नाग पंचमी : नागों के निमित्त चढ़ाया दूध-लावा, मांगा विषबाधा से मुक्ति का आशीष
- नागपंचमी पर नागवासुकि, तक्षकतीर्थ में कालसर्प दोष निवारण को हुए अनुष्ठान
- पिटारी में नाग-नागिन लेकर सपेरे मोहल्ले-मोहल्ले जाकर कराते रहे नागदर्शन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नागपंचमी पर शुक्रवार को घर, मंदिर नागदेव की पूजा-अर्चना की गई। नागों के निमित्त दूध और लावा चढ़ाकर उनसे सर्पदोष और विषबाधा मुक्ति का आशीष मांगा गया। परंपरानुसार घर की मुखिया या बड़ी-बूढ़ी महिला ने गोबर से घर के प्रवेशद्वार के दोनों ओर नाग-नागिन का चित्र उकेरा और फिर दूध-लावा चढ़ाकर उनकी पूजा की। साथ ही परिवार के सभी सदस्यों के लिए सभी प्रकार के सर्पदोषों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हुए उनके मंगल का आशीर्वाद मांगा। घरों में विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए गए।
नागवासुकि मंदिर में कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए पुजारी श्यामधर त्रिपाठी की देखरेख में सर्पबाधा, सर्पदोष से मुक्ति के लिए अनुष्ठान, महारुद्राभिषेक और महाआरती हुई। मंदिर में रात तक श्रद्धालुओं के आने का क्रम बना ही रहा लेकिन उनकी संख्या अपेक्षाकृत कम रही। श्रद्धालुओं ने मंदिर के बाहर गंगापुत्र भीष्म पितामह की लेटी हुई प्रतिमा का दर्शन करके उन्हें भी पुष्पांजलि दी। वहीं दरियाबाद स्थित तक्षकतीर्थ में पीठाधीश्वर रविशंकर जी महाराज की देखरेख में तक्षकेश्वरके पूजन के बाद महारुद्राभिषेक किया गया। विषबाधा मुक्ति तथा कालसर्प दोष निवारण के लिए विशेष पूजा-अनुष्ठान हुए। शाम को चांदी के आभूषणों, फूलों और कौड़ियों से तक्षकेश्वर का अनुपम शृंगार किया गया।