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कोरोना काल के 45 दिनों में टले 6000 से ज्यादा ऑपरेशन

Tue, 18 May 2021 12:03 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 18 May 2021 12:03 AM IST
सार

  • सरकारी और निजी अस्पतालों में नहीं हो रही सर्जरी, डॉक्टरों की सलाह से मरीज ले रहे दवाएं
  • मेडिकल कॉलेज के एसआरएन अस्पताल में चल रही ट्रामा ओटी, कॉल्विन में सिर्फ मलहम-पट्टी, बेली में सिर्फ कोविड संक्रमितों की भर्ती, एमडीआई में भी आंखों के सर्जरी नहीं

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More than 6000 operations postponed in 45 days of Corona period
Surgery

विस्तार

कोरोना संक्रमण के बढ़े खतरे और अस्पतालों में कोविड मरीजों की भरमार से सरकारी और निजी अस्पतालों में बीते 45 दिनों में छह हजार से ज्यादा ऑपरेशन टाले गए हैं। अस्पतालों में कोविड वार्ड बनाए जाने और मरीजों के भर्ती किए जाने से ऑपरेशन वाले मरीजों को डॉक्टर दवाएं लेने की सलाह दे रहे हैं। यही नहीं इंडोस्कोपी जैसी जरूरी जांचें भी नहीं हो पा रही हैं। मेडिकल कॉलेज और तीन गैस्ट्रो लिवर सेंटरों में प्रतिदिन लगभग सौ इंडोस्कोपी का स्कोर रहता था। इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर में कुछ गंभीर मरीजों और नवजात बच्चों की गिनती की नौ सर्जरी ही की जा सकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टर ही नहीं स्टाफ कोविड ड्यूटी पर हैं। संक्रमण कम होने पर ही सर्जरी की जा सकेंगी।

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More than 6000 operations postponed in 45 days of Corona period
Surgical team - फोटो : prayagraj

जिले में ही नहीं मंडल में मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन) में सामान्य दिनों में 70 से 80 ऑपरेशन किए जाने का रिकार्ड है। हर दिन अलग-अलग विभागों के लिए ओटी निर्धारित हैं। ट्रामा और इमरजेंसी समेत एसआरएन में सात माड्यूलर ओटी हैं। कोरोना काल में ऑपरेशन बंद हुए तो दो ओटी 

में मरम्मत का काम चल रहा है। एक अप्रैल से 15 मई तक एसआरएन में ऑपरेशन नहीं किए गए। मई भर यही स्थिति बनी रहने की उम्मीद है। सर्जरी के नाम पर शुरुआती दौर में तो इक्का-दुक्का दुर्घटना में घायल या बर्न के मामले तो आए, लेकिन कर्फ्यू की अवधि में ट्रामा ओटी भी कई दिनों से ठप है। यहां तैनात सर्जन भी खाली समय का सद्उपयोग कोविड हेल्प सेंटर में सेवाओं से कर रहे हैं। 

विभागाध्यक्ष सर्जरी डॉ. शबी अहमद के मुताबिक सर्जरी तो बंद है, लेकिन विभाग के 22 डॉक्टर, स्टाफ कोविड आईसीयू, एचडीयू सहित अन्य वार्डों में कोविड मरीजों के उपचार में लगाए गए हैं। यही नहीं ऑपरेशन के ऐसे मामलों में जिनमें लोगों की जान पर बन आई हो तो ट्रामा ओटी में करीब दस लोगों के ऑपरेशन किए गए। हॉर्निया, हड्डी की टूटफूट, न्यूरो, पाइल्स जैसी दिक्कतों से पीड़ित मरीजों को दवाएं दी जा रही हैं। 

मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय कॉल्विन में भी अब सामान्य मरीजों का इलाज तो जैसे तैसे किया जा रहा है, लेकिन सर्जरी का काम ठप है। यहां दिन भर में दस ऑपरेशन किए जाते रहे हैं। प्रमुख अधीक्षक डॉ. सुषमा श्रीवास्तव के मुताबिक शासनादेश का अनुपालन कर मरीजों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए सर्जरी टाली जा रही हैं। गंभीर मामले एसआरएन रेफर किए जाते हैं। 

