Danger Zone : न गहरे पानी के संकेतक न कहीं निगरानी, माह भर में संगम में 28 लोगों की डूबने से मौत
Prayagraj Sangam : एक माह में संगम और आसपास के घाटों में डूबने से 28 लोगों की जाने जा चुकी हैं। ताजा मामला आठ जून का है। संगम में स्नान करते समय अचानत तेज आंधी के चलते गहरे पानी में जाने से अधिवक्ता समेत सात लोग डूब गए। छह लोगों की लाश बरामद हो चुकी है।
विस्तार
संगम समेत गंगा यमुना के घाटों पर डुबकी लगाने के लिए देश-दुनिया के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा से मेला प्रशासन बेपरवाह है। घाटों पर जहां हजारों श्रद्धालुओं का रोज रेला उमड़ता है, वहां गहरे पानी वाले डेंजर जोन को न चिह्नित किया गया है और न वहां संकेतक ही लगाए गए हैं। नतीजतन महीने भर के भीतर संगम और आसपास के घाटों पर 28 जिंदगियां काल के गाल में समा चुकी हैं।
संगम पर गहरे पानी में डूबने से मौतों का सिलसिला जारी है। एक माह के दौरान डूबने के कारण कई लोगों की जान चली गई हैं। बावजूद इसके मेला प्रशासन के अधिकारी लगातार इस मामले को लेकर गंभीर नहीं नजर आ रहे हैं।
हालात इतने खराब हैं कि कई लोगों की जान जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से तिलक घाट से लेकर दारागंज घाट तक किसी भी घाट पर गहरे पानी वाले तटों को चिह्नित कर निर्देशिका तक नहीं लगाई गई है। ना ही किसी घाट पर जल पुलिस या एनडीआरएफ की तैनाती ही की गई, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोका जा सके। खानापूर्ति के लिए संगम मुख्य स्नान घाट, किला घाट, रामघाट, कालीघाट, दारागंज घाटों पर डीप वॉटर बैरिकेडिंग लगाकर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई है।
रामघाट के तीर्थपुरोहित राम लखन कहते हैं कि शासन की ओर से इस और जब तक कड़ाई से ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक डूबने की घटनाओं पर काबू नहीं पाया जा सकता। संगम घाट पर चंदन टीका लगाने वाले पं. रामनरेश त्रिपाठी बताते हैं कि भक्त स्नान के दौरान पानी कम होने के कारण डीप वॉटर बैरिकेडिंग को क्रॉस करके आगे चले जाते हैं। इस दौरान जल की धारा में फंसने से डूबने से उनकी की मौत हो जाती है।
दृश्य एक
समय एक बजे दोपहर के समय संगम मुख्य स्नान घाट में मध्य प्रदेश के रीवा से आए बच्चू लाल परिवार संग नहा रहे थे। इस दौरान पानी कम होने के कारण बच्चू लाल डीप वॉटर बैरिकेडिंग को क्रॉस करके स्नान करने आगे चले गए। तभी वहां पर मौजूद लोगों ने उनको ऐसा करने से रोका। वापस आने पर उनसे ऐसा करने की वजह पूछी गई तो उन्होंने बताया कि गहरे पानी का कोई भी साइन बोर्ड नहीं दिखाई पड़ा, इस कारण वह स्नान करने आगे चले गए थें।
दृश्य दो
रामघाट दोपहर के 2:00 बजे।
रामघाट पर छत्तीसगढ़ से स्नान करने परिवार संग पहुंचे शेषमणि पत्नी और बच्चों संग स्नान करते-करते गहरे पानी की तरफ चले गए इस दौरान पर लड़खड़ाया तो पत्नी आरती में शोर मचाया। आसपास आसपास मौजूद लोगों ने उनको बाहर निकाला। शेषमणि ने बताया कि नहाते समय गहरे पानी का अंदाजा ही नहीं हुआ। कब उनका पैर फिसलने लगा समझ में ही नहीं आया। यह घटनाएं तो बस एक बानगी भर हैं। अगर शासन के स्तर से किला घाट, संगम मुख्य स्नान घाट, वीआईपी घाट, रामघाट ,कालीघाट , दारागंज घाट आदि घाटों पर गहरे पानी का साइन बोर्ड लगा दिया जाए और जल पुलिस की तैनाती कर दी जाए तभी घटनाओं को रोका जा सकता है।
डूबने से अब तक हुई मौतें
4 मई शिवकुटी से 5 बच्चे गंगा नहाने गए जिसमें दो बच्चे 13 वर्षी कृष्ण और 12 वर्षी प्रियांशु डूब गए।
18 मई एमएनएनआईटी के पांच छात्र गंगा नहाने गए जिसमें से दो छात्र दीपेंद्र और विकास मौर्य डूब गए।
20 मई फाफमऊ घाट पर गंगा में वॉलीबॉल खेल रहे दो छात्र रमन और कृष्णा गंगा में समा गए।
23 मई सतना से संगम स्नान को पहुचे आदित्य और गोविंद गंगा में बह गए।
30 मई गंगा दशहरा के दिन अरैल घाट पर स्नान करता है उज्जवल गुप्ता पानी में समा गया गया।
2 जून श्रृंगवेरपुर घाट पर स्नान करता है युवक केशव पानी में समा गया
4 जून करछना क्षेत्र स्थित गंगा घाट पर स्नान को गए दो चचेरे भाई गंगा में बह गए।
4 जून संगम में छह युवकों की डूबने से मौत।