प्रयागराज : पुणे से लाकर पांच ड्रमों में छिपाए थे रुपये, दो की रकम खर्च, रिश्तेदार भी जांच दायरे में
नवाबगंज के बरईपुर रामनगर में करोड़ों की नकदी मिलने के मामले में अब राकेश यादव उर्फ महाकाल और उसके भाई राजेश के रिश्तेदारों की आर्थिक गतिविधियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं।
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नवाबगंज के बरईपुर रामनगर में करोड़ों की नकदी मिलने के मामले में अब राकेश यादव उर्फ महाकाल और उसके भाई राजेश के रिश्तेदारों की आर्थिक गतिविधियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं। पुलिस को आशंका है कि पुणे से पांच ड्रमों में भरकर नकदी प्रयागराज लाई गई थी। इनमें से तीन ड्रमों में रखे 3.20 करोड़ रुपये बरामद हुए, जबकि बाकी दो में रखी रकम खर्च करने की आशंका है।
राकेश के घर के अंदर जमीन में दबाए गए तीन नीले ड्रमों से आयकर विभाग की टीम को तीन करोड़ 20 लाख 93 हजार रुपये मिले थे। पांच दिन तक घर, दुकान, बाग और खाली जमीन की जांच कराई गई। घर के छह कमरों में भी तलाशी और खोदाई हुई, लेकिन अतिरिक्त नकदी नहीं मिली। आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन टीम, पुलिस और बैंक अधिकारियों ने दोनों भाइयों से पूछताछ की।
बरामद तीनों ड्रमों में रखे नोटों की गिनती पूरी कर ली गई है। अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रकम कहां से जुटाई गई, किन लोगों के खातों के जरिये इसका लेनदेन हुआ और किन संपत्तियों पर खर्च की गई। पुलिस मामले में राकेश और राजेश के अलावा 15 से अधिक करीबियों के मोबाइल फोन और उनके संपर्कों की पड़ताल कर रही है। पुणे में रहने वाले दोनों भाइयों के दोस्तों और अन्य परिचितों के बारे में भी जानकारी जुटाई गई है। पुलिस ने इन लोगों से संबंधित रिकॉर्ड आयकर विभाग को उपलब्ध कराया है।
पुलिस ने रिश्तेदारों की भी सौंपी सूची
आशंका है कि पांच ड्रमों में लाई गई नकदी में से दो की रकम खर्च कर दी गई है। अब इस रकम का पता लगाने के लिए राकेश और राजेश के रिश्तेदारों की संपत्तियों की पड़ताल की जा रही है। आयकर विभाग जमीन, मकान समेत दूसरी परिसंपत्तियों का ब्योरा जुटा रहा है। जांच में छह साल में खरीदी गई संपत्तियों के स्रोत का पता लगाया जा रहा है।
कारोबार के लिए जुटाई थी रकम या कोई और था मकसद?
पुलिस और आयकर विभाग पता लगा रहा है कि राकेश, राजेश ने कारोबार का विस्तार करने और कंपनी खोलने के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाई थी या इसके पीछे कोई दूसरा उद्देश्य था। पुणे से सात बैगों में 15 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी लाने की जानकारी भी जांच के दायरे में है। आशंका है कि रकम लाने के लिए ट्रेन के जनरल कोच और निजी वाहनों का इस्तेमाल किया गया है।
रिश्तेदारों की संपत्तियों से खुलेगा खर्च का राज
आयकर विभाग की टीम राकेश और राजेश के करीबियों के बैंक खातों और संपत्तियों का मिलान कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कहीं नकदी को अलग-अलग लोगों के खातों और संपत्तियों के माध्यम से तो नहीं खपाया गया। डीसीपी गंगापार सोनम कुमार ने बताया कि आयकर विभाग की ओर से लगातार जांच की जा रही है।