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निगम के पास पैन नहीं अटका कर्मियों का वेतन
इलाहाबाद, ब्यूरो
Updated Sat, 07 Jan 2017 01:14 AM IST
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नगर निगम के करीब 9300 कर्मचारी, अफसर और पेंशनरों के सामने वेतन का संकट खड़ा हो गया। निगम के पास पैन नहीं है और बैंक ने बिना पैन के वेतन भुगतान से हाथ खड़े कर दिए हैं। वैसे यह आश्चर्य ही है कि नगर निगम जैसे बड़े संस्थान के पास अब तक पैन नहीं है। पैन के लिए आवेदन करने में भी अड़चन खड़ी हो गई है, क्योंकि उसके दस्तावेज में नगर महापालिका दर्ज है, जबकि 23 वर्ष पहले यह नगर निगम को हो चुका है। पैन न होने से कर्मचारियों के वेतन का भुगतान अब तक नहीं हो सका है, जबकि हर माह पांच-छह तारीख तक वेतन बैंक खातों में पहुंच जाता है। नगर निगम कर्मचारी एसोसिएशन ने शुक्रवार को नगर आयुक्त को इसकी लिखित जानकारी दी तो उन्होंने मुख्य कर निर्धारण अधिकारी को दस्तावेजों में संशोधन का आदेश दिया ताकि पैन के लिए आवेदन किया जा सके।
पैन के लिए आवेदन करने पर व्यक्ति या संस्था के नाम के साथ स्थानीय पता, जन्म या स्थापना की तिथि दर्ज करनी होती है। जन्म या स्थापना के संबंध में प्रमाण भी देना होता है लेकिन नगर निगम के सामने प्रमाण को ही लेकर संकट खड़ा हो गया। वर्ष 1864 में इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट गठित हुआ, जिसे बाद में नगर महापालिका बना दिया गया। महापालिका के गठन के संबंध अभिलेख नहीं मिल रहे हैं। मई 1994 में महापालिका के स्थान पर नगर निगम बना लेकिन निगम के दस्तावेजों में करीब 23 वर्ष बाद भी महापालिका दर्ज है। इसका खुलासा तब हुआ जब एसोसिएशन ने शुक्रवार को खसरा निकलवाया। इसमें पते तौर पर एक सरोजनी नायडू मार्ग और स्वामी के नाम के रूप में नगर महापालिका दर्ज है। पैन के लिए महापालिका के स्थान पर निगम होना चाहिए, जो नहीं हुआ, न ही पैन बनवाया। इसकी वजह से करीब 4500 नियमित कर्मचारी एवं अफसर, 2500 पेंशन, 300 संविदा कर्मी और एक हजार आउटसोर्स कर्मियों के भुगतान पर संकट खड़ा हो गया। एसोसिएशन के महामंत्री राजेंद्र पालीवाल और मंत्री मनोज श्रीवास्तव ने शुक्रवार को नगर आयुक्त शेषमणि पांडेय को इसकी जानकारी दी तो उन्होंने मुख्य कर निर्धारण अधिकारी को तत्काल आवश्यक परिवर्तन का आदेश दिया, ताकि पैन बनवाया जा सके।
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पैन के लिए आवेदन करने पर व्यक्ति या संस्था के नाम के साथ स्थानीय पता, जन्म या स्थापना की तिथि दर्ज करनी होती है। जन्म या स्थापना के संबंध में प्रमाण भी देना होता है लेकिन नगर निगम के सामने प्रमाण को ही लेकर संकट खड़ा हो गया। वर्ष 1864 में इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट गठित हुआ, जिसे बाद में नगर महापालिका बना दिया गया। महापालिका के गठन के संबंध अभिलेख नहीं मिल रहे हैं। मई 1994 में महापालिका के स्थान पर नगर निगम बना लेकिन निगम के दस्तावेजों में करीब 23 वर्ष बाद भी महापालिका दर्ज है। इसका खुलासा तब हुआ जब एसोसिएशन ने शुक्रवार को खसरा निकलवाया। इसमें पते तौर पर एक सरोजनी नायडू मार्ग और स्वामी के नाम के रूप में नगर महापालिका दर्ज है। पैन के लिए महापालिका के स्थान पर निगम होना चाहिए, जो नहीं हुआ, न ही पैन बनवाया। इसकी वजह से करीब 4500 नियमित कर्मचारी एवं अफसर, 2500 पेंशन, 300 संविदा कर्मी और एक हजार आउटसोर्स कर्मियों के भुगतान पर संकट खड़ा हो गया। एसोसिएशन के महामंत्री राजेंद्र पालीवाल और मंत्री मनोज श्रीवास्तव ने शुक्रवार को नगर आयुक्त शेषमणि पांडेय को इसकी जानकारी दी तो उन्होंने मुख्य कर निर्धारण अधिकारी को तत्काल आवश्यक परिवर्तन का आदेश दिया, ताकि पैन बनवाया जा सके।
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