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मॉडरेटर का नाम मिला तो हो जाएगा राजफाश
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 30 Mar 2018 01:01 AM IST
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई टीम को आयोग मॉडरेटर का नाम बताने को तैयार नहीं है। सीबीआई को मॉडरेशन की आड़ में गंभीर अनियमितताओं के सुराग मिले हैं। अगर सीबीआई को मॉडरेटर का नाम मिल जाता है तो बड़ा राजफाश होगा। सीबीआई की टीम मॉडरेटर का नाम जानने के लिए अड़ी हुई है, लेकिन आयोग किसी भी सूरत में नाम देने को तैयार नहीं है।
सूत्रों का कहना है कि सीबीआई को मॉडरेशन की आड़ में नंबरों के हेरफेर से जुड़े कई सुबूत मिले हैं। मॉडरेशन का फार्मूला है कि पहले चार से पांच कॉपियां विशेषज्ञों से जंचवाई जाती हैं और नंबर देने का मानक निर्धारित किया जाता है। अन्य कॉपियों पर उसी मानक के आधार पर नंबर दिए जाते हैं लेकिन, ज्यादातर मामलों में इस मानक को दरकिनार कर दिया गया। आयोग की ओर से आयोजित मुख्य परीक्षाओं में हिंदी और निबंध का पेपर अनिवार्य होता है। इन कॉपियों का मॉडरेशन किया जाता है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई को ज्यादातर परीक्षाओं में मॉडरेशन की गड़बड़ी मिली है।
सीबीआई को जो सुबूत मिले हैं उनके मुताबिक मॉडरेशन में कोई मानक नहीं अपना गया। पहले सभी कॉपियां जंचवा दी गईं। इसके बाद किसी एक व्यक्ति को मॉडरेटर बना दया गया। उसने अपनी मर्जी से नंबर घटाए और बढ़ाए। इसके पीछे तर्क दिया गया कि कोई परीक्षक अधिक नंबर देता तो उसकी जांची कॉपियों में नंबर घटा दिए गए और कोई परीक्षक कम नंबर देता है तो उसकी जांची कॉपियों में नंबर बढ़ा दिए गए। किसी अभ्यर्थी को परीक्षक ने 78 नंबर दिए थे तो उसका नंबर घटाकर 48 कर दिया गया और किसी अभ्यर्थी को 27 नंवबर मिल तो उसे बढ़ाकर 50 नंबर कर किया गया। कॉपियों का स्तर देखा ही नहीं गया। ज्यादातर कॉपियों पर एक ही मॉडरेटर की हैंडराइटिंग मिली है।
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ऐसे में प्रतियोगी की यह शिकायत अब पुष्ट होने लगी है कि मॉडरेशन के नाम पर नंबर देने में जमकर मनमानी की गई और चेहतों को अधिक नंबर दिए गए। इन तमाम सुरागों के आधार पर सीबीआई अब यह जानने में जुटी है कि आयोग ने जिसे मॉडरेटर बनाया वह कोई विशेषज्ञ था या आयोग का कोई सामान्य कर्मचारी। सीबीआई यह भी जानना चाहती है कि आखिर किस आधार पर नंबरों में इतना बड़ा फेरबदल किया गया। इन सब सवालों का जवाब मॉडरेटर के पास है लेकिन आयोग सीबीआई को मॉडरेटर का नाम बताने को तैयार नहीं है।
आयोग की ओर से सीबीआई को मॉडरेटर का नाम न बताए जाने का विवाद शासन तक पहुंच सकता है। सूत्रों का कहना है कि आयोग नाम नहीं बताता है तो सीबीआई के अफसर सीधे शासन में बात करेंगे। कुछ दिनों पहले मूल कॉपियों को लेकर भी सीबीआई और आयोग के बीच तनातनी हो गई थी। सीबीआई के अफसरों ने शासन में बात की थी, जिसके बाद आयोग को पीसीएस मुख्य परीक्षा-2015 की कॉपियां सीबीआई को उपलब्ध करानी पड़ीं।
