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चुनाव कराने के लिए पास करनी होगी परीक्षा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 30 May 2016 01:02 AM IST
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परीक्षा
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चुनाव कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग काबिल अफसरों के खोजबीन में जुटा है। रविवार को इलाहाबाद आए निर्वाचन आयोग के उप निर्वाचन आयुक्त उमेश सिन्हा ने कहा कि चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीरण अधिकारी (एईआरओ) की होती है। इस बार चुनाव में ईआरओ और एईआरओ वही अफसर बन सकेंगे, जो इसके लिए आयोजित परीक्षा में उत्तीर्ण होंगे। आयोग की मंशा है कि ईआरओ और एईआरओ वही अफसर बनाए जाएं, जो काम में दक्ष एवं प्रवीण हों।
उप निर्वाचन आयुक्त उमेश सिन्हा ने ईआरओ और एईआरओ के लिए कार्यशाला आयोजित कराए जाने का निर्देश दिए। यह मुद्दा भी उठा कि चुनाव में ईआरओ और एईआरओ को बराबर के अधिकार होते हैं लेकिन ईआरओ पर जिम्मेदारी अधिक होती है। इस पर उन्होंने दोनों के बीच कार्यों का बराबर बंटवारा किए जाने के निर्देश दिए। सर्किट हाउस में चुनाव से जुड़े अफसरों के साथ हुई बैठक में उन्होंने बूथ जागरूकता समूह के गठन पर जोर दिया।
कहा कि अन्य राज्यों में इसके उत्साहवर्धक परिणाम देखने को मिले हैं। इस समूह में बूथ स्तर के अफसर, बीएलओ, एएनएम, आंगनबाड़ी, आशा बहू, पंचायत सचिव, लेखपाल होंगे। इसके आलवा स्थानीय निकाय और ग्राम पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी इस समूह में रखा जाए और समूह की बैठकें कराकर मतदाता सूची एवं अन्य निर्वाचन संबंधी सुझावों को संकलित कर उन पर अमल किया जाए। उन्होंने त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने बीएलओ की भूमिका को भी रेखांकित किया औरउ नके कार्यशालाएं आयोजित कराए जाने को कहा।
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बूथों के निर्धारण को लेकर निर्वाचन आयोग की ओर से नई गाइडलाइन जारी होने के बाद बूथों की संख्या में इजाफा हो गया है। निर्वाचन आयोग ने पहले निर्देश दिए थे कि एक बूथ पर अधिकतम 1500 मतदाताओं को आधार मानते हुए बूथों का निर्धारण किया जाए। इस पर जिले में 4326 बूथ चिह्नित किए गए थे। कुछ दिनों पहले आयोग ने निर्देश जारी किए कि शहरी क्षेत्र में एक बूथ पर अधिकतम 1400 और ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतम 1200 वोटरों को आधार मानकर बूथों का निर्धारण किया जाएगा। उप जिला निर्वाचन अधिकारी डीएस पांडेय ने बैठक में बताया कि इस आधार पर बूथों की संख्या बढ़कर 4894 हो रही है। फाफामऊ में 398, सोरांव में 422, फूलपुर में 425, प्रतापपुर में 416, हडिया में 417, मेजा में 356, करछना में 397, इलाहाबाद पश्चिम में 454, इलाहाबाद उत्तर में 434, इलाहाबाद दक्षिण में 393, बारा में 405 और कोरांव में 395 संभावित मतदेय स्थल चिह्नित किए गए हैं।
उप निर्वाचन आयुक्त उमेश सिन्हा ने ईआरओ और एईआरओ के लिए कार्यशाला आयोजित कराए जाने का निर्देश दिए। यह मुद्दा भी उठा कि चुनाव में ईआरओ और एईआरओ को बराबर के अधिकार होते हैं लेकिन ईआरओ पर जिम्मेदारी अधिक होती है। इस पर उन्होंने दोनों के बीच कार्यों का बराबर बंटवारा किए जाने के निर्देश दिए। सर्किट हाउस में चुनाव से जुड़े अफसरों के साथ हुई बैठक में उन्होंने बूथ जागरूकता समूह के गठन पर जोर दिया।
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कहा कि अन्य राज्यों में इसके उत्साहवर्धक परिणाम देखने को मिले हैं। इस समूह में बूथ स्तर के अफसर, बीएलओ, एएनएम, आंगनबाड़ी, आशा बहू, पंचायत सचिव, लेखपाल होंगे। इसके आलवा स्थानीय निकाय और ग्राम पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी इस समूह में रखा जाए और समूह की बैठकें कराकर मतदाता सूची एवं अन्य निर्वाचन संबंधी सुझावों को संकलित कर उन पर अमल किया जाए। उन्होंने त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने बीएलओ की भूमिका को भी रेखांकित किया औरउ नके कार्यशालाएं आयोजित कराए जाने को कहा।
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बूथों के निर्धारण को लेकर निर्वाचन आयोग की ओर से नई गाइडलाइन जारी होने के बाद बूथों की संख्या में इजाफा हो गया है। निर्वाचन आयोग ने पहले निर्देश दिए थे कि एक बूथ पर अधिकतम 1500 मतदाताओं को आधार मानते हुए बूथों का निर्धारण किया जाए। इस पर जिले में 4326 बूथ चिह्नित किए गए थे। कुछ दिनों पहले आयोग ने निर्देश जारी किए कि शहरी क्षेत्र में एक बूथ पर अधिकतम 1400 और ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतम 1200 वोटरों को आधार मानकर बूथों का निर्धारण किया जाएगा। उप जिला निर्वाचन अधिकारी डीएस पांडेय ने बैठक में बताया कि इस आधार पर बूथों की संख्या बढ़कर 4894 हो रही है। फाफामऊ में 398, सोरांव में 422, फूलपुर में 425, प्रतापपुर में 416, हडिया में 417, मेजा में 356, करछना में 397, इलाहाबाद पश्चिम में 454, इलाहाबाद उत्तर में 434, इलाहाबाद दक्षिण में 393, बारा में 405 और कोरांव में 395 संभावित मतदेय स्थल चिह्नित किए गए हैं।