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उपलब्धि: बेटी को प्रेरित करने के लिए न्यूरोसर्जन पिता ने साथ में दी नीट, दोनों हुए पास; डॉक्टर के 89 फीसदी...
Thu, 19 Oct 2023 10:55 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 19 Oct 2023 10:55 AM IST
सार
बेटी को प्रेरित करने के लिए न्यूरोसर्जन पिता ने उसके साथ में नीट की परीक्षा दी। दोनों ने परीक्षा पास कर ली। डॉक्टर ने 89 तो बेटी को 90 फीसदी अंक मिले हैं।
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बेटी और पिता ने साथ दी नीट की परीक्षा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जाने माने न्यूरो सर्जन डॉ. प्रकाश खेतान ने बेटी का हौसला बढ़ाने के लिए 49 वर्ष की उम्र में नीट की परीक्षा दे डाली। सुखद बात यह रही कि पिता और बेटी दोनों ने ही नीट को पास कर लिया। बेटी ने पिता से एक फीसदी ज्यादा अंक हासिल किए।
डॉ. खेतान बताते हैं, वह अपनी बेटी को नीट में सफल देखना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने खुद भी उसके साथ तैयारी की। बेटी के साथ फॉर्म भरा। फिर बाकयदा 2023 में एग्जाम भी दिया। डॉ. खेतान ने 1992 में सीपीएमटी पास की थी।
30 वर्षों के बाद बेटी मिताली को भी डॉक्टर बनाने का सपना साकार करने में जुट गए। जून में जब रिजल्ट आया तो बेटी मिताली को 90 फीसदी अंक मिले, जबकि डॉक्टर खेतान को 89 फीसदी। उन्होंने मिताली को जुलाई में कर्नाटक के मणिपाल के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में एडमिशन दिलाया है।
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बेटी से हारकर भी जीत गए डॉ. खेतान
डॉ. खेतान बताते हैं कि नीट की तैयारी के दौरान ओपीडी में नियमित रूप से बैठा। इसके बाद जो समय मिला, उस दौरान पढ़ाई कर लेता था। घर में बेटी के साथ होड़ लगी रहती थी कि कौन ज्यादा पढ़ाई करे। घरेलू स्पर्धा के कारण बेटी ने ज्यादा मेहनत की और नतीजा यह हुआ कि नीट में उसने मुझसे ज्यादा नंबर हासिल कर लिए। इस हार में जो सुख मिला, उसे बयां करना कठिन है।
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डॉ. खेतान बताते हैं, वह अपनी बेटी को नीट में सफल देखना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने खुद भी उसके साथ तैयारी की। बेटी के साथ फॉर्म भरा। फिर बाकयदा 2023 में एग्जाम भी दिया। डॉ. खेतान ने 1992 में सीपीएमटी पास की थी।
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30 वर्षों के बाद बेटी मिताली को भी डॉक्टर बनाने का सपना साकार करने में जुट गए। जून में जब रिजल्ट आया तो बेटी मिताली को 90 फीसदी अंक मिले, जबकि डॉक्टर खेतान को 89 फीसदी। उन्होंने मिताली को जुलाई में कर्नाटक के मणिपाल के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में एडमिशन दिलाया है।
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बेटी से हारकर भी जीत गए डॉ. खेतान
डॉ. खेतान बताते हैं कि नीट की तैयारी के दौरान ओपीडी में नियमित रूप से बैठा। इसके बाद जो समय मिला, उस दौरान पढ़ाई कर लेता था। घर में बेटी के साथ होड़ लगी रहती थी कि कौन ज्यादा पढ़ाई करे। घरेलू स्पर्धा के कारण बेटी ने ज्यादा मेहनत की और नतीजा यह हुआ कि नीट में उसने मुझसे ज्यादा नंबर हासिल कर लिए। इस हार में जो सुख मिला, उसे बयां करना कठिन है।