कम हुआ तो एक वर्ष में उसे पांच हजार रुपये का लाभ होगा। इसके विपरीत सर्विस चार्ज 5900 रुपये देना होगा। इस तरह से ग्राहक को 900 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे।
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कोरोना महामारी के बीच बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी चली गई है तो उद्योग को काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने एवं उधार कर्ता पर लोन के ईएमआई का बोझ कम करने के लिए आरबीआई ने दो महीने पहले रेपो रेट में 0.75 प्रतिश की कटौती का ऐलान किया था। अब 22 मई को फिर से आरबीआई ने रेपो रेट में 0.40 प्रतिशत कटौती की घोषणा की लेकिन इसका लाभ अभी बैंकों से लोन लेने वालों को नहीं मिल रहा। जबकि, रेपो रेट में कमी के बाद बैंकों से लिए गए कर्ज की मासिक किस्त स्वत: कम हो जानी चाहिए।
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मुकेश कुमार जैसवाल एवं व्यापारी शशांक खरबंदा का कहना है कि उन्होंने आरबीआई के निर्देश के अनुसार होम लोन के ब्याज दर को कम करने के लिए आवेदन किया तो एक फार्म पकड़ाया गया। इसके अनुसार ब्याज दर में परिवर्तन के लिए 5900 रुपये सर्विस चार्ज देना होेगा। नैनी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के महामंत्री राकेश हजेला का कहना है कि बैंकों की ओर से ऐसे मामले में प्रॉफिट चार्ज भी मांगा जाता है। उन्होंने कहा कि उद्योग बंधु की अगली बैठक में इस मुद्दे को उठाया जाएगा। इसे बैठक के एजेंडे में ही शामिल कराने की कोशिश है। वहीं एसबीआई के डीजीएम अनरेश झा का कहना है कि ब्याज में कमी के बारे में वह कुछ नहीं कह सकते। इस पर निर्णय मुख्यालय को लेना है। जहां तक सर्विस चार्ज की बात है इसमें कुछ समझने में गड़बड़ी हुई है। उनका कहना है कि बेस रेट में परिवर्तन के लिए सर्विस चार्ज देना होता है। यह चार्ज एक बार देना होता है। रेपो रेट में परिवर्तन पर ब्याज दर में स्वत: कमी या बढ़ोतरी की जाती है। इसके लिए कोई चार्ज नहीं लगता।
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ब्याज में कटौती के लिए आवेदन पर 5000 रुपये सर्विस चार्ज लिया जा रहा है। इसके अलावा 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से। इस तरह से कुल 5900 रुपये चुकाने होंगे। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति ने पांच लाख रुपये हाउसिंग लोन लिया है तथा उस पर यदि एक प्रतिशत ब्याज कम हुआ तो एक वर्ष में उसे पांच हजार रुपये का लाभ होगा। इसके विपरीत सर्विस चार्ज 5900 रुपये देना होगा। इस तरह से ग्राहक को 900 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे।