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पीएम रिपोर्ट पर आपत्ति नहीं करने पर माना जाएगा ठोस साक्ष्

Mon, 06 Jan 2020 10:03 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jan 2020 10:03 PM IST
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No objection to PM report will be considered as concrete evidence: High Court
No objection to PM report will be considered as concrete evidence: High Court
पीएम रिपोर्ट पर आपत्ति नहीं करने पर माना जाएगा ठोस साक्ष्य
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हत्या के आरोपी दंपति की उम्रकैद की सजा माफ, बरी करने का आदेश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी दस्तावेजी साक्ष्य का दूसरे पक्ष द्वारा विरोध या आपत्ति नहीं की जाती है तो उस साक्ष्य को ठोस साक्ष्य के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अदालत में डाक्टर से सत्यापन नहीं कराया गया, मगर बचाव पक्ष ने इस पर आपत्ति नहीं की थी। अपील में इस तथ्य पर आपत्ति करने पर हाईकोर्ट ने इसे नहीं माना। हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए अलीगढ़ के बृजेंद्र सिंह की अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की पीठ ने दिया है। हालांकि, कोर्ट ने अपीलार्थी को इस आधार पर बरी कर दिया कि उस पर लगाए गए आरोपों में हत्या का जो मकसद बताया था, वह सिद्ध नहीं हुआ। कोर्ट ने दंपति को बरी करने का आदेश दिया है।
मामले के अनुसार अलीगढ़ के टप्पल थाना क्षेत्र में पलार गांव निवासी रामचंद्र की भांजी कटारी देवी ने थाने में रिपोर्ट लिखाई थी की उसके मामा की दूसरी पत्नी रामदेवी के नाम पर 12 बीघा जमीन ट्रांसफर की थी। उनकी मृत्यु के बाद रामदेवी ने वह जमीन अपने नाम करवाने की प्रक्रिया शुरू की, जिससे उनके सौतेले बेटे बृजेंद्र सिंह ने विरोध किया। इसी वजह से 25/26 दिसंबर 1984 की रात बृजेंद्र और उसकी पत्नी खजानी देवी और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति ने मिल कर गड़ासे से रामदेवी की हत्या कर दी।
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अधीनस्थ न्यायालय ने इस मामले में 8 नवंबर 1985 को बृजेंद्र और उसकी पत्नी खजानी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। अपीलार्थी के अधिवक्ता का कहना था कि ट्रायल कोर्ट में पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर का बयान नहीं कराया गया। इसकी वजह से रिपोर्ट स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट का कहना था कि डाक्टर से रिपोर्ट का सत्यापन कराना एक प्रक्रिया है, मगर जब ऐसा नहीं करने पर बचाव पक्ष ने आपत्ति नहीं की थी तो यह माना जाएगा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट उसे स्वीकार्य है। इस स्थिति मेें रिपोर्ट को ठोस साक्ष्य माना जाएगा।
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हालांकि, कोर्ट ने हत्या करने की जो वजह अभियोजन ने बताई थी उसे नहीं माना। अदालत को कहना था कि बृजेंद्र इकलौता बेटा था और रामदेवी की मृत्यु के बाद जमीन उसी को मिलनी थी, ऐसे में उसके द्वारा जमीन के लिए हत्या करने की बात विश्वसनीय नहीं लगती है। रामदेवी जमीन अपने नाम करवाना चाहती थी, इसका भी कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं पेश किया गया।
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