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नगर निगम तेजी से करा रहा सफाई
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 29 Aug 2016 02:15 AM IST
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इलाहाबाद। बाढ़ के पानी में पूरे 17 दिन घिरे रहने के बाद पानी वापस लौटा तो जेके आशियाना के शबेनूर, मोहम्मद शमीम और गौस नगर के परवेज अहमद घर की सफाई में जुटे हैं। शनिवार के बाद रविवार का भी पूरा दिन सफाई में बीत गया। इन लोगों ने घरों से भारी मात्रा में मिट्टी, सिल्ट निकालने के बाद दीवारों में जमी काई को साफ किया। 13 सितंबर को बकरीद है सो मेहमान नवाजी के लिए अब घरों में रंग-रोगन के साथ सजा-संवारा भी है। शबेनूर बाढ़ की विभिषिका भूलकर रविवार को पूरे दिन पति, बच्चों के साथ साफ सफाई में जुट रहीं तो शम्स नगर, हड्डी गोदाम, अहमद नगर, पव्वा कॉलोनी आदि इलाकों में भी बाढ़ का पानी लौटने के बाद पूरा परिवार घर से लेकर सड़क , गलियों तक की सफाई में जुटा है। हालांकि पूर्व पार्षद नफीस अनवर के प्रयास से नगर निगम इन इलाकों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर तेजी से सफाई करा रहा है। उधर, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से पानी निकलने के साथ 90 फीसदी लोग घरों को वापस लौट आए हैं और दिन-रात घरों की सफाई में जुटे हैं।
गंगा से लगे इलाकों में बाढ़ का पानी लगातार आबादी से दूर कछार की ओर जा रहा है। दारागंज में सब्जी मंडी से दशाश्वमेध घाट होकर नागवासुकि मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर पानी काफी नीचे जाने के बाद घरों में सफाई का काम तेज हो गया है। बघाड़ा, ढरहरिया, सादियाबाद, सलोरी, ओम गायत्री नगर, काटजू कॉलोनी, भुलई का पुरा, गोविंदपुर में भी घर-घर सफाई का काम तेजी से हो रहा है। बाढ़ में सबसे ज्यादा प्रभावित सलोरी के शुक्ला मार्केट से गोविंदपुर स्थित घोष स्वीट्स तक जाने वाली सड़क पर कैलाशपुरी मोहल्ले से शनिवार रात तक पानी पूरी तरह निकल गया। इस इलाके में बाढ़ का पानी घरों की पहली मंजिल तक पहुंच गया था। रविवार सुबह से यहां अशोक सचान, गंगा पाल, सुनील पांडेय आदि घरों की सफाई में जुटे रहे। अशोक बोले, करीब दो सप्ताह पानी भरा रहने के कारण ज्यादातर घरों के निचले हिस्से में बिजली की वायरिंग, पंखे, स्विच सब खराब हो चुके हैं। बाढ़ के साथ आई गंदगी की सफाई के बाद घरों में रंग-रंगोन के साथ यह सब भी ठीक कराना पड़ेगा। मेहंदौरी से बेली गांव, ऊंचवागढ़ी, राजापुर गंगा नगर, नेवादा से द्रोपदी घाट तक जलस्तर नीचे जाने के बाद घर-घर सफाई का काम जोरों से चल रहा है।
प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त कर्मचारी भी लगाकर साफ-सफाई
इलाहाबाद। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सफाई के लिए नगर निगम ने पूरी ताकत झोंक दी है। नियमित के साथ बड़ी संख्या में अतिरिक्त कर्मचारी लगाकर प्रभावित क्षेत्रों में सफाई कराई जा रही है। नगर आयुक्त शेष मणि पांडेय, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.वाईके चतुर्वेदी से लेकर मुख्य अभियंता मोहनजी पांडेय, राजीव राठी समेत अन्य अफसर और अभियंता विभिन्न मोहल्लों में सफाई कार्य की निगरानी कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने बाढ़ के लौटने के बाद खाली प्लाटों पर भरे पानी को नाली बनाकर स़ड़क के किनारे की नाली से मिलाने का निर्देश दिया।
