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देवी दर्शन को लगीं कतारें, गूंजे जयकारे
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 12 Apr 2016 02:52 AM IST
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चौक गंगादास स्थित खेमामाई मंदिर में सोमवार को मां की आराधना करते श्रद्घालु।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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चैत्र नवरात्र के पांचवे दिन सोमवार को शहर के शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की और भीड़ जुटी। सुबह मंगलाआरती के बाद से ही देवी के पूजन के लिए उनका जुटना शुरू हो गया था। दोपहर में शृंगार के लिए कपाट बंद रहे, पर शाम को शृंगार दर्शन के लिए फिर शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की कतारें लगीं। देवी के जयकारे गूंजे और विविध अनुष्ठान भी हुए।
मीरापुर स्थित सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर में देवी के स्कंदमाता स्वरूप का पूजन अर्चन हुआ। पंचप्रेत आसन पर विराजमान त्रिपुर सुंदरी ललिता देवी का बहुरंगी फूलों से शृंगार किया गया। ढोल, मजीरे, नगाड़े, शंख आदि की मंगलध्वनि के बीच देवी की महामंगल आरती उतारी गई। शृंगार के बाद देवी दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के आने का क्रम आरंभ हुआ जो देर रात तक चलता रहा। मंदिर परिसर में मुंडन, कर्णछेदन जैसे संस्कार भी हुए। मध्यरात्रि में देवी की त्रिकाल आरती उतारी गई। व्यवस्था में अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा, महामंत्री धीरज नागर आदि जुटे रहे।
अलोपीबाग स्थित अलोपशंकरी मंदिर में पूजन और निशान चढ़ाने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से भी श्रद्धालु
आए। प्रधान पुजारी शिवानंद गिरि ने ढोल, मजीरे, नगाड़े, शंखनाद के बीच शृंगार आरती चौक गंगादास स्थित खेमामाई मंदिर में नवदुर्गा का गुलाब के फूलों से शृंगार किया गया।
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इसी क्रम में कर्नलगंज कालीबाड़ी, मुट्ठीगंज कालीबाड़ी, कटरा कालीथान, हाईकोर्ट हनुमान मंदिर दुर्गा मंदिर, हाईकोर्ट पानी टंकी के निकट अष्टभुजी मंदिर, समिया माई मंदिर सहित अनेक शक्तिपीठों में पूजन, दर्शन को श्रद्धालुओं का तांता लगा।
शृंगार दर्शन पा हुए निहाल
कल्याणी देवी मंदिर में स्वर्णाभूषणों और गुलाब के फूलों से देवी का शृंगार किया गया। सुबह की अपेक्षा शाम को देवी के शृंगार दर्शन के लिए ज्यादा लोग जुटे। कल्याणी देवी का मनोहारी शृंगार भक्तों को मंत्रमुग्ध करता रही। दोपहर तक मंदिर परिसर में मुंडन, कर्णछेदन संस्कार के लिए श्रद्धालु आए। अध्यक्ष सुशील पाठक, महामंत्री श्याम जी पाठक व्यवस्था में व्यस्त रहे।
तांत्रिक पद्धति से पूजी गईं सिद्धेश्वरी
सिविल लाइंस रोडवेज के सामने स्थित सिद्धेश्वरी गुप्तपीठ में तांत्रिक पद्धति से पूजा की गई। पीठाधीश्वर आचार्य कुशमुनि के निर्देशन में मंदिर के दीक्षित साधकों ने पूजा-अर्चना की। इस मौके पर व्यवस्थापिका पूनम उपस्थित रहीं।
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मीरापुर स्थित सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर में देवी के स्कंदमाता स्वरूप का पूजन अर्चन हुआ। पंचप्रेत आसन पर विराजमान त्रिपुर सुंदरी ललिता देवी का बहुरंगी फूलों से शृंगार किया गया। ढोल, मजीरे, नगाड़े, शंख आदि की मंगलध्वनि के बीच देवी की महामंगल आरती उतारी गई। शृंगार के बाद देवी दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के आने का क्रम आरंभ हुआ जो देर रात तक चलता रहा। मंदिर परिसर में मुंडन, कर्णछेदन जैसे संस्कार भी हुए। मध्यरात्रि में देवी की त्रिकाल आरती उतारी गई। व्यवस्था में अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा, महामंत्री धीरज नागर आदि जुटे रहे।
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अलोपीबाग स्थित अलोपशंकरी मंदिर में पूजन और निशान चढ़ाने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से भी श्रद्धालु
आए। प्रधान पुजारी शिवानंद गिरि ने ढोल, मजीरे, नगाड़े, शंखनाद के बीच शृंगार आरती चौक गंगादास स्थित खेमामाई मंदिर में नवदुर्गा का गुलाब के फूलों से शृंगार किया गया।
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इसी क्रम में कर्नलगंज कालीबाड़ी, मुट्ठीगंज कालीबाड़ी, कटरा कालीथान, हाईकोर्ट हनुमान मंदिर दुर्गा मंदिर, हाईकोर्ट पानी टंकी के निकट अष्टभुजी मंदिर, समिया माई मंदिर सहित अनेक शक्तिपीठों में पूजन, दर्शन को श्रद्धालुओं का तांता लगा।
शृंगार दर्शन पा हुए निहाल
कल्याणी देवी मंदिर में स्वर्णाभूषणों और गुलाब के फूलों से देवी का शृंगार किया गया। सुबह की अपेक्षा शाम को देवी के शृंगार दर्शन के लिए ज्यादा लोग जुटे। कल्याणी देवी का मनोहारी शृंगार भक्तों को मंत्रमुग्ध करता रही। दोपहर तक मंदिर परिसर में मुंडन, कर्णछेदन संस्कार के लिए श्रद्धालु आए। अध्यक्ष सुशील पाठक, महामंत्री श्याम जी पाठक व्यवस्था में व्यस्त रहे।
तांत्रिक पद्धति से पूजी गईं सिद्धेश्वरी
सिविल लाइंस रोडवेज के सामने स्थित सिद्धेश्वरी गुप्तपीठ में तांत्रिक पद्धति से पूजा की गई। पीठाधीश्वर आचार्य कुशमुनि के निर्देशन में मंदिर के दीक्षित साधकों ने पूजा-अर्चना की। इस मौके पर व्यवस्थापिका पूनम उपस्थित रहीं।