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हाईकोर्ट : दो साल के भीतर नहीं लाया जा सकता ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, संशोधन कानून सही

Wed, 01 Mar 2023 11:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 01 Mar 2023 11:28 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा संशोधित कानूनी प्रक्रिया का प्रभाव भूतलक्षी होगी। इसलिए दो साल से पहले लाए गए प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को निरस्त कर जिलाधिकारी ने कोई गलती नहीं की। नए नियमानुसार पदभार संभालने के दो साल के भीतर अविश्वास प्रस्ताव को चर्चा के लिए टेबल नहीं किया जा सकता।

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No-confidence motion against block chief cannot be brought within two years, amendment law correct
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत एक्ट की धारा 15(13) के संशोधन अध्यादेश की वैधता की चुनौती याचिका को खारिज कर दिया। इसमें क्षेत्र पंचायत प्रमुख के खिलाफ संशोधन लागू होने से पहले अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही शुरू होने के बावजूद उसे इस आधार पर निरस्त करने को चुनौती दी गई थी कि अविश्वास प्रस्ताव संशोधित कानून के तहत पदभार संभालने के दो साल के भीतर नहीं लाया जा सकता। पहले यह अवधि एक साल की थी।

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कोर्ट ने कहा संशोधित कानूनी प्रक्रिया का प्रभाव भूतलक्षी होगी। इसलिए दो साल से पहले लाए गए प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को निरस्त कर जिलाधिकारी ने कोई गलती नहीं की। नए नियमानुसार पदभार संभालने के दो साल के भीतर अविश्वास प्रस्ताव को चर्चा के लिए टेबल नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति वी सी दीक्षित की खंडपीठ ने अनुज कुमार व अन्य सहित कई याचिकाओं को तय करते हुए दिया है। मामले में चार अक्तूबर 2022 से क्षेत्र पंचायत प्रमुख के खिलाफ एक वर्ष के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाने के नियम को संशोधित कर अवधि दो साल कर दी गई। यानी, पद संभालने के दो साल के भीतर अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।

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याचीगण का कहना था कि उनका अविश्वास प्रस्ताव जिलाधिकारी को प्राप्त हो चुका था। बैठक की तिथि तय कर दी गई थी। किंतु किसी कारण से बैठक स्थगित हो गई। इसी बीच संशोधन कानून लागू हो गया। जिसके आधार पर जिलाधिकारी ने अविश्वास प्रस्ताव पर विचार करने के लिए बैठक बुलाने से इंकार कर दिया। जिसे सभी याचिकाओं में चुनौती दी गई थी। इनका कहना था कि संसद या विधानसभा के कोई कानून गजट अधिसूचना से लागू होते हैं।

उन्हें पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता। इसलिए याचियों के मामले में अविश्वास कार्यवाही के दौरान अवधि एक वर्ष को दो वर्ष करने का नियम उनपर लागू नहीं होगा। कोर्ट ने इस तर्क को सही नहीं माना और कहा प्रक्रिया में संशोधन लागू होने के बाद पूर्व में शुरू कार्यवाही स्थगित हो जायेगी। उस पर चर्चा नहीं की जा सकती। इसलिए जिलाधिकारी ने अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही समाप्त कर कोई विधि विरुद्ध कार्य नहीं किया है। कोर्ट ने हस्तक्षेप से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

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