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मुन्ना बजरंगी हत्याकांड की होगी सीबीआई जांच, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिए आदेश

Tue, 25 Feb 2020 04:52 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 25 Feb 2020 04:52 PM IST
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Munna Bajrangi murder case Allahabad High Court ordered to CBI inquiry
Munna Bajrangi - फोटो : अमर उजाला
चर्चित शूटर मुन्ना बजरंगी की बागपत जिला जेल में हत्या की घटना की जांच सीबीआई को दे दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह की याचिका पर सीबीआई को मामले की जांच कर प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है। 
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मुन्ना बजरंगी की झांसी से बागपत जिला जेल में लाए जाने के बाद जेल परिसर में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कोर्ट ने सीबीआई को 20 अप्रैल को जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
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सीमा सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति राजीव मिश्र की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने कहा है कि झांसी से बागपत तबादले एवं उसी दिन जेल में पिस्तौल आने के पीछे की साजिश में अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए। साथ ही पिस्टल की बैलिस्टिक जांच कर हत्या में प्रयुक्त पिस्टल की पहचान की पुष्टि भी की जाए।
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माफिया मुख्तार अंसारी के गैंग के शूटर मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने हत्या की साजिश की सीबीआई जांच की मांग की थी। उसका आरोप था कि हत्या के लिए ही एक जेल से दूसरे जेल लाया गया। इस साजिश का पर्दाफाश किया जाए। शासन ने जेल अधिकारियों को निलंबित कर घटना पर पर्दा डालने की कोशिश की है। अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।

बता दें कि साल 2018 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिला कारागार में मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई थी। तत्कालीन जेलर यूपी सिंह ने जेल में बंद सुनील राठी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने सुनील राठी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। चर्चित प्रकरण का ट्रायल जिला जज राम मनोहर नारायण मिश्रा की कोर्ट में चल रहा है।  

ये था पूरा मामला
बड़ौत से बसपा के पूर्व विधायक एवं वर्तमान में भाजपा नेता लोकेश दीक्षित और उनके भाई नारायण दीक्षित से साल 2017 में मोबाइल के जरिये रंगदारी मांगी गई थी। पुलिस की जांच में मुन्ना बजरंगी का नाम सामने आया था। इसी मामले में आठ जुलाई 2018 की रात बजरंगी को बागपत जेल में शिफ्ट किया गया था।

नौ जुलाई की सुबह सवा छह बजे बजरंगी की तन्हाई बैरक के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद शासन ने प्रकरण की जांच कराई थी। लापरवाही उजागर होने पर तत्कालीन जेलर उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव, मुख्य बंदी रक्षक अरजिंदर सिंह और माधव कुमार को सस्पेंड कर दिया गया था।

परदे के पीछे छिपे कई राज
मुन्ना बजरंगी हत्याकांड में परदे के पीछे अब भी कई राज छिपे हैं। जेल में पिस्टल कैसे पहुंची, फोटो वायरल किसने किए। बजरंगी की हत्या एक पिस्टल से की गई थी या दो पिस्टल थीं। जो पिस्टल बरामद हुई, उसका सच क्या है। ऐसे तमाम सवालों के जवाब अब तक नहीं मिल पाए हैं।
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