सूत्रों का कहना है कि मॉडरेशन प्रक्रिया की जांच में सीबीआई को अब तक जो सुराग मिले हैं, उससे जांच टीम इसी निष्कर्ष पर पहुंची है कि यह प्रक्रिया एक पक्षीय है और भ्रष्टाचार का मुख्य स्नोत भी है। इसके जरिये किसी भी प्रतियोगी की रैंक को आसानी से बदला जा सकता है।
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सूत्रों का कहना है कि सीबीआई को मॉडरेशन की आड़ में नंबरों के हेरफेर से जुड़े कई सुबूत मिले हैं। मॉडरेशन का फार्मूला है कि पहले चार से पांच कॉपियां विशेषज्ञों से जंचवाई जाती हैं और नंबर देने का मानक निर्धारित किया जाता है। अन्य कॉपियों पर उसी मानक के आधार पर नंबर दिए जाते हैं लेकिन, ज्यादातर मामलों में इस मानक को दरकिनार कर दिया गया। आयोग की ओर से आयोजित मुख्य परीक्षाओं में हिंदी और निबंध का पेपर अनिवार्य होता है। इन कॉपियों का मॉडरेशन किया जाता है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई को ज्यादातर परीक्षाओं में मॉडरेशन की गड़बड़ी मिली है।
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सीबीआई को जो सुबूत मिले हैं उनके मुताबिक मॉडरेशन में कोई मानक नहीं अपना गया। पहले सभी कॉपियां जंचवा दी गईं। इसके बाद किसी एक व्यक्ति को मॉडरेटर बना दया गया। उसने अपनी मर्जी से नंबर घटाए और बढ़ाए। इसके पीछे तर्क दिया गया कि कोई परीक्षक अधिक नंबर देता तो उसकी जांची कॉपियों में नंबर घटा दिए गए और कोई परीक्षक कम नंबर देता है तो उसकी जांची कॉपियों में नंबर बढ़ा दिए गए। किसी अभ्यर्थी को परीक्षक ने 78 नंबर दिए थे तो उसका नंबर घटाकर 48 कर दिया गया और किसी अभ्यर्थी को 27 नंवबर मिल तो उसे बढ़ाकर 50 नंबर कर किया गया। कॉपियों का स्तर देखा ही नहीं गया। ज्यादातर कॉपियों पर एक ही मॉडरेटर की हैंडराइटिंग मिली है।
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ऐसे में प्रतियोगी की यह शिकायत अब पुष्ट होने लगी है कि मॉडरेशन के नाम पर नंबर देने में जमकर मनमानी की गई और चेहतों को अधिक नंबर दिए गए। इन तमाम सुरागों के आधार पर सीबीआई अब यह जानने में जुटी है कि आयोग ने जिसे मॉडरेटर बनाया वह कोई विशेषज्ञ था या आयोग का कोई सामान्य कर्मचारी। सीबीआई यह भी जानना चाहती है कि आखिर किस आधार पर नंबरों में इतना बड़ा फेरबदल किया गया। इन सब सवालों का जवाब मॉडरेटर के पास है लेकिन आयोग सीबीआई को मॉडरेटर का नाम बताने को तैयार नहीं है।
आयोग की ओर से सीबीआई को मॉडरेटर का नाम न बताए जाने का विवाद शासन तक पहुंच सकता है। सूत्रों का कहना है कि आयोग नाम नहीं बताता है तो सीबीआई के अफसर सीधे शासन में बात करेंगे। कुछ दिनों पहले मूल कॉपियों को लेकर भी सीबीआई और आयोग के बीच तनातनी हो गई थी। सीबीआई के अफसरों ने शासन में बात की थी, जिसके बाद आयोग को पीसीएस मुख्य परीक्षा-2015 की कॉपियां सीबीआई को उपलब्ध करानी पड़ीं।
सूत्रों का कहना है कि मॉडरेशन प्रक्रिया की जांच में सीबीआई को अब तक जो सुराग मिले हैं, उससे जांच टीम इसी निष्कर्ष पर पहुंची है कि यह प्रक्रिया एक पक्षीय है और भ्रष्टाचार का मुख्य स्नोत भी है। इसके जरिये किसी भी प्रतियोगी की रैंक को आसानी से बदला जा सकता है।