तेज बहादुर सप्रू चिकित्सालय बेली में और मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय में भी सर्जरी का काम ठप है। बेली एल टू कोविड अस्पताल बना है, इसलिए यहां सामान्य मरीजों की पट्टी तक नहीं हो रही है। ट्रामा सेंटर कोविड के गंभीर मरीजों का आईसीयू बना है। औसतन दिन भर में दस आंखों के और पांच सामान्य सर्जरी होती रही है, जो चार अप्रैल से बंद है। 

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More than 6000 operations postponed in 45 days of Corona period
spine surgery

निजी अस्पतालों में सिर्फ नाम की ओटी

जिले के करीब 350 निजी अस्पतालों में प्रतिदिन औसतन 700 से अधिक छोटी-बड़ी सर्जरी की जाती रही है। कोरोना संक्रमण काल में बड़े नर्सिग होम कोविड केयर सेंटर बने हैं। सामान्य मरीजों की भर्ती बंद है। ऐसे में दिन भर में गंभीर मरीजों की सर्जरी तब ही की जा रही है, जिसमें जान बचाने के लिए ऑपरेशन जरूरी हो। 

मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराना भी मुश्किल

मनोहरदास क्षेत्रीय नेत्र संस्थान एमडीआई में मोतियाबिंद के गंभीर मामलों और कॉर्निया प्रत्यारोपण के कुछ केस किए गए। अन्यथा मरीजों को दवाएं देकर घर भेजा जा रहा है। एमडीआई में प्रतिदिन 30 से 40 मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जाते थे, जो करीब डेढ़ महीने में भी नहीं पूरी हो पा रही है। निदेशक डॉ. एसपी सिंह के मुताबिक इमरजेंसी सेवाएं जारी हैं। गंभीर मामलों में सर्जरी का त्वरित निर्णय लिया जाता है, लेकिन कोविड जांच कराने के बाद ही मरीजों को ओटी में ले जाने की व्यवस्था है।

टूटा हाथ पर नहीं हुई सर्जरी

अलोपीबाग के यादवेंद्र सिंह एक हादसे में घायल हो गए। घटना 22 मार्च की है। जांच और एक्सरे रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर ने बताया सर्जरी होगी। सूजन कम करने की दवा दी। जब ऑपरेशन का दिन आया तो कोरोना संक्रमण चरम पर आ गया। अब सरकारी ही नहीं निजी अस्पतालों  में भी सर्जरी नहीं करा पा रहे हैं। परेशान होकर पक्का प्लास्टर कराकर वह आराम कर रहे हैं।

इंडोस्कोपी भी नहीं करा पाए प्रीतम नगर के सज्जन 

सिंह को पेट में दर्द था। लिवर विशेषज्ञ को दिखाया तो उन्होंने एक हफ्ते की दवा दी। जब दोबारा गए तो पांच दिन बाद इंडोस्कोपी के लिए बुलाया। इस बीच ओपीडी बंद हो गई। अब कई बार चक्कर काट चुके हैं, इंडोस्कोपी नहीं हो पा रही है। सलाह दी गई है कि कोरोना संक्रमण ज्यादा है, और सीएमओ की ओर से पाबंदी लगाई गई है। दवाएं लें स्थिति सामान्य हो तब इंडोस्कोपी कराइएगा। 

एलथ्री कोविड अस्पताल बनाए जाने से सर्जरी के केस टाले जा रहे हैं। इरजेंसी और ट्रामा ओटी चल रही है, जहां गंभीर मामलों की सर्जरी की जा रही है। शासनादेश के अनुपालन में सारा ध्यान कोविड संक्रमितों पर है। संक्रमण कम होने पर ऑपरेशन शुरू होंगे। वहीं स्त्री और प्रसूति रोग विभाग में प्रसव कराने के लिए विभागाध्यक्ष की अगुवाई में टीम मरीजों का उपचार, ऑपरेशन कर रही है। इसमें कोविड और नॉन कोविड मरीज शामिल हैं। - डॉ एसपी सिंह , प्राचार्य मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज

कोविड अस्पतालों में सामान्य मरीजों की ओपीडी और सर्जरी पर रोक है। इमरजेंसी सेवाएं जारी हैं। गंभीर मामले मेडिकल कॉलेज के एसआरएन अस्पताल के ट्रामा सेंटर रेफर किए जाने के निर्देश हैं। - डॉ. प्रभाकर राय, सीएमओ
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