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UP : सांसद संजय सिंह बोले- जो लोग आज तक अपनी डिग्री नहीं दिखा पाए, वह शंकराचार्य से मांग रहे सुबूत

Fri, 23 Jan 2026 08:35 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 23 Jan 2026 08:35 PM IST
सार

Prayagraj News : आम  आदमी  पार्टी  के सांसद  संजय सिंह शुक्रवार को शंकराचार्य  स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचे। संजय सिंह ने कहा कि जो लोग आज तक अपनी डिग्री नहीं दिखा पाए वह शंकराचार्य से सुबूत मांग रहे हैं। संगम स्नान से रोककर सरकार ने घोर पाप किया है। 

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MP Sanjay Singh said, who have not been able to show their degrees demanding proof from Shankaracharya
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आशीर्वाद लेने पहुंचे आप पार्टी के सांसद संजय सिंह। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का आशीर्वाद लेने पहुंचे हैं। संजय सिंह ने कहा कि शंकराचार्य जी को संगम स्नान से रोककर यूपी सरकार ने घोर अपराध किया है। इससे बड़ा अपराध उनसे शंकराचार्य  होने का साक्ष्य मांगकर किया है। कहा कि जो लोग आज तक अपनी डिग्री नहीं दिखा पाए वह शंकराचार्य से सुबूत मांग रहे हैं। संजय का भाषण सुनकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। 

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सांसद संजय सिंह ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक घटना है, जिसका उदाहरण न पहले कभी मिला है और न आगे मिलेगा। शंकराचार्य के शिष्यों को धक्का देकर, चोटी खींचकर पीटा गया, उन्हें अपमानित किया गया और स्वयं शंकराचार्य जी को पावन संगम स्नान से रोका गया। यह घोर अपराध और पाप है, जिसकी जिम्मेदार सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश सरकार और उसका प्रशासन है। इससे भी अधिक अपमानजनक यह है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी से उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया।
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शंकराचार्य का फैसला पीएम और सीएम और कमिश्नर नहीं करेंगे

आप सांसद ने कहा कि जो लोग आज तक अपनी डिग्री तक नहीं दिखा पाए, वे आज शंकराचार्य जी से उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांग रहे हैं। यह कैसा धर्म और कैसी व्यवस्था उत्तर प्रदेश में चल रही है। शंकराचार्य कौन है और कौन नहीं, इसका फैसला न प्रधानमंत्री करेंगे, न मुख्यमंत्री, न कोई पुलिस कमिश्नर और न ही कोई कानूनगो। शंकराचार्य हिंदू धर्म की परंपरा और शास्त्रीय रीति-रिवाजों से तय होते हैं, और इस पर सवाल उठाने का किसी को कोई अधिकार नहीं है।


कहा कि वे स्वयं उस समय भी शंकराचार्य जी के साथ खड़े रहे हैं, जब उन्होंने मां गंगा के निर्मल और अविरल प्रवाह के लिए आंदोलन चलाया था। वाराणसी में उन्होंने शंकराचार्य जी के आंदोलन में भाग लिया, इसके बाद स्वामी जी ने गौहत्या के खिलाफ अभियान चलाया। शंकराचार्य जी हमेशा सरकार की गलत नीतियों का विरोध करते आए हैं—चाहे सत्ता में भाजपा हो, बसपा हो, सपा हो या आम आदमी पार्टी। धर्म और धार्मिक रीति-रिवाजों के खिलाफ जब भी कोई काम होता है, शंकराचार्य जी उसका विरोध करते हैं, और यही बात सत्ता को खटकती है।

उन्होंने सवाल किया कि जब महाकुंभ में अन्य शंकराचार्यों के साथ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी को शंकराचार्य के रूप में स्नान कराया गया, तब वे शंकराचार्य थे, और जब देश के प्रधानमंत्री स्वयं उनके चरण स्पर्श करते हैं, तब भी वे शंकराचार्य ही होते हैं। लेकिन जैसे ही उन्होंने सरकार की आलोचना की, उनसे पूछा जाने लगा कि आप शंकराचार्य हैं या नहीं। यह दोहरा चरित्र और तानाशाही मानसिकता नहीं तो और क्या है।

संजय सिंह ने कहा कि इस पूरी घटना से उनका मन बेहद दुखी और पीड़ित है। उन्होंने बताया कि जब वे ‘रोज़गार दो–सामाजिक न्याय दो’ पदयात्रा पर थे, तब भी शंकराचार्य जी से उनकी बातचीत हुई थी और उसी समय उन्होंने उनके दर्शन कर आशीर्वाद लेने का वादा किया था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आम आदमी पार्टी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के आंदोलन में पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ी है। मैं यहां किसी राजनीतिक दल के नेता के रूप में नहीं, बल्कि शंकराचार्य जी के समर्थन में खड़ा हूं।

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90 साल के बुजुर्ग संत को घसीटा गया

आप सांसद ने कहा कि अपनी पदयात्रा के दौरान जब उन्होंने मणिकर्णिका घाट को तोड़े जाने का विरोध किया, तो उन पर भी एफआईआर दर्ज कर दी गई। काशी कॉरिडोर के नाम पर वाराणसी के प्राचीन पौराणिक मंदिरों को तोड़ा गया, तब भी शंकराचार्य जी ने आवाज उठाई। क्या इन विषयों को उठाना गलत है? क्या इस अनैतिक कार्य पर बोलना अपराध है? उन्होंने कहा कि परम पूज्य शंकराचार्य जी ने जब भी बोला है, धर्म के पक्ष में बोला है। अधर्मी लोगों को इससे समस्या हो सकती है, लेकिन आम आदमी पार्टी को इसकी कोई चिंता नहीं—हम सब शंकराचार्य जी के साथ हैं।

मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने कहा कि यह घटना अत्यंत दुखद और पीड़ा देने वाली है। 90 वर्ष के बुजुर्ग संत को घसीटा गया, उनके शिष्यों को पीटा गया और शंकराचार्य जी को संगम स्नान से वंचित किया गया—यह प्रयागराज की पवित्र धरती पर किया गया घोर पाप है। इसके लिए उत्तर प्रदेश की तानाशाह सरकार और उसका प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार है। शंकराचार्य जी से उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सनातन धर्म का अपमान है।  

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