प्रयागराज में भी बड़ा धमाका करने वाले थे बजरंगी के शूटर वकील पांडेय और अमजद
दो दिन पहले हुई मुठभेड़ में मार गिराए गए मुन्ना बजरंगी के दो शूटर जिले में भी बड़ा धमाका करने वाले थे। दोनों ने पिछले एक हफ्ते से जिले में पनाह ले रखी थी और अचानक उनकी गतिविधियां भी बढ़ गई थीं। एसटीएफ अफसरों ने भी यह बात स्वीकार की है कि उनकी टीम पिछले एक हफ्ते से उनके पीछे लगी हुई थी। फिलहाल एसटीएफ उनके शरणदाताओं का पता लगाने में जुटी है।
यूपी के कई शहरों के साथ ही झारखंड पुलिस के लिए चुनौती बने भदोही निवासी वकील पांडेय व अमजद दो दिन पहले एसटीएफ स्थानीय इकाई के साथ हुई मुठभेड़ में नैनी इलाके में मार गिराए गए थे। एसटीएफ ने दावा किया था कि दोनों मुन्ना बजरंगी के साथ ही माफिया दिलीप मिश्र के लिए भी काम करते थे।
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, कुख्यात वकील व अमजद जिले में भी कोई बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले थे। एसटीएफ को उनके जिले में होने की खबर एक हफ्ते पहले ही मिल गई थी। तब से अलग-अलग टीमें उनकी तलाश में लगी हुई थीं। खास बात यह कि अचानक से उनकी गतिविधियां भी तेज हो गई थीं। जिसके बाद एसटीएफ ने उन्हें पकड़ने केलिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी।
कौन था शरणदाता?
सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से दोनों शूटर पिछले एक हफ्ते से जिले में रह रहे थे, उससे साफ है कि यहां उनका कोई न कोई शरणदाता जरूर था। जो उन्हें पैसों के साथ ही अन्य सुविधाएं भी मुहैया करा रहा था। सूत्रों का कहना है कि शूटरों का मूवमेंट शहर में भी था। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि उनके निशाने पर शहर का कोई नामी व्यक्ति तो नहीं था। एक आशंका है कि नैनी निवासी आरएसएस नेता व सपा नेता उनके टारगेट पर रहे हों। दरअसल दिलीप मिश्रा से दोनों की हत्या की सुपारी लेने वाले खान मुबारक गिरोह के एक लाख के इनामी शूटर नीरज उर्फ अखंड प्रताप सिंह ने इस बात का खुलासा किया था कि इस हत्याकांड को उसे वकील के साथ ही मिलकर अंजाम देना था। लेकिन उसके पकड़े जाने के बाद योजना फेल हो गई। यह भी आशंका है कि दोनों उसी काम को पूरा करने की फिराक में हों।
- दोनों शूटरों केपिछले एक हफ्ते से जिले मेें होने की सूचना मिल रही थी। सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। उसके शरणदाता कौन थे, उनका भी पता लगाया जा रहा है। - नवेंदू सिंह, डिप्टी एसपी एसटीएफ
पुलिस को चकमा देने के लिए करते थे इंटरनेट कॉल