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प्रयागराज: आनंद गिरि के माफी मांगने पर नरेंद्र गिरि ने कर दिया था माफ, कई दिनों तक चला था गुरु-शिष्य के बीच विवाद
Mon, 20 Sep 2021 10:39 PM IST
सुशील कुमार कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Mon, 20 Sep 2021 10:39 PM IST
सार
परिवार से संबंध रखने और मठ-मंदिर के धन के दुरुपयोग के मामले में कार्रवाई के बाद स्वामी आनंद गिरि को पहले मठ बाघंबरी गद्दी और त्रिवेणी बांध स्थित बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक पद से हटा दिया गया था।
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prayagraj news : महंत नरेंद्र गिरि से माफी मांगते हुए उनके शिष्य योग गुरु आनंद गिरि।
- फोटो : prayagraj
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विस्तार
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि और उनके शिष्य योग गुरु स्वामी आनंद गिरि के बीच कई तरह के आरोपों को लेकर 13 दिनों तक विवाद चला था, लेकिन आनंद गिरि के माफीनामे के बाद मामले का पटाक्षेप हो गया था।
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लखनऊ में एक अधिकारी शिष्य के आवास पर दोनों की मुलाकात के बाद विवाद के 14वें दिन स्वामी आनंद गिरि ने अपने गुरु महंत नरेंद्र गिरि के पांव पकड़कर उन पर लगाए गए आरोपों, बयानों को वापस लेते हुए अपने किए और कहे के लिए माफी मांग ली थी। वहीं गुरु परंपरा का निर्वाह करते हुए महंत नरेंद्र गिरि ने भी स्वामी आनंद गिरि की ओर से किए गए सभी कृत्यों के लिए माफी मांग लेने पर उनके किए और कहे को क्षमा करते हुए उनके मठ बाघंबरी गद्दी में आने और पूजन करने पर लगा प्रतिबंध हटा लिया था।
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विवाद के पटाक्षेप के बाद स्वामी आनंद गिरि हरिद्वार स्थित गुजराती आश्रम और महंत नरेंद्र गिरि प्रयागराज के मठ बाघंबरी गद्दी लौट आए थे। अपने लिखित माफीनामे में स्वामी आनंद गिरि ने कहा था कि किसी भी समाचार माध्यम से कहे गए मैं अपने सभी आरोप वापस लेता हूं। गुरु-शिष्य परंपरा को बनाए रखने के लिए मैं भावावेश में कहे गए सभी बयान वापस लेते हुए अपने कृत्य के लिए क्षमा मांगता हूं। साथ ही मैं अपने निरंजनी अखाड़े के पंचपरमेश्वर से भी क्षमा मांगता हूं। पूज्य महंत नरेंद्र गिरि जी मेरे गुरु थे, हैं और सदैव रहेंगे।
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13 दिनों तक चला था विवाद
परिवार से संबंध रखने और मठ-मंदिर के धन के दुरुपयोग के मामले में कार्रवाई के बाद स्वामी आनंद गिरि को पहले मठ बाघंबरी गद्दी और त्रिवेणी बांध स्थित बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक पद से हटा दिया गया था। बाद में महंत नरेंद्र गिरि की शिकायत पर उन्हें पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी से भी 14 मई को निष्कासित कर दिया गया था। इसी के बाद स्वामी आनंद गिरि की ओर से मठ और अखाड़े की संपत्तियां बेचने सहित महंत नरेंद्र गिरि पर अपने परिजनों को मकान और जमीन का लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे। आरोप-प्रत्यारोप में काफी हद तक बात बिगड़ने के बाद शिष्यों की मध्यस्थता के बाद दोनों के बीच उपजे मतभेद को खत्म करते हुए एका कराई गई थी।