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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Next hearing in Gyanvapi campus survey case on July 25, reserved after completion of arguments

Allahabad High Court : ज्ञानवापी परिसर सर्वे मामले में अगली सुनवाई 25 जुलाई को, बहस पूरी होने के बाद सुरक्षित

Thu, 13 Jul 2023 12:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 13 Jul 2023 12:08 PM IST
सार

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड व अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने याचिकाएं दाखिल की हैं। याचियों की तरफ से बहस की गई थी कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट-1991 की धारा चार के तहत सिविल वाद पोषणीय नहीं है। स्थापित कानून है कि कोई आदेश पारित हुआ है और अन्य विधिक उपचार उपलब्ध नहीं है तो अनुच्छेद 227 के अंतर्गत याचिका में चुनौती दी जा सकती है।

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Next hearing in Gyanvapi campus survey case on July 25, reserved after completion of arguments
ज्ञानवापी परिसर। - फोटो : social media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में ज्ञानवापी परिसर का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से सर्वे कराने के वाराणसी की अदालत के आदेश व सिविल वाद की वैधता को लेकर दाखिल याचिकाओं की 14 जुलाई को होने वाली सुनवाई अब 25 जुलाई को होगी। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने यह आदेश स्वयंभू आदि विश्वेश्वर नाथ मंदिर के अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी की सुनवाई टालने की अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया है।

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इससे पहले कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था। फैसला आने तक सर्वे कराने के वाराणसी की अदालत के आदेश पर लगी रोक बढ़ा दी थी। फैसला लिखाते समय कोर्ट ने कुछ बिंदुओं पर पक्षकारों के अधिवक्ता से स्पष्टीकरण के लिए फिर से सुनवाई का आदेश दिया था।

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सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड व अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने याचिकाएं दाखिल की हैं। याचियों की तरफ से बहस की गई थी कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट-1991 की धारा चार के तहत सिविल वाद पोषणीय नहीं है। स्थापित कानून है कि कोई आदेश पारित हुआ है और अन्य विधिक उपचार उपलब्ध नहीं है तो अनुच्छेद 227 के अंतर्गत याचिका में चुनौती दी जा सकती है।
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विपक्षी मंदिर पक्ष का कहना था कि भगवान विश्वेश्वर स्वयंभू भगवान हैं। वह प्रकृति प्रदत्त हैं। मानव द्वारा निर्मित नहीं हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के एम सिद्दीकी बनाम महंत सुरेश दास व अन्य केस के फैसले का हवाला दिया था। उन्होंने कहा मूर्ति स्वयंभू प्राकृतिक है। इसलिए प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट की धारा चार इस मामले में लागू नहीं होगी।

कोर्ट ने दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद सभी विचाराधीन याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित कर लिया था। कुछ मुद्दों को स्पष्ट करने के लिए फिर से सुनवाई हुई। कोर्ट ने कुछ मुद्दों पर सवालों के जवाब लिए। समयाभाव के कारण सुनवाई पूरी नहीं हो सकी थी और अगली सुनवाई की तिथि 14 जुलाई नियत की गई थी। अब यह सुनवाई 25 जुलाई को होगी।

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