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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Mnja fatal , has become a trap for children

जानलेवा मंझा, बच्चों के लिए न बन जाए फंदा

Wed, 28 Oct 2015 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 28 Oct 2015 01:46 AM IST
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इलाहाबाद। चाइनीज मंझा कितना खतरनाक है, पिछले दिनों हुईं घटनाएं इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। यह बताने की जरूरत नहीं कि सड़क के ऊपर लहराता यह जानलेवा मंझा किसी का चेहरा या उम्र नहीं देखता, जो भी सामने आया वह इसका शिकार बन गया। भले ही स्कूल आने-जाने वाले बच्चे हों या कार्यालय जाने वाले कर्मचारी। इन परिस्थितियों में तो स्कूलों के मैदान या घर की छत पर खेलते बच्चे भी सुरक्षित नहीं लेकिन कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अफसरों को इसकी गंभीरता का एहसास नहीं हो पा रहा है।
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उन्हें समझना चाहिए कि हर अभिभावक उनकी तरह अपने बच्चों को चार पहिया वाहन से स्कूल नहीं भेज सकते और हर कर्मचारी को सरकारी चार पहिया वाहन नहीं मिलता। दस दुकानों में छापा मारकर उनमें से किसी एक दुकान से थोड़ा बहुत मंझा बरामद कर लेना इस समस्या का हल नहीं। पिछले दिनों लगातार हुई घटनाओं से अभिभावक अपने बच्चों के लिए फिक्रमंद हैं। बच्चा जब तक स्कूल से लौटकर नहीं आता, उन्हें चिंता सताती रहती है। कोई मां अपने बेटे तो कोई पत्नी अपने पति का दफ्तर से सुरक्षित घर लौटने के इंतजार में पूरा दिन गुजार देती है। चाइनीज मंझे की इस दशहत ने लोगों के मन में उथल-पुथल मचा रखी है।
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नैनी नए यमुना पुल, शास्त्री पुल और फाफामऊ पुल से रोज लाखों राहगीर निकलते हैं। परेड मैदान, अरैल, फाफामऊ पर बड़े पैमाने पर पतंगबाजी होती है और जानलेवा चाइनीज मंझा इन पुलों  पर लहराता रहता है। ऐसे में लाखों राहगीरों की जान सांसत में रहती है। गौरव भी नैनी पुल से निकल रहा था और चाइनीज मंझे ने उसकी जान ले ली।
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‘प्रशासन की लापरवाही के कारण शहर में चाइनीज मंझे की बिक्री पर रोक नहीं लग पा रही है। शहर में  खुलेआम इसकी बिक्री और उपयोग धड़ल्ले से जारी है। परेड ग्राउंड के आसपास के पतंग उड़ाने वाले लोगों के चाइनीज मंझे की चपेट में आकर आए दिन लोग घायल हो रहे हैं। इस पर पूरी तरह से रोक लगाए जाने की जरूरत है।’ सुष्मिता कानूनगो- प्रिंसपल, महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर

‘पतंग उड़ाना उल्लास का प्रतीक है लेकिन छोटी सी किसी की जान ले सकती है। घर से अपने बच्चों को बाहर भेजते समय अब माता-पिता इस चिंता में रहते हैं कि कहीं उनका बच्चा मंझे की चपेट में न आए। इस पर पूरी तरह से रोक की जरूरत है। ऐसा कुछ किया जाए कि जीवन की डोर न टूटने पाए। चाइनीज मंझे की बिक्री पर रोक के साथ दंड का प्रावधान भी होना चाहिए।’ फादर रॉल्फी डिसूजा, प्रिंसपल, सेंट जोसफ कॉलेज

‘सड़क पर चलते बच्चे कब चाइनीज मंझे की चपेट में आकर घायल हो जाएं, इस बात की चिंता सताती रहती है। स्कूल से बच्चे के सुरक्षित लौटने तक सुकून नहीं मिलता। मन में डर समाया रहता है।’ अभिभावक शमसुद्दीन, करेली

‘शहर को जोड़ने वाले नैनी ब्रिज, शास्त्री ब्रिज और फाफामऊ ब्रिज पर आए दिन पतंगबाजों की हरकत के कारण दुघटनाएं हो जाती है। घर से स्कूल की दूरी एक किलोमीटर भी नहीं। इसके बावजूद बेटी को स्कूल छोड़ते और लाते वक्त चाइनीज मंझे का भय सताता रहता है।’ अभिभावक श्याम गुप्ता, कर्नलगंज

‘शहर की प्रमुख सड़कों के किनारे पतंगबाजी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा देना चाहिए। शहर का कोई भी हिस्सा हो, मोहल्लों में आए दिन चाइनीज मंझे के कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं। किसी का गला तो किसी का चेहरा कट जा रहे है। अब तो बच्चे को स्कूल भेजने से भी डर लगता है।’ अभिभावक निधि यशार्थ, सिविल लाइंस


‘चाइनीज मंझे के डर से आफिस आने-जाने केसमय चौकन्ना रहना पड़ता है। डर सताता रहता है कि कहीं पतंगबाजों के शौक के कारण चोटिल न होना पड़ जाए। नगर निगम के ही कई कर्मचारी आए दिन यह शिकायत करते रहते हैं कि मंझे की चपेट में आकर बाइक से गिर पड़े। इस पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए।’ राजेन्द्र पालीवाल, कर्मचारी नगर निगम
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