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निखिल की यादों को मिली ‘नई जिंदगी’
Sun, 09 Jun 2019 01:00 AM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 09 Jun 2019 01:00 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- फोटो : Prayagraj
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में प्राचीन इतिहास विभाग के शोधार्थी रहे निखिल जायसवाल भले ही इस दुनिया में न हों लेकिन उनकी लिखी थीसिस को किताब का रूप मिला और शनिवार को इविवि के बॉटनी विभाग में इस पुस्तक का विमोचन हुआ।
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पुराना कटरा निवासी निखिल इविवि में प्राचीन इतिहास विभाग के शोधार्थी थे। वह प्रो. जीके राय के निर्देशन में शोध कर रहे थे। निखिल ने अपनी थीसिस भी जमा कर दी थी लेकिन इंटरव्यू से पहले पिछले साल 18 मई को कौशांबी के पूरामुफ्ती में मार्ग दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। निखिल के पिता नागेंद्र जायसवाल ने इविवि में आवेदन दिया कि निखिल को पीएचडी की डिग्री प्रदान की जाए लेकिन इसमें तकनीकी पेच फंस गया। बाद में उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति को आवेदन दिया। मामला एकेडमिक कौंसिल में गया, जहां ज्यादातर सदस्यों ने आपत्ति की कि जो व्यक्ति इस दुनिया में नहीं है और उसने इंटरव्यू भी नहीं दिया है, उसे किस नियम के तहत पीएचडी की डिग्री दी जाए।
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अंत में एकेडमिक कौंसिल में प्रस्ताव पारित किया गया कि पीएचडी की डिग्री तो नहीं दी जा सकती है लेकिन निखिल के नाम पर एक प्रशंसा पत्र उनके परिवार वालों को सौंपा जाएगा। कौंसिल में लिए गए निर्णय के आधार पर डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार ने प्रशंसा पत्र जारी किया और परिवा रवालों को यह मशविरा भी दिया गया कि वे चाहें तो थीसिस को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करा सकते हैं। इसके बाद थीसिस को ‘भारत की शैक्षिक विकास यात्रा’ के नाम से पुस्तक का रूप दिया और शनिवार को लिखित स्मृति सेवा संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम में इस पुस्तक का विमोचन किया गया।
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मुख्य अतिथि पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने कहा कि निखिल का शोध समाज एवं देश के लिए अहम है। यूपीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. केबी पांडेय ने कहा कि निखिल का शोध हम सबके सामने पुस्तक के रूप में है और वह डीफिल की डिग्री से ज्यादा महत्वपूर्ण है। प्रो. जीके राय ने कहा कि भारत वर्ष के प्राचीन में भोजन और स्वास्थ्य पर काफी कम शोध हुए हैं। न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय, डॉ. शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरकेपी मिश्र, यूपीएचईएससी के अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने भी अने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर क्षेत्रीय संगठन मंत्री भारतीय मजदूर संघ अनुपम और प्रांत प्रचारक आरएसएस रमेश, अरुण, नीरज, नम्रता, आनंद सिंह, आदित्य विजय आदि मौजूद रहे।