नरेंद्र गिरि सुसाइड: वीडियोग्राफी के बीच पांच डॉक्टरों के पैनल ने शुरू किया पोस्टमार्टम, रिपोर्ट होगी सील

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 22 Sep 2021 08:19 AM IST

सार

महंत नरेंद्र गिरि के शव का पोस्टमार्टम पांच डॉक्टरों ने शुरू कर दिया है। महंत नरेंद्र गिरि को आज भू समाधि दी जाएगी। पोस्टमार्टम के दौरान हर क्षण की वीडियोग्राफी कराई जा रही है। मौके पर ही रिपोर्ट सील होगी।
महंत नरेंद्र गिरि (फाइल फोटो)
महंत नरेंद्र गिरि (फाइल फोटो) - फोटो : prayagraj
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विस्तार

मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर महंत नरेंद्र गिरि के शव का पोस्टमार्टम पांच डॉक्टरों ने शुरू कर दिया है। गठित पैनल में दो विशेषज्ञ एमएलएन मेडिकल कॉलेज, दो डॉक्टर जिला अस्पताल और सीएमओ के अधीन तैनात एक डॉक्टर को शामिल किया गया है। पोस्टमार्टम पैनल के सभी चिकित्सकों के नाम गुप्त रखे गए हैं। रिपोर्ट मौके पर ही सील की जाएगी। एक प्रति सीएम कार्यालय को भी भेजे जाने की सूचना है।
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जिलाधिकारी संजय खत्री, आईजी केपी सिंह, डीआईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज, सीएमओ डॉ. नानक सरन समेत अन्य अधिकारियों की बैठक में पोस्टमार्टम पैनल गठित किया गया। महंत के शव का पोस्टमार्टम करने वाले सभी विशेषज्ञों के नाम अफसरों के अलावा किसी को नहीं बताए गए। 


अफसरों ने तय किया है कि इस हाई प्रोफाइल मामले में पोस्टमार्टम के दौरान हर क्षण की वीडियोग्राफी कराई जा रही है। मौके पर ही रिपोर्ट सील होगी। सीएमओ डॉ. नानक सरन ने पोस्टमार्टम की तैयारियों के बावत कुछ बोलने से इनकार किया। 

मठ बाघंबरी गद्दी में ही दी जाएगी भू समाधि
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष और मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि को मठ बाघंबरी गद्दी में ही आज भू समाधि दी जाएगी। पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी के मुताबिक मठ के भीतर ही उनका समाधिस्थल बनेगा। इस मौके पर अनेक प्रमुख संतों सहित निरंजनी अखाड़े के पंचपरमेश्वर एवं अन्य संत-महंत मौजूद रहेंगे। 

छह पेज के सुसाइड नोट में 41 बार कटिंग
महंत नरेंद्र गिरि का कथित सुसाइड नोट छह पेज का है, जिस पर कुल 41 बार कटिंग की गई है। इनमें शब्दों के साथ ही तारीख में की गई कटिंग भी शामिल है। इसमें जो भी बातें लिखी गईं, उसका कई पन्नों पर रिपीटिशन भी है यानी वह बातें-बातें कई बार लिखी गई हैं। सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि इसमें महंत शब्द दो अलग-अलग तरीके से लिखा है। कई जगह महंत लिखा गया है तो एक जगह पूरे शब्द की जगह सिर्फ म शब्द का प्रयोग किया गया है।

बलबीर गिरि हो सकते हैं बाघंबरी मठ के महंत, नरेंद्र गिरि के एक नहीं, चार बनेंगे उत्तराधिकारी

महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद अब उनके उत्तराधिकार को लेकर बहस छिड़ गई है। उनकी मौत के बाद अखिल भारतीय अख्राड़ा परिषद अध्यक्ष समेत चार अहम पद रिक्त हो गए हैं। अब उनके बाद इन पदों पर किसकी ताजपोशी होगी, इसे लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है। हालांकि सुसाइट नोट को आधार माना जाए तो हरिद्वार में रह रहे बलबीर गिरि बाघंबरी मठ के महंत होंगे।

बाघंबरी गद्दी मठ के अगले महंत को लेकर अंदरखाने कशमकश तेज हो गई है। आनंद गिरि से विवाद के समय ही महंत नरेंद्र गिरि ने साफ कर दिया था कि बाघंबरी मठ और निरंजनी अखाड़ा दोनों अलग-अलग संस्थाएं हैं। बाघंबरी मठ उनकी अपनी संपत्ति है और वह उनके नाम से अभिलेखों में दर्ज है। ऐसे में सुसाइट नोट में लिखे उत्तराधिकारी के नाम को लेकर महंतई चादर पर विचार किया जा सकता है। इस आधार पर अगले महंत बलबीर गिरि हो सकते हैं।

बकि, बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक की जिम्मेदारी अमर गिरि पवन महाराज को पहले ही सौंपी जा चुकी है। इसी तरह नरेंद्र गिरि की मौत से रिक्त हुए निरंजनी अखाड़े के सचिव पद को भरने के लिए अखाड़े की ओर से संतों की ओर से बैठक बुलाई जाएगी, ताकि इस पर निर्णय किया जा सके। इन सबके बीच सबसे अहम है अगले अखाड़ा परिषद अध्यक्ष का नाम तय करना। महंत हरि गिरि के अनुसार इस मसले को अखाड़ा परिषद ही तय करेगा। इसके लिए परिषद की बैठक बुलाई जाएगी। 

सुसाइट नोट की सत्यता को परखना जरूरी: महंत हरि गिरि
देर शाम अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने अमर उजाला से कहा कि निरंजनी अखाड़ा ही उनके उत्तराधिकार के मसले को तय करेगा। हरि गिरि ने सुसाइट नोट में दिए गए उत्तराधिकारी के नाम और उसकी सत्यता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि सीएम के हस्तक्षेप पर बुधवार को ही समाधि दी जाएगी। समाधि के बाद उनका पहला लक्ष्य है कि हत्यारे पकड़े जाएं और उनको सजा दिलाई जाए।

जिस कमरे में शव मिला, उसमें सोते ही नहीं थे नरेंद्र गिरि

बाघंबरी गद्दी मठ में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल जिस कमरे में फंदे से लटकता हुआ महंत का शव मिला, वह उसमें कभी सोते ही नहीं थे। इसके अलावा उस कमरे से अटैच बाथरूम का एक दरवाजा बाहर की ओर भी खुलता है। ऐसे में भीतर से लॉक रहने के बावजूद उस कमरे से कोई भी बाहर निकल सकता है। ऐसे में महंत की मौत की गुत्थी और भी उलझ सकती है।

महंत नरेंद्र गिरि का फंदे से लटकता शव मठ परिसर में मीटिंग हाल के ठीक सामने वाले कक्ष में मिला था। कहा जा रहा है कि महंत का शयन कक्ष बाघंबरेश्वर महादेव मंदिर की पहली मंजिल पर था। उसी में वह सोते और आराम भी करते थे। जिन कमरे में उनका शव मिला, उसमें वह रहते नहीं थे। खुफिया विभाग की टीम ने भी जब उस कमरे की पड़ताल की तब पता चला कि उस कक्ष से अटैच बाथरूम का एक दरवाजा ऐसा भी है, जो बाहर की ओर खुलता है। ऐसे में कक्ष का दरवाजा भीतर से बंद रखने के बाद भी कोई व्यक्ति वहां से बाथरूम के रास्ते से बाहर निकल सकता है। ऐसे में नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।

रामजन्मभूमि विवाद के पक्षकार रहे निर्वाणी अनी अखाड़े के महंत धर्मदास मंगलवार को नरेंद्र गिरि के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए जब पहुंचे, तब उन्होंने भी इसका जिक्र किया। महंत धर्मदास का कहना था कि जिस कमरे में उनका शव मिला है, उसमें वह कभी नहीं सोते थे। महंत धर्मदास का कहना था कि उनकी हत्या कर शव को वहां लाकर लटकाया गया, ताकि इस घटना को आत्महत्या का रूप दिया जा सके। उन्होंने सुसाइट नोट को भी बनावटी और नकली करार दिया। धर्मदास ने दावा किया कि महंत नरेंद्र गिरि लिखना नहीं जानते थे।
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