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पहले भी मुसलमान पढ़ाते रहे वेद

Fri, 22 Nov 2019 01:21 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 22 Nov 2019 01:21 AM IST
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Muslim used to teach Ved: Prof Ram Kishor
Muslim used to teach Ved: Prof Ram Kishor - फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। वह सनातन धर्म ही क्या, जो दूसरों को खुद में समाहित न कर ले। यह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की आंतरिक राजनीति है, वरना असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. फिरोज खान जैसे देश में सैकड़ों मुस्लिम शिक्षक मिल जाएंगे, जिन्होंने जीवन भर संस्कृत पढ़ी और फिर दूसरों को भी पढ़ाया। प्रो. असहाब अली गोरखपुर विश्वविद्यालय में संस्कृत के विभागाध्यक्ष रहे और उन्होंने वेद ही पढ़ाया।
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भाषा किसी धर्म की मोहताज नहीं होती। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में संस्कृत की विभागाध्यक्ष रहीं प्रो. किश्वर जबीं नसरीन समेत विश्वविद्यालय के तमाम मुस्लिम पुरा छात्र-छात्राएं जाति-धर्म के बंधनों से इतर संस्कृत भाषा में रचे-बसे रहे। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में संस्कृत के विभागाध्यक्ष प्रो. शरीफ इविवि के पुरा छात्र रहे हैं। उन्होंने इविवि से ही पीएचडी और डीलिट की पढ़ाई की थी।
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इविवि में ज्वाइन करने से पहले मैंने और मो. मेराज अहमद ने दिल्ली में रहकर आईएएस की तैयारी की थी। मैं इविवि चला आया और मेराज इन दिनों श्रीनगर विश्वविद्यालय में संस्कृत के विभागाध्यक्ष हैं। इविवि से ही संस्कृत में पीएचडी की पढ़ाई करने के बाद शाहीन जाफरी शिवली कॉलेज, आजमगढ़ में शिक्षक बन गईं, जहां वह एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।
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डॉ. सरवले आलम मेरे शोधार्थी रहे। इन दिनों वह मुसाफिर खाना इंटर कॉलेज, सुल्तानपुर में लेक्चरर के पद पर कार्यरत हैं और बच्चों को संस्कृत पढ़ा रहे हैं। इविवि की पुरा छात्रा गजाला अंसारी राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान लखनऊ में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। इविवि के पुराछात्र इरफान सिद्दीकी इन दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय से संस्कृत में पीएचडी कर रहे हैं।

ये तो कुछ उदाहरण मात्र हैं। देश भर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में संस्कृत पढ़ाने वाले मुस्लिम शिक्षकों की संख्या सैकड़ों में होगी। इससे पहले कभी नहीं सुना था कि किसी विश्वविद्यालय में मुस्लिम शिक्षक के संस्कृत पढ़ाने का विरोध हुआ हो। बीएचयू के मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है। इस प्रकरण को सांप्रदायिकता से प्रेरित कुछ लोग बढ़ावा दे रहे हैं। वैसे भी मो. फिरोज की जिस विभाग में नियुक्ति हुई है, वहां पढ़ाई का धर्म से कोई लेना देना नहीं है।
(लेखक इविवि में संस्कृत के विभागाध्यक्ष रह चुके हैं)
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