मिशन एडमिशन : जहां पढ़ी थीं महादेवी वर्मा व सुभद्रा कुमारी चौहान, उसकी बिल्डिंग है बेजान, 129 वर्ष पहले हुआ था
इसी विद्यालय में कवियित्री महादेवी वर्मा व सुभद्रा कुमारी चौहान ने पढ़ाई की है। इसका गाैरवशाली इतिहास रहा है। पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी, मेडिकल कॉलेज की पूर्व प्रधानाचार्य डॉ.ममता सिंह और इविवि के संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ.निरुपमा भी यहां की छात्रा रही हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अंग्रेजी हुकूमत में केवल छात्राओं के लिए रामबाग में शुरू किए गए क्रॉस्थवेट गर्ल्स इंटर कॉलेज का भवन जर्जर हो गया है। छात्राओं की जान आफत में है। वर्षों से इस भवन की रंगाई-पुताई और मरम्मत का काम नहीं हुआ है। एक सदी पुराने विद्यालय की मोटी दीवारें अंग्रेजों के जमाने में बनवाई गई थीं। भवन को मरम्मत की जरूरत है और परिसर का साैंदर्यीकरण भी अपेक्षित है।
इसी विद्यालय में कवियित्री महादेवी वर्मा व सुभद्रा कुमारी चौहान ने पढ़ाई की है। इसका गाैरवशाली इतिहास रहा है। पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी, मेडिकल कॉलेज की पूर्व प्रधानाचार्य डॉ.ममता सिंह और इविवि के संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ.निरुपमा भी यहां की छात्रा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों से स्थितियां बदली हैं और छात्राओं की संख्या में गिरावट आई है। घनी आबादी में बने इस विद्यालय में वर्तमान में करीब 1200 छात्राओं का पंजीकरण हैं। उनको पढ़ाने के लिए 41 शिक्षिकाएं तैनात हैं।
अभी प्रवेश प्रक्रिया चल रही है और यूपी बोर्ड का फॉर्म भरने तक पंजीकरण होगा। कॉलेज की रसायन विषय की प्रवक्ता प्रीति कौशल ने बताया कि कोरोना से पहले बच्चों की संख्या लगभग 1400 थी। इस समय कुछ संख्या कम हुई है। लेकिन, अभी भी प्रवेश प्रक्रिया चालू है। साथ ही विद्यालय में विज्ञान, कॉमर्स, आर्ट्स के विषय चलते हैं। वहीं, हिंदी विषय की प्रवक्ता रेनू घिल्डियाल बताती हैं कि सरकारी विद्यालय होते हुए भी बच्चों की संख्या ठीक है। समय-समय पर कई अभियान चलाते हैं, जिससे लड़कियों की संख्या में बढ़ोतरी हो।
परिसर में गंदगी, उगी हैं झाड़ियां
क्रॉस्थवेट गर्ल्स इंटर कॉलेज की स्थापना 1894 में हुई थी। विद्यालय में साख तो बरकरार है, लेकिन भवन की स्थिति ठीक नहीं है। कक्षाओं की हालत भी बदतर है। दीवारों में सीलन आ गई है। विद्यालय का गेट तो सुंदर बना है, लेकिन अंदर भवन बेजान है। पुराने भवन में झाड़ू लग जाती है, लेकिन पुताई तो लंबे अर्से से नहीं हुई है। कक्षा तक जाने के लिए झाड़ियों का सामना करना पड़ता है।
20 एकड़ में फैले 129 वर्ष पुराने विद्यालय में 28 कक्षाएं हैं। यहां पर तैनात 41 शिक्षिकाओं में से इसी वर्ष दो सेवानिवृत्त हो जाएंगी। बुधवार को विद्यालय में कई शिक्षिकाएं नहीं थीं। बताया गया कि सात शिक्षिकाएं कंपार्टमेंट परीक्षा की कॉपियां चेक करने गई थीं। पांच शिक्षिकाएं अवकाश पर थीं। प्रधानाचार्य भी आकस्मिक छुट्टी पर थीं। यहां पर छह से 12वीं तक छात्राएं पढ़ रही हैं। कक्षा छह, सात, आठ में दो-दो, नौ व 10वीं में चार-चार सेक्शन हैं। वहीं, 11वीं व 12वीं में सात सेक्शन हैं।
विद्यालय में हर वर्ष छात्राएं टॉप करती हैं
विद्यालय में हिंदी व अंग्रेजी में करीब 2500 छात्राएं पढ़ रही हैं। हर वर्ष हाईस्कूल और इंटर की छात्राएं टॉप करती हैं। यूपी बोर्ड से कॉलेज को ए ग्रेड मिला है।
विद्यालय में छात्राओं की संख्या अच्छी है। एडमिशन पांच अगस्त तक चलेंगे। ऐसे में छात्राओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। बारिश की वजह से पुताई का काम नहीं हो सका था। लेकिन, अब अगले महीने से शुरू हो जाएगा। - स्नेह लता यादव, प्रधानाचार्य