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रविवार को गौस नगर, शम्स नगर, करेलाबाग से लेकर सदियापुर, दरियाबाद, कीडगंज तक बाढ़ के साथ आई गंदगी को हटवाने के साथ बड़े पैमाने पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया गया। जगह-जगह जमी काई खत्म करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर का भी छिड़काव हुआ। दारागंज से लेकर बघाड़ा, सलोरी, कैलाशपुरी, गोविंदपुर, शिवकुटी, तेलियरगंज, रसूलाबाद और मेहंदौरी से लेकर नेवादा तक सड़क, गलियों और घरों के सामने भारी मात्रा में फैली गंदगी हटाई गई। इन इलाकों में भी मैलाथियान, ब्लीचिंग, चूने का छिड़काव कराया गया। बाढ़ प्रभावित सभी क्षेत्रों में फॉगिंग भी लगातार कराई जा रही है। अशोक, नेवादा आदि में खाली प्लाटों पर भारी मात्रा में पानी भरा है। नगर आयुक्त ने तत्काल प्लाट से सड़क तक कच्ची नाली बनाकर पानी निकलवाने का आदेश दिया, ताकि पानी जमा रहने से बीमारी फैलने का खतरा हो।
पानी हटाने के बाद सामने आ रही घरों की दुर्दशा
इलाहाबाद। गंगा-यमुना में आई बाढ़ और पानी में लगातार उठती रही तेज लहरों ने सैकड़ों घरों को बर्बाद कर दिया है। पानी के आबादी के दूर जाने के बाद अब लोग अपने घरों को देख कर चिंतित हैं। गौसनगर बाजूपुर में शनिवार शाम बाढ़ के पानी हाल ही बने मकान के समा जाने से भी लोग दहशत में हैं। इस मकान के मालिक के साथ अन्य मकानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग भी उठने लगी है।
करेली में मक्का मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद साबिर के मकान की पहली मंजिल दो सप्ताह तक पानी में डूबी रही। पानी हटने के बाद उनके घर की दीवारों में लंबी-लंबी दरारे पड़ गई हैं। साबिर के घर के पीछे ही जामिन अब्बास का मकान है। यमुना की लहरों ने उनके मकान की दीवारों को भी हिलाकर रख दिया है। जगह-जगह दरार के साथ दीवारों का प्लास्टर भी उखड़ गया है। यही हाल नेवादा से ऊंचवागढ़ी, राजापुर गंगा नगर तक निचले इलाकों में बने मकानों का भी है। गंगा में उठने वाली तेज लहरों ने ज्यादातर मकानों को कमजोर कर दिया है। इन इलाकों में बड़ी संख्या अर्धनिर्मित मकान हैं। ऐसे ज्यादातर मकानों की दीवारों ढह चुकीं हैं और ईंट बाढ़ के पानी में बह गए।
गौसनगर बाजूपुर में कच्चे नाले के किनारे बना एक मकान शनिवार को बाढ़ के पानी में समा जाने के बाद उसके मालिक मोहम्मद सिद्दीक गहरे सदमे में हैं। 1995 की बाढ़ में अपने बड़े पुत्र को खोने और अब बाढ़ में ही आशियाना बिखर जाने का सदमा इस कदर हावी है कि सिद्दीक और उनकी पत्नी तारा बानो के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे। पड़ोसी उन्हें ढांढस दे रहे हैं लेकिन जीवन भर की पूंजी लगाकर खड़ा किया आशियाना पलभर में धराशायी हो जाने का गम उन्हें उबरने नहीं दे रहा। सिद्दीक को अब जिला प्रशासन से ही आस है। क्षेत्र के पूर्व पार्षद नफीस अनवर ने बताया कि रविवार को उनके साथ मोहल्ले के कई लोगों ने क्षेत्रीय विधायक से मिलकर सिद्दीक को मुआवजा दिलाने की मांग की है।
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गंगा से लगे इलाकों में बाढ़ का पानी लगातार आबादी से दूर कछार की ओर जा रहा है। दारागंज में सब्जी मंडी से दशाश्वमेध घाट होकर नागवासुकि मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर पानी काफी नीचे जाने के बाद घरों में सफाई का काम तेज हो गया है। बघाड़ा, ढरहरिया, सादियाबाद, सलोरी, ओम गायत्री नगर, काटजू कॉलोनी, भुलई का पुरा, गोविंदपुर में भी घर-घर सफाई का काम तेजी से हो रहा है। बाढ़ में सबसे ज्यादा प्रभावित सलोरी के शुक्ला मार्केट से गोविंदपुर स्थित घोष स्वीट्स तक जाने वाली सड़क पर कैलाशपुरी मोहल्ले से शनिवार रात तक पानी पूरी तरह निकल गया। इस इलाके में बाढ़ का पानी घरों की पहली मंजिल तक पहुंच गया था। रविवार सुबह से यहां अशोक सचान, गंगा पाल, सुनील पांडेय आदि घरों की सफाई में जुटे रहे। अशोक बोले, करीब दो सप्ताह पानी भरा रहने के कारण ज्यादातर घरों के निचले हिस्से में बिजली की वायरिंग, पंखे, स्विच सब खराब हो चुके हैं। बाढ़ के साथ आई गंदगी की सफाई के बाद घरों में रंग-रंगोन के साथ यह सब भी ठीक कराना पड़ेगा। मेहंदौरी से बेली गांव, ऊंचवागढ़ी, राजापुर गंगा नगर, नेवादा से द्रोपदी घाट तक जलस्तर नीचे जाने के बाद घर-घर सफाई का काम जोरों से चल रहा है।
