Prayagraj : गोद में नवजात, आंखों में आंसू... दर्द की गठरी लेकर मायके लौटी बेटी
गोद में नवजात बच्ची... आंखों में आंसू... और टूटे रिश्तों का दर्द...। बेटी के भविष्य की चिंता और खुद के चकनाचूर अरमानों के साथ एक विवाहिता को ससुराल छोड़कर मायके लौटना पड़ा।
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गोद में नवजात बच्ची... आंखों में आंसू... और टूटे रिश्तों का दर्द...। बेटी के भविष्य की चिंता और खुद के चकनाचूर अरमानों के साथ एक विवाहिता को ससुराल छोड़कर मायके लौटना पड़ा। बात सिर्फ इतनी है कि वह बेटे को जन्म नहीं दे पाई। ससुराल वालों को यह बात इतनी बुरी लगी जैसे बहू ने यह सब जानबूझकर किया हो।
पीड़िता मेजा क्षेत्र की रहने वाली है। उसकी अप्रैल 2024 में जौनपुर निवासी युवक से शादी हुई थी। कुछ महीने बाद पूरा परिवार मुंबई में रहने लगा। आरोप है कि गर्भवती होने के बाद ससुराल वालों ने दहेज में कार और एक लाख रुपये की मांग शुरू कर दी, जबकि शादी में नकदी, गहने और गृहस्थी का भरपूर सामान दिया गया था।
कार न दे पाने पर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। ससुराल वाले बेटा पैदा करने के लिए दबाव बनाने लगे। बार-बार कहते कि परिवार में वारिस यानी बेटा ही होना चाहिए। तब यह बात हंसी मजाक की लगती थी। उम्मीद थी कि बच्चा पैदा होने के बाद परिवार में खुशियां आएंगी लेकिन हुआ इसका उलट।
रात के अंधेरे में घर से निकाला
पीड़िता के अनुसार, बेटी के जन्म लेते ही प्रताड़ना का स्तर बढ़ गया। फरवरी 2026 की एक रात उसे नवजात बेटी के साथ घर से निकाल दिया गया। रात में वह बच्ची को सीने से लगाए मदद की तलाश में भटकती रही। पड़ोसियों ने उसे कुछ समय के लिए सहारा दिया। अगले दिन भी ससुराल वालों ने उसे अपनाने से इन्कार कर दिया।
मायके लौटी, लगाई न्याय की गुहार
घर से निकाले जाने के बाद पीड़िता बच्ची के साथ मुंबई से प्रयागराज स्थित मायके लौटी। जौनपुर के मलीकलां निवासी पति श्याम बिंद, सास हीरामणि और ननद पूजा के खिलाफ महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई। तीन महीने चली जांच के बाद 16 जून को रिपोर्ट दर्ज की गई। पीड़िता ने वैवाहिक जीवन बचाने के लिए परिवार परामर्श केंद्र में भी गुहार लगाई है।