UP: मुख्तार के गुर्गे रामू मल्लाह की जमानत अर्जी खारिज, कोर्ट की टिप्पणी- मुख्तार अंसारी खुंखार गैंग का सरगना
कोर्ट ने कहा निष्पक्ष, निर्भीक व सही आपराधिक न्याय व्यवस्था के लिए गवाहों का निर्भीक, निष्पक्ष होना जरूरी है। तभी निष्पक्ष ट्रायल व कानून का शासन कायम रह सकता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा मुख्तार अंसारी खुंखार गिरोह का सरगना है। मुख्तार गैंग का सक्रिय सदस्य रामू मल्लाह स्वयं में खुंखार अपराधी है। हत्या षड्यंत्र जैसे जघन्य अपराधों के ट्रायल झेल रहा है। आपराधिक इतिहास है। फर्जी वोटर कार्ड, ग्राम प्रधान का फर्जी पता देकर ट्रायल से भाग रहा था। कोर्ट को धोखा दे रहा था। गैर जमानती वारंट व कुर्की कार्रवाई के बावजूद फरार रहा और कोर्ट से यह कह जमानत मांग रहा कि अधिकांश केसों में बरी हो चुका है। कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी कि जेल से बाहर आते ही गवाहों को प्रभावित करेगा और निष्पक्ष व निर्भीक ट्रायल संभव नहीं हो सकेगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति डी के सिंह ने चकपहद महरूमपुर, मुहम्मदाबाद, गाजीपुर के फर्जी पते के निवासी रामू मल्लाह की जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा इतना भय है कि कोई गवाही देने का साहस नहीं करता या गवाह पक्षद्रोही हो जाते हैं या गवाह को थका डालते हैं या मिला लेते हैं या मार देते हैं। जिसके चलते दुर्दांत अपराधी बरी हो जाते हैं।
कोर्ट ने कहा निष्पक्ष, निर्भीक व सही आपराधिक न्याय व्यवस्था के लिए गवाहों का निर्भीक, निष्पक्ष होना जरूरी है। तभी निष्पक्ष ट्रायल व कानून का शासन कायम रह सकता है। राज्य यदि गवाहों के जीवन संपत्ति की रक्षा नहीं कर सकती तो अपराध बढ़ेगा, गवाह पक्षद्रोही होंगे और अपराधी बरी होते रहेंगे। ऐसे अपराधियों का जेल में रहना न्याय व्यवस्था के लिए जरूरी है।