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प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त कर्मचारी भी लगाकर साफ-सफाई
इलाहाबाद। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सफाई के लिए नगर निगम ने पूरी ताकत झोंक दी है। नियमित के साथ बड़ी संख्या में अतिरिक्त कर्मचारी लगाकर प्रभावित क्षेत्रों में सफाई कराई जा रही है। नगर आयुक्त शेष मणि पांडेय, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.वाईके चतुर्वेदी से लेकर मुख्य अभियंता मोहनजी पांडेय, राजीव राठी समेत अन्य अफसर और अभियंता विभिन्न मोहल्लों में सफाई कार्य की निगरानी कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने बाढ़ के लौटने के बाद खाली प्लाटों पर भरे पानी को नाली बनाकर स़ड़क के किनारे की नाली से मिलाने का निर्देश दिया।
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रविवार को गौस नगर, शम्स नगर, करेलाबाग से लेकर सदियापुर, दरियाबाद, कीडगंज तक बाढ़ के साथ आई गंदगी को हटवाने के साथ बड़े पैमाने पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया गया। जगह-जगह जमी काई खत्म करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर का भी छिड़काव हुआ। दारागंज से लेकर बघाड़ा, सलोरी, कैलाशपुरी, गोविंदपुर, शिवकुटी, तेलियरगंज, रसूलाबाद और मेहंदौरी से लेकर नेवादा तक सड़क, गलियों और घरों के सामने भारी मात्रा में फैली गंदगी हटाई गई। इन इलाकों में भी मैलाथियान, ब्लीचिंग, चूने का छिड़काव कराया गया। बाढ़ प्रभावित सभी क्षेत्रों में फॉगिंग भी लगातार कराई जा रही है। अशोक, नेवादा आदि में खाली प्लाटों पर भारी मात्रा में पानी भरा है। नगर आयुक्त ने तत्काल प्लाट से सड़क तक कच्ची नाली बनाकर पानी निकलवाने का आदेश दिया, ताकि पानी जमा रहने से बीमारी फैलने का खतरा हो।
पानी हटाने के बाद सामने आ रही घरों की दुर्दशा
इलाहाबाद। गंगा-यमुना में आई बाढ़ और पानी में लगातार उठती रही तेज लहरों ने सैकड़ों घरों को बर्बाद कर दिया है। पानी के आबादी के दूर जाने के बाद अब लोग अपने घरों को देख कर चिंतित हैं। गौसनगर बाजूपुर में शनिवार शाम बाढ़ के पानी हाल ही बने मकान के समा जाने से भी लोग दहशत में हैं। इस मकान के मालिक के साथ अन्य मकानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग भी उठने लगी है।
करेली में मक्का मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद साबिर के मकान की पहली मंजिल दो सप्ताह तक पानी में डूबी रही। पानी हटने के बाद उनके घर की दीवारों में लंबी-लंबी दरारे पड़ गई हैं। साबिर के घर के पीछे ही जामिन अब्बास का मकान है। यमुना की लहरों ने उनके मकान की दीवारों को भी हिलाकर रख दिया है। जगह-जगह दरार के साथ दीवारों का प्लास्टर भी उखड़ गया है। यही हाल नेवादा से ऊंचवागढ़ी, राजापुर गंगा नगर तक निचले इलाकों में बने मकानों का भी है। गंगा में उठने वाली तेज लहरों ने ज्यादातर मकानों को कमजोर कर दिया है। इन इलाकों में बड़ी संख्या अर्धनिर्मित मकान हैं। ऐसे ज्यादातर मकानों की दीवारों ढह चुकीं हैं और ईंट बाढ़ के पानी में बह गए।
गौसनगर बाजूपुर में कच्चे नाले के किनारे बना एक मकान शनिवार को बाढ़ के पानी में समा जाने के बाद उसके मालिक मोहम्मद सिद्दीक गहरे सदमे में हैं। 1995 की बाढ़ में अपने बड़े पुत्र को खोने और अब बाढ़ में ही आशियाना बिखर जाने का सदमा इस कदर हावी है कि सिद्दीक और उनकी पत्नी तारा बानो के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे। पड़ोसी उन्हें ढांढस दे रहे हैं लेकिन जीवन भर की पूंजी लगाकर खड़ा किया आशियाना पलभर में धराशायी हो जाने का गम उन्हें उबरने नहीं दे रहा। सिद्दीक को अब जिला प्रशासन से ही आस है। क्षेत्र के पूर्व पार्षद नफीस अनवर ने बताया कि रविवार को उनके साथ मोहल्ले के कई लोगों ने क्षेत्रीय विधायक से मिलकर सिद्दीक को मुआवजा दिलाने की मांग की है।