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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   NHAI: The second phase of the 35 km long inner ring road has been approved, will cost four thousand crores

एनएचएआई : 35 किलोमीटर लंबे इनर रिंग रोड के दूसरे चरण को मिली मंजूरी, चार हजार करोड़ रुपये आएगी लागत

Thu, 07 Apr 2022 07:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 07 Apr 2022 07:55 PM IST
सार

जिले के विकास और आधुनिकीकरण की यह इनर रिंग रोड कानपुर से वाराणसी जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-दो पर  बनाई जानी है। दूसरे चरण में इस इनर रिंग रोड परियोजना की शुरुआत कौड़िहार के कसारी गांव के पास एनएच-दो से होगी।

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NHAI: The second phase of the 35 km long inner ring road has been approved, will cost four thousand crores
NHAI - फोटो : social media

विस्तार

शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए प्रस्तावित इनर रिंग रोड परियोजना के दूसरे चरण को भी मंजूरी मिल गई है। दूसरे चरण में 35 किमी लंबी इनररिंग रोड पर करीब चार हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए डीपीआर बनाने का काम शुरू हो गया है। प्रभावित इलाकों का सर्वे होने के बाद एनएचएआई की धारा -थ्री ए के तहत रकबा घोषित किया जाएगा।

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जिले के विकास और आधुनिकीकरण की यह इनर रिंग रोड कानपुर से वाराणसी जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-दो पर  बनाई जानी है। दूसरे चरण में इस इनर रिंग रोड परियोजना की शुरुआत कौड़िहार के कसारी गांव के पास एनएच-दो से होगी। इसके बाद पूरामुफ्ती क्षेत्र में सल्लाहपुर के रास्ते यमुना पर बक्शी गांव होते हुए पालपुर गांव के पास यह रीवा रोड में जुड़ेगी। इसके बाद जीटी रोड पर महुआरी, लवाइन कला होते हुए अंदावा के रास्ते इस इनर रिंग रोड को आगे ले जाकर सहसों के पास एनएच-2 से मिला दिया जाएगा।

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छह तहसीलों के गांवों से होकर गुजरेगी

65 किमी लंबी इनर रिंग रोड छह तहसीलों के गांवों से होकर गुजरेगी। इनमें सदर के साथ सोरांव, करछना, फूलपुर, बारा व हंडिया तहसील के गांव होंगे। आरटी फैक्ट प्रोजेक्ट लिमिटेड नागपुर को द्वितीय चरण का डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। फिलहाल आरटी फैक्ट प्रोजेक्ट के अभियंता और आर्किटेक्ट प्रभावित गांवों का नक्शा मिलान करने के साथ ही राजस्व विभाग से द्वितीय चरण के लिए अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि का आकलन कर रहे हैं।



इस इनर रिंग रोड के बन जाने से कानपुर से मध्य प्रदेश जाने वाले वाहनों को शहर में इंट्री नहीं करनी होगी। वहीं, एमपी से कानपुर या वाराणसी जाने वालों को भी इससे काफी राहत मिलेगी। बिना शहर में प्रवेश किए रिंग रोड के रास्ते निकल जाएंगे। इससे शहरियों को ट्रैफिक की समस्या से जूझना नहीं पड़ेगा। इसके अलावा कई जगह एप्रोच मार्ग बनने से जिले के ग्रामीणांचल इलाकों के लोगों को भी काफी राहत मिलेगी। फिलहाल दूसरे चरण के लिए भूमि चिह्नांकन का काम शुरू हो गया है। प्राधिकरण की कोशिश है कि इनमें रिहायशी इलाके कम से कम शामिल किए जाएं।

नीबी कला के पास गंगा पर बनेगा 26मीटर लंबा पुल
65 किमी की रिंग रोड के बीच में तीन पुल बनेंगे। इसमें दो गंगा पर और एक पुल यमुना पर बनाया जाएगा। गंगा पर नीबी कला के पास ढाई किमी यानी 26 सौ मीटर लंबा पुल बनाया जाएगा। इसी तरह खुरेसर कछार में भी गंगा पर एक किमी लंबा पुल बनेगा। वहीं, यमुना नदी पर बसवार के पास एक किमी लंबा पुल बनाने की तैयारी है।



दूसरे चरण में इनर रिंग रोड के लिए सर्वे के साथ ही डीपीआर बनाने का काम शुरू हो गया है। चिह्नित गांवों का सर्वे किया जा रहा है। अंतिम सूची बनने के बाद  भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। - अश्विनी राय, परियोजना निदेशक एनएचएआई।

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