निठारी कांड : सीरियल किलिंग से कुल्हाड़ी का सीधा रिश्ता नहीं जोड़ पाई सीबीआई, वकील नहीं दे पाए स्पष्ट जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट में निठारी कांड के खलनायक सुरेंद्र कोली की फांसी के खिलाफ न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की अदालत में छठवें दिन भी सुनवाई चली। कोली के वकील की ओर से पेश की गईं तमाम दलीलों को सीबीआई के वकील ने सिलसिलेवार खारिज किया।
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नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड में हुई हत्याओं में प्रयुक्त हथियारों में चाकू, चुन्नी और पोछे वाले कपड़े के इस्तेमाल तो सुरेंद्र कोली के इकबालिया बयान से पुष्ट हुए, लेकिन सीबीआई ने जिस कुल्हाड़ी को बरामद किया, उसी का सीधा रिश्ता सीरियल किलिंग से नहीं जोड़ पाई। इलाहाबाद हाईकोर्ट में फांसी की सजा के खिलाफ कोली की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील कई सवालों के जवाब नहीं दे पाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में निठारी कांड के खलनायक सुरेंद्र कोली की फांसी के खिलाफ न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की अदालत में छठवें दिन भी सुनवाई चली। कोली के वकील की ओर से पेश की गईं तमाम दलीलों को सीबीआई के वकील ने सिलसिलेवार खारिज किया। दावा किया कि सुरेंद्र कोली ने नृशंस हत्याओं में चुन्नी, पोछे का कपड़ा और चाकू के साथ कुल्हाड़ी का भी इस्तेमाल किया था।
सीबीआई के मुताबिक कोली की निशानदेही पर 18 जनवरी 2007 को कोठी नंबर डी-5 के पीछे झाड़ियों से यह कुल्हाड़ी बरामद की गई थी। सीबीआई के वकील ने हाईकोर्ट में दावा किया कि कोली ने सीरियल किलिंग की। नाले की खोदाई में 15 खोपड़ियों के कंकाल भी बरामद किए गए थे। सीबीआई के वकील ने कोर्ट में दावा किया कि कोली ने कुल्हाड़ी से भी वार किए थे। हालांकि, किसकी हत्या कुल्हाड़ी से की गई थी-किसकी चाकू से, यह भी सीबीआई स्पष्ट नहीं कर पाई।
दस्तावेज बताते हैं कि पुलिस और सीबीआई दोनों ने सारी बरामदगी कोली से ही दिखाई है, पंढेर से कोई बरामदगी नहीं दिखाई गई। हालांकि, 30 दिसंबर 2006 को तत्कालीन सीओ दिनेश यादव ने रिमांड प्रार्थना पत्र में अभियुक्तगणों (यानी एक से अधिक) की निशानदेही पर माल बरामदगी की बात कही है। कोर्ट ने इस पर सवाल किया तो सीबीआई के वकील कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पाए।