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रेल चक्काजाम के मूड में नहीं है एनएफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 03 Nov 2016 01:52 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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नार्थ सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज संघ (एनसीआरईएस) के अधिवेशन में बुधवार को एक अलग ही तस्वीर सामने आई। सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों को लेकर लगातार रेल चक्का जाम (हड़ताल) की चेतावनी दे रहे रेलवे के मान्यता प्राप्त फेडरेशन एनएफआईआर ने अब नरमी के संकेत दिए हैं। एनसीआरईएस के अधिवेशन में शिरकत करने के लिए नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमैन (एनएफआईआर) के महामंत्री डॉ. एम राघवैय्या ने भी इशारा किया कि फेडरेशन हड़ताल के मूड में नहीं है। उन्होंने अध्यक्ष गुमान सिंह की मौजूदगी में कहा कि रेल चक्काजाम राष्ट्रहित में नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी गुवाहाटी में एनएफआईआर का राष्ट्रीय अधिवेशन होना है। उसी में हड़ताल को लेकर कोई निर्णय किया जाएगा।
लंबे समय बाद इलाहाबाद पहुंचे डॉ. राघवैय्या ने एनसीआरईएस के अधिवेशन में कर्मचारियों के समक्ष उनकी तमाम समस्याएं उठाईं। कहा कि सातवें वेतन आयोग की तमाम विसंगतियों को लेकर 30 जून 2016 को केंद्र सरकार के चार मंत्रियों ने कमेटियों का गठन कर चार माह के भीतर समस्या का समाधान करने की बात कही थी। यह मियाद अब पूरी होने वाली है। अब तक मामला जस का तस है। उन्होंने न्यूनतम वेतन 18 हजार की बजाय 26 हजार करने एवं नई पेंशन स्कीम समाप्त कर पुरानी स्कीम बहाल करने की मांग भी जोर शोर से उठाई। इसके पूर्व अधिवेशन का उद्घाटन फेडरेशन के अध्यक्ष गुमान सिंह ने किया। कार्यक्रम में डीआरएम एसके पंकज, एनसीआर के सीपीओ ओम प्रकाश, सीपीआरओ बिजय कुमार आदि ने भी शिरकत की। इस मौके पर एनसीआरईएस के महामंत्री आरपी सिंह ने वर्ष 2014 के बाद से अब तक के क्रियाकलापों एवं पीएनएम मीटिंग के माध्यम से कर्मचारी हित में लिए गए फैसले के बारे में बताया। कार्यक्रम में एनसीआरईएस के एसके मिश्र, रूपम पांडेय, आलोक सहगल, बेचन अली आदि मौजूद रहे।
एनसीआरईएस के अधिवेशन में एनएफआईआर के अध्यक्ष गुमान सिंह ने बताया कि भारतीय रेलवे घाटे में चल रही है। इसमें सेफ्टी कैटेगरी के 2.70 लाख पद लंबे समय से रिक्त हैं। सरकार इन पदों को भरने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने बताया कि सरकार रेलवे का निजीकरण करना चाह रही है। देश में वाराणसी का डीजल इंजन कारखाना (डीएलडब्ल्यू) अव्वल कारखाना है। बावजूद इसके सरकार विदेशी कंपनियों की मदद से मधेपुरा में रेल इंजन कारखाना बनवाना चाह रही है। इतना ही संबंधित कारखाने में बनने वाले इंजन का 13 साल तक रखरखाव विदेशी कंपनी ही करेगी। ऐसे में भारतीय प्रतिभा कहां जाएगी इसका जवाब केंद्र सरकार दे।
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अधिवेशन में एनएफआईआर के महामंत्री डॉ. एम राघवैय्या ने बुधवार को कोरल क्लब में रेलकर्मियों से सीधा संवाद भी किया। इस दौरान रेल कर्मियों ने तमाम मसलों पर उनसे सवाल किए। राघवैय्या ने मौके पर ही सभी सवालों के जवाब दिए। अधिवेशन में आगरा, कानपुर, अलीगढ़, झांसी, ग्वालियर, मथुरा, मिर्जापुर से भी काफी संख्या में रेलकर्मी पहुंचे।
सात जुलाई 2016 से रेलकर्मियों की प्रस्तावित हड़ताल को देखते हुए केंद्र सरकार के चार मंत्रियों द्वारा 30 जून 2016 को रेलवे की दो मान्यता प्राप्त फेडेरशन एनएफआईआर और एआईआरएफ का आश्वस्त किया था कि सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों को लेकर कमेटियों का गठन किया जा रहा है। ये कमेटियां चार माह में अपनी रिपोर्ट पेश करेंगी। एनएफआईआर के महामंत्री की माने तो चार माह की मियाद अब पूरी होने वाली है। उन्हें इंतजार है कि कमेटियों की रिपोर्ट का। कहा कि अगर वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हड़ताल हुई तो रेलवे को हर रोज 2.50 हजार करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ेगा। साथ ही हर रोज 2.60 करोड़ यात्री भी प्रभावित होंगे।
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लंबे समय बाद इलाहाबाद पहुंचे डॉ. राघवैय्या ने एनसीआरईएस के अधिवेशन में कर्मचारियों के समक्ष उनकी तमाम समस्याएं उठाईं। कहा कि सातवें वेतन आयोग की तमाम विसंगतियों को लेकर 30 जून 2016 को केंद्र सरकार के चार मंत्रियों ने कमेटियों का गठन कर चार माह के भीतर समस्या का समाधान करने की बात कही थी। यह मियाद अब पूरी होने वाली है। अब तक मामला जस का तस है। उन्होंने न्यूनतम वेतन 18 हजार की बजाय 26 हजार करने एवं नई पेंशन स्कीम समाप्त कर पुरानी स्कीम बहाल करने की मांग भी जोर शोर से उठाई। इसके पूर्व अधिवेशन का उद्घाटन फेडरेशन के अध्यक्ष गुमान सिंह ने किया। कार्यक्रम में डीआरएम एसके पंकज, एनसीआर के सीपीओ ओम प्रकाश, सीपीआरओ बिजय कुमार आदि ने भी शिरकत की। इस मौके पर एनसीआरईएस के महामंत्री आरपी सिंह ने वर्ष 2014 के बाद से अब तक के क्रियाकलापों एवं पीएनएम मीटिंग के माध्यम से कर्मचारी हित में लिए गए फैसले के बारे में बताया। कार्यक्रम में एनसीआरईएस के एसके मिश्र, रूपम पांडेय, आलोक सहगल, बेचन अली आदि मौजूद रहे।
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एनसीआरईएस के अधिवेशन में एनएफआईआर के अध्यक्ष गुमान सिंह ने बताया कि भारतीय रेलवे घाटे में चल रही है। इसमें सेफ्टी कैटेगरी के 2.70 लाख पद लंबे समय से रिक्त हैं। सरकार इन पदों को भरने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने बताया कि सरकार रेलवे का निजीकरण करना चाह रही है। देश में वाराणसी का डीजल इंजन कारखाना (डीएलडब्ल्यू) अव्वल कारखाना है। बावजूद इसके सरकार विदेशी कंपनियों की मदद से मधेपुरा में रेल इंजन कारखाना बनवाना चाह रही है। इतना ही संबंधित कारखाने में बनने वाले इंजन का 13 साल तक रखरखाव विदेशी कंपनी ही करेगी। ऐसे में भारतीय प्रतिभा कहां जाएगी इसका जवाब केंद्र सरकार दे।
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अधिवेशन में एनएफआईआर के महामंत्री डॉ. एम राघवैय्या ने बुधवार को कोरल क्लब में रेलकर्मियों से सीधा संवाद भी किया। इस दौरान रेल कर्मियों ने तमाम मसलों पर उनसे सवाल किए। राघवैय्या ने मौके पर ही सभी सवालों के जवाब दिए। अधिवेशन में आगरा, कानपुर, अलीगढ़, झांसी, ग्वालियर, मथुरा, मिर्जापुर से भी काफी संख्या में रेलकर्मी पहुंचे।
सात जुलाई 2016 से रेलकर्मियों की प्रस्तावित हड़ताल को देखते हुए केंद्र सरकार के चार मंत्रियों द्वारा 30 जून 2016 को रेलवे की दो मान्यता प्राप्त फेडेरशन एनएफआईआर और एआईआरएफ का आश्वस्त किया था कि सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों को लेकर कमेटियों का गठन किया जा रहा है। ये कमेटियां चार माह में अपनी रिपोर्ट पेश करेंगी। एनएफआईआर के महामंत्री की माने तो चार माह की मियाद अब पूरी होने वाली है। उन्हें इंतजार है कि कमेटियों की रिपोर्ट का। कहा कि अगर वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हड़ताल हुई तो रेलवे को हर रोज 2.50 हजार करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ेगा। साथ ही हर रोज 2.60 करोड़ यात्री भी प्रभावित होंगे।