प्रयागराज : लूट, मारपीट में दर्ज प्राथमिकी पर नारकोटिक्स अफसरों को नहीं मिली राहत
याची के खिलाफ बरेली के कोतवाली थाने में भगवान देवी ने पांच अप्रैल 2023 को लूट, मारपीट और धमकी देने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि नारकोटिक्स अफसरों ने 19 सितंबर 2022 को उसके पति अजय पाल को धमकी देकर तीन लाख, 10 हजार रुपये की वसूली की।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के कोतवाली में दर्ज प्राथमिकी में नारकोटिक्स अधिकारियों को राहत देने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए प्राथमिकी पर जांच जरूरी है। इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने एसएसपी बरेली को जांच के दौरान मिलने वाले पदार्थ की रिपोर्ट प्रस्तुत करने और एडीजे को नियमों के मुताबिक जांच कराने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की खंडपीठ ने दीपक शर्मा व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
याची के खिलाफ बरेली के कोतवाली थाने में भगवान देवी ने पांच अप्रैल 2023 को लूट, मारपीट और धमकी देने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि नारकोटिक्स अफसरों ने 19 सितंबर 2022 को उसके पति अजय पाल को धमकी देकर तीन लाख, 10 हजार रुपये की वसूली की। उसके पति ने इस संबंध में पुलिस के उच्चाधिकारियों से शिकायत की। 23 सितंबर 2022 को एसटीएफ अधिकारियों ने अजय पाल को पूछताछ के लिए बुलाया था।
इधर पति की अनुपस्थिति में नारकोटिक्स अधिकारी भगवान देवी के घर में घुस गए। परिवार के सदस्यों को धमकी दी और दो लाख रुपये की मांग की। उसके पति अजय पाल ने एसटीएफ से इसकी भी शिकायत की। एसटीएफ इंस्पेक्टर ने आरोपियोंं को बुलाकर पूछताछ की तो उन्होंने वसूली की बात स्वीकार कर ली। लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इस पर भगवान देवी के पति अजय पाल ने सीजीएम बरेली के समक्ष 156 (3) के तहत आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग पर अर्जी दाखिल की। 24 नवंबर 22 को जब उसके पति अदालत जा रहे थे तो नारकोटिक्स अधिकारियों ने नशीला पदार्थ मिलने का आरोप लगाकर उन्हें जेल भेज दिया।
याचियों की ओर से कोर्ट के समक्ष तर्क दिया गया कि उसने प्रतिवादी अजय पाल को सरताज नामक युवक की निशानदेही पर गिरफ्तार किया। क्योंकि सरताज ने आरोप लगाया कि वह प्रतिबंधित पदार्थ अजय पाल से खरीदता था। उसके खिलाफ कई मामले पहले से दर्ज हैं। मादक पदार्थ हेरोइन बेचने में पकड़ा जा चुका है।
याची नारकोटिक्स विभाग के कर्मचारी हैं और अपने कर्तव्यों का निवर्हन कर रहे थे। प्रतिवादियों की ओर से उन्हें जानबूझकर फंसाया गया है। जवाब में सरकारी अधिवक्ता ने याचिका रद्द करने का विरोध किया। कहा कि एसएसपी बरेली की जांच में आरोप सही पाए गए हैं। जब याचियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो गई तो उसके बाद प्रतिवादियों के खिलाफ मुकदमा लिखा गया। लिहाजा, याचिका खारिज किए जाने योग